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युवा अपनी शिक्षा में स्पोर्ट्स स्कोर भी शामिल करें
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Incorporate sports scores into your education for youth
- फोटो : BANDA
बांदा। भारतीय वॉलीबाल टीम के पूर्व कप्तान अभिजीत भट्टाचार्य ने युवाओं से कहा है कि अपनी शिक्षा में स्पोर्ट्स स्कोर भी शामिल करें। कभी हार न मानें। खुद को हमेशा अग्रसर रखें। ये बातें रविवार को भागवत प्रसाद मेमोरियल एकेडमी में कही। उन्होंने अपने जीवन से जुड़े खेल संबंधी कई अनुभव साझा किए।
उनके आगमन पर एकेडमी में महिला और पुरुष टीमों के बीच वालीबाल मैच हुआ। एकेडमी के खिलाड़ियों से कहा कि कभी हार न मानें। हमेशा खुद का आकलन भी करते रहें। एकेडमी के बच्चों ने उन्हें फूल आदि भेंट किए। कार्यक्रम की शुरूआत महात्मा बुद्ध की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप जलाकर हुई।
मैनेजिंग डायरेक्टर राम लखन कुशवाहा ने खिलाड़ियों को बड़ा सोचने की सलाह दी। निर्देशक संध्या कुशवाहा ने लक्ष्य पर डटे रहने की सलाह दी। कार्यक्रम संयोजक नामित, चेयरमैन अंकित कुशवाहा ने आभार जताया। यहां डीसीए सचिव वासिफ जमां, आरके सिंह, नवल किशोर चौधरी, वाजिफ जफर, केपी, अनीता, आदि उपस्थित रहे। संचालन डॉ. इंद्रजीत सिंह ने किया।
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बीच में खेलना नहीं छोड़ सकते
बांदा। ब्रह्मपुत्र वालीबाल लीग (बीवीएल) संस्थापक अभिजीत भट्टाचार्य वर्ष 2003 से 2005 तक भारतीय वालीबाल टीम के कप्तान रहे। प्राकृतिक गैस निगम से 2007 में रिटायरमेंट के बाद गृह राज्य असम में लड़कों को वालीबाल के प्रति प्रेरित किया। उनका कहना है कि यह ग्रामीण केंद्रित खेल है। खेल सीखना एक सतत प्रक्रिया है। इसे बीच में नहीं छोड़ सकते।
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उनके आगमन पर एकेडमी में महिला और पुरुष टीमों के बीच वालीबाल मैच हुआ। एकेडमी के खिलाड़ियों से कहा कि कभी हार न मानें। हमेशा खुद का आकलन भी करते रहें। एकेडमी के बच्चों ने उन्हें फूल आदि भेंट किए। कार्यक्रम की शुरूआत महात्मा बुद्ध की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप जलाकर हुई।
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मैनेजिंग डायरेक्टर राम लखन कुशवाहा ने खिलाड़ियों को बड़ा सोचने की सलाह दी। निर्देशक संध्या कुशवाहा ने लक्ष्य पर डटे रहने की सलाह दी। कार्यक्रम संयोजक नामित, चेयरमैन अंकित कुशवाहा ने आभार जताया। यहां डीसीए सचिव वासिफ जमां, आरके सिंह, नवल किशोर चौधरी, वाजिफ जफर, केपी, अनीता, आदि उपस्थित रहे। संचालन डॉ. इंद्रजीत सिंह ने किया।
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बीच में खेलना नहीं छोड़ सकते
बांदा। ब्रह्मपुत्र वालीबाल लीग (बीवीएल) संस्थापक अभिजीत भट्टाचार्य वर्ष 2003 से 2005 तक भारतीय वालीबाल टीम के कप्तान रहे। प्राकृतिक गैस निगम से 2007 में रिटायरमेंट के बाद गृह राज्य असम में लड़कों को वालीबाल के प्रति प्रेरित किया। उनका कहना है कि यह ग्रामीण केंद्रित खेल है। खेल सीखना एक सतत प्रक्रिया है। इसे बीच में नहीं छोड़ सकते।