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दो वर्ष में उठीं 80 अर्थियां,
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा।
Updated Tue, 09 Feb 2016 11:12 PM IST
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तंगहाली ने जीने की राहें बंद कर दीं तो एक छोटे से गांव में दो वर्ष के अंदर 80 लोगों की मौत हो गईं। यानी हर नौवें दिन एक परेशानहाल ने मौत को गले लगा लिया। मौत का शिकार हुए यह तंगहाल 60 बरस की उम्र से कम के थे। उधर, दूसरे गांव में 80 मजदूरों ने 40 दिन तक मनरेगा में मजदूरी की लेकिन उन्हें धेला नहीं मिला। घरों के चूल्हे ठंडे पड़े हैं।
नरैनी क्षेत्र में गरीबी का दंश झेल रहे परिवारों की यह हालत देखकर देख के वरिष्ठ लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता भारत डोगरा की आंखें भी आंसू से डबडबा गईं। उन्होंने सरकारों को तत्काल इन क्षेत्रों के लिए राहत बजट के साथ ही अपनी जवाबदेही भी बढ़ाने की सलाह दी है। भ्रष्टाचार को कड़ाई से नियंत्रित करने का अनुरोध किया है।
श्री डोगरा ने सोमवार को जनपद की नरैनी तहसील के कई गांवों का भ्रमण किया। इस दौरान ग्रामीणों के हालात को नजदीक से देखा। नौगवां गांव में श्री डोगरा को घेरे ग्रामीणों ने मृत्यु दर की जो जानकारी दी वह हैरतअंगेज थी। शायद ही मौतों का ग्राफ इतना अधिक किसी और गांवों में हो। यहां पिछले दो वर्षों में करीब 80 लोगों की मौत हो चुकी है। यह सब 40 से 60 वर्ष की उम्र के बीच के थे। इन मृतकों की 13 विधवाएं श्री डोगरा की चौपाल में शामिल थीं। मरने वालों में भोला, दुलारे, उमा, उत्तम सिंह, अर्जुन, सुंदर, आशाराम, झल्लू, कुंदीलाल और छुट्टन आदि बताए गए।
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इसी क्षेत्र के नींबी गांव में फटेहाल रह रहे मजदूरों ने बताया कि 31 दिसंबर से 8 फरवरी तक उन्होंने मनरेगा में मजदूरी की। इसके बाद गांव के सचिव ने यह डुग्गी पिटवाकर कि पैसा नहीं है मजदूरी नहीं मिलेगी, काम बंद करवा दिया। मजदूर भुखमरी की कगार पर हैं। सियाराम ने 50 खंती, रामदयाल, शिवऔतार और शिवकरन ने 45-45 खंती खोदी हैं। मजदूरी एक रुपया नहीं मिली। मिट्टी का यह काम बीडीओ ने कराया था।
केवटरा गांव में भी श्री डोगरा को भूख और अभाव का बेमिसाल नजारा नजर आया। यहां के ग्रामीणों ने बताया कि सिर्फ एक वक्त रूखी-सूखी रोटी खाकर गुजर कर रहे हैं। भूरा, रामकिशोर, शिव करन आदि ने बताया कि जंगल की लकड़ी काटकर आसपास के कस्बों में बेंच देते हैं। इससे सिर्फ एक वक्त का चूल्हा जलने का जुगाड़ हो पाता है।
श्री डोगरा के साथ भ्रमण कर रहे इस क्षेत्र के समाजसेवी और विद्याधाम समिति के मंत्री राजा भइया ने बताया कि पूरे नरैनी क्षेत्र में बमुश्किल 30 फीसदी ग्रामीणों और खासकर गरीबों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून का राशन मिला है। ग्रामीण राशन कार्ड देकर इधर-उधर भटक रहे हैं। उन्हें कोटे से दुत्कारा जा रहा है। अफसर कुछ भी सुनने को तैयार नहीं। श्री डोगरा ने कहा कि वह इस क्षेत्र के इन दैनीय हालात की रिपोर्ट तैयार कर केंद्र और राज्य सरकारों का ध्यान आकृष्ट कराने की कोशिश करेंगे।
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नरैनी क्षेत्र में गरीबी का दंश झेल रहे परिवारों की यह हालत देखकर देख के वरिष्ठ लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता भारत डोगरा की आंखें भी आंसू से डबडबा गईं। उन्होंने सरकारों को तत्काल इन क्षेत्रों के लिए राहत बजट के साथ ही अपनी जवाबदेही भी बढ़ाने की सलाह दी है। भ्रष्टाचार को कड़ाई से नियंत्रित करने का अनुरोध किया है।
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श्री डोगरा ने सोमवार को जनपद की नरैनी तहसील के कई गांवों का भ्रमण किया। इस दौरान ग्रामीणों के हालात को नजदीक से देखा। नौगवां गांव में श्री डोगरा को घेरे ग्रामीणों ने मृत्यु दर की जो जानकारी दी वह हैरतअंगेज थी। शायद ही मौतों का ग्राफ इतना अधिक किसी और गांवों में हो। यहां पिछले दो वर्षों में करीब 80 लोगों की मौत हो चुकी है। यह सब 40 से 60 वर्ष की उम्र के बीच के थे। इन मृतकों की 13 विधवाएं श्री डोगरा की चौपाल में शामिल थीं। मरने वालों में भोला, दुलारे, उमा, उत्तम सिंह, अर्जुन, सुंदर, आशाराम, झल्लू, कुंदीलाल और छुट्टन आदि बताए गए।
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इसी क्षेत्र के नींबी गांव में फटेहाल रह रहे मजदूरों ने बताया कि 31 दिसंबर से 8 फरवरी तक उन्होंने मनरेगा में मजदूरी की। इसके बाद गांव के सचिव ने यह डुग्गी पिटवाकर कि पैसा नहीं है मजदूरी नहीं मिलेगी, काम बंद करवा दिया। मजदूर भुखमरी की कगार पर हैं। सियाराम ने 50 खंती, रामदयाल, शिवऔतार और शिवकरन ने 45-45 खंती खोदी हैं। मजदूरी एक रुपया नहीं मिली। मिट्टी का यह काम बीडीओ ने कराया था।
केवटरा गांव में भी श्री डोगरा को भूख और अभाव का बेमिसाल नजारा नजर आया। यहां के ग्रामीणों ने बताया कि सिर्फ एक वक्त रूखी-सूखी रोटी खाकर गुजर कर रहे हैं। भूरा, रामकिशोर, शिव करन आदि ने बताया कि जंगल की लकड़ी काटकर आसपास के कस्बों में बेंच देते हैं। इससे सिर्फ एक वक्त का चूल्हा जलने का जुगाड़ हो पाता है।
श्री डोगरा के साथ भ्रमण कर रहे इस क्षेत्र के समाजसेवी और विद्याधाम समिति के मंत्री राजा भइया ने बताया कि पूरे नरैनी क्षेत्र में बमुश्किल 30 फीसदी ग्रामीणों और खासकर गरीबों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून का राशन मिला है। ग्रामीण राशन कार्ड देकर इधर-उधर भटक रहे हैं। उन्हें कोटे से दुत्कारा जा रहा है। अफसर कुछ भी सुनने को तैयार नहीं। श्री डोगरा ने कहा कि वह इस क्षेत्र के इन दैनीय हालात की रिपोर्ट तैयार कर केंद्र और राज्य सरकारों का ध्यान आकृष्ट कराने की कोशिश करेंगे।