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सौ मेगावाट के सौर ऊर्जा प्लांट बनेंगे
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Fri, 27 Feb 2015 12:15 AM IST
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सिर्फ 870 मेगावाट बिजली से फिलहाल काम चला रहे बुंदेलखंड को अब 100 मेगावाट और बिजली मिलेगी। यह सौर ऊर्जा से दी जाएगा। यूपी सरकार ने हाल ही में पेश किए अपने बजट में 20 मेगावाट के सौर ऊर्जा प्लांट से इसकी शुरूआत कर दी है।
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सौर ऊर्जा बिजली घरों की स्थापना में सबसे बड़ा रोड़ा जमीन का बना हुआ है। एक मेगावाट के लिए साढ़े तीन एकड़ भूमि की जरूरत पड़ती है। सौर ऊर्जा प्लांट स्थापना का काम प्राइवेट कंपनियों को सौंपा गया है।
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पूरे बुंदेलखंड वर्तमान समय में 870 मेगावाट बिजली की आपूर्ति हो रही है। यह मांग के मुताबिक नाकाफी है। बांदा में 320 एमवीए, उरई में 320 एमवीए, झांसी में 200 एमवीए और माताटीला में 30 एमवीए बिजली उत्पादन हो रहा है। हाल ही में मुख्यमंत्री ने महोबा में 10 मेगावाट के सौरऊर्जा प्लांट का उद्घाटन किया है।
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साथ ही बजट में बुंदेलखंड में 20 मेगावाट का सौर ऊर्जा मेगावाट का प्लांट लगाने के लिए 66 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। दिन-ब-दिन बुंदेलखंड में बढ़ रही बिजली की मांग के मद्देनजर पावर कारपोरेशन में यहां के लिए सौर ऊर्जा से संचालित होने वाले 100 मेगावाट क्षमता के बिजली घर स्थापित करने का प्रस्ताव शासन को भेजा है।
इसे चित्रकूटधाम मंडल में ही लगाए जाने की योजना है। अधिशासी अभियंता (ट्रांसमीशन) उमेश वर्मा ने बताया कि पनवाड़ी (महोबा) में 40 एमवीए और नरैनी (बांदा) में 20 एमवीए का सौर ऊर्जा प्लांट लगाने का फैसला किया गया है। इन दोनों प्लांटों के लिए जमीन मिल गई है। अलबत्ता बांदा में सौर ऊर्जा प्लांट के लिए फिलहाल भूमि का बंदोबस्त नहीं हो पाया।
इसके लिए प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि एक मेगावाट में साढ़े तीन एकड़ की दर से सौर ऊर्जा प्लांट के लिए भूमि की जरूरत होती है। एक मेगावाट में 10 लाख वाट होते हैं। प्लांट स्थापना में लगभग 90 रुपये प्रति वाट की दर से खर्च आता है।
प्रस्तावित 100 मेगावाट सौर ऊर्जा प्लांट चालू हो जाने के बाद बुंदेलखंड में बिजली की क्षमता 970 मेगावाट हो जाएगी। इससे आपूर्ति में सुधार आएगा।