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जांच रिपोर्ट आने में लेटलतीफी से मरीज परेशान
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बांदा। कोरोना संक्रमण को लेकर प्रशासन के लंबे-चौड़े दावे भी काम नहीं आ रहे। ऑक्सीजन की कमी और बेड की किल्लत के बीच संदिग्धों को कोरोना की जांच रिपोर्ट के लिए कई-कई दिन इंतजार करना पड़ रहा है। आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट आने में करीब दो से तीन दिन का समय लग रहा है। इस लेटलतीफी से मरीजों का सही समय पर उपचार नहीं हो पा रहा।
कोरोना की आरटीपीसीआर जांच राजकीय मेडिकल कालेज में होती है। ट्रूनॉट टेस्ट जिला अस्पताल में हो रहा है। जिला अस्पताल स्थित कोविड टेस्ट सेंटर सहित नगरीय स्वास्थ्य केंद्र और सीएचसी-पीएचसी में सैंपल कलेक्शन किए जा रहे हैं। संक्रमण की तेज लहर से आरटीपीसीआर जांच का दबाव बढ़ गया। इसकी वजह से मरीजों को समय पर रिपोर्ट नहीं मिल रही। सर्दी, खांसी, बुखार, श्वांस में दिक्कत वाले रोगियों का इलाज शुरू करने से पहले डाक्टर कोरोना जांच रिपोर्ट मांगते हैं। हालत यह है कि जब तक आरटीपीसीआर रिपोर्ट नहीं होती डाक्टर मरीजों को हाथ तक नहीं लगाते।
बानगी के तौर पर पद्माकर चौराहा, इंदिरा नगर, आवास विकास, स्वराज कालोनी के कई रोगियों ने जिला अस्पताल में स्वॉब नमूना दिया। लेकिन दो दिन बीत गए और उन्हें अब तक आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट नहीं मिली। राजकीय मेडिकल कालेज प्रधानाचार्य डा.मुकेश कुमार यादव ने बताया कि प्रतिदिन लगभग 1500 से 2000 टेस्ट किए जा रहे हैं। सीएमओ डा.एनडी शर्मा का दावा है कि 24 घंटे में मरीजों को रिपोर्ट उपलब्ध कराई जा रही है। पॉजिटिव या संदिग्ध मरीजों का इलाज रिपोर्ट आने से पहले शुरू किए जाने के डाक्टरों को निर्देश दिए गए हैं।
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केस-1
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पद्माकर चौराहा निवासी 27 वर्षीय युवक ने 17 अप्रैल को जिला अस्पताल कोविड सेंटर में सैंपल दिया था। लेकिन दो दिन तक उसे रिपोर्ट नहीं मिली। तीसरे दिन उसके परिजनों को रिपोर्ट लेने सीएमओ दफ्तर जाना पड़ा। युवक के मुताबिक रिपोर्ट आने के बाद डाक्टर ने उसका इलाज शुरू किया। तब तक मर्ज ने उसे और जकड़ लिया था। पांच हजार रुपये खर्च कर चेस्ट का सीटी स्कैन कराना पड़ा।
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केस-2
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बबेरू निवासी 45 वर्षीय किराना व्यवसायी बुखार और खांसी से पीड़ित था। 25 अप्रैल को उसने जिला अस्पताल आकर आरटीपीसीआर जांच कराई। उसकी रिपोर्ट तीन दिन बाद आई। आरोप लगाया कि पोर्टल पर भी रिपोर्ट अपलोड करने में लेटलतीफी हो रही है। अस्पताल जाकर जानकारी की, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। मजबूरन फोन पर डाक्टर से दवा पूछकर इलाज करते रहे।
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कोरोना की आरटीपीसीआर जांच राजकीय मेडिकल कालेज में होती है। ट्रूनॉट टेस्ट जिला अस्पताल में हो रहा है। जिला अस्पताल स्थित कोविड टेस्ट सेंटर सहित नगरीय स्वास्थ्य केंद्र और सीएचसी-पीएचसी में सैंपल कलेक्शन किए जा रहे हैं। संक्रमण की तेज लहर से आरटीपीसीआर जांच का दबाव बढ़ गया। इसकी वजह से मरीजों को समय पर रिपोर्ट नहीं मिल रही। सर्दी, खांसी, बुखार, श्वांस में दिक्कत वाले रोगियों का इलाज शुरू करने से पहले डाक्टर कोरोना जांच रिपोर्ट मांगते हैं। हालत यह है कि जब तक आरटीपीसीआर रिपोर्ट नहीं होती डाक्टर मरीजों को हाथ तक नहीं लगाते।
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बानगी के तौर पर पद्माकर चौराहा, इंदिरा नगर, आवास विकास, स्वराज कालोनी के कई रोगियों ने जिला अस्पताल में स्वॉब नमूना दिया। लेकिन दो दिन बीत गए और उन्हें अब तक आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट नहीं मिली। राजकीय मेडिकल कालेज प्रधानाचार्य डा.मुकेश कुमार यादव ने बताया कि प्रतिदिन लगभग 1500 से 2000 टेस्ट किए जा रहे हैं। सीएमओ डा.एनडी शर्मा का दावा है कि 24 घंटे में मरीजों को रिपोर्ट उपलब्ध कराई जा रही है। पॉजिटिव या संदिग्ध मरीजों का इलाज रिपोर्ट आने से पहले शुरू किए जाने के डाक्टरों को निर्देश दिए गए हैं।
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केस-1
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पद्माकर चौराहा निवासी 27 वर्षीय युवक ने 17 अप्रैल को जिला अस्पताल कोविड सेंटर में सैंपल दिया था। लेकिन दो दिन तक उसे रिपोर्ट नहीं मिली। तीसरे दिन उसके परिजनों को रिपोर्ट लेने सीएमओ दफ्तर जाना पड़ा। युवक के मुताबिक रिपोर्ट आने के बाद डाक्टर ने उसका इलाज शुरू किया। तब तक मर्ज ने उसे और जकड़ लिया था। पांच हजार रुपये खर्च कर चेस्ट का सीटी स्कैन कराना पड़ा।
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केस-2
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बबेरू निवासी 45 वर्षीय किराना व्यवसायी बुखार और खांसी से पीड़ित था। 25 अप्रैल को उसने जिला अस्पताल आकर आरटीपीसीआर जांच कराई। उसकी रिपोर्ट तीन दिन बाद आई। आरोप लगाया कि पोर्टल पर भी रिपोर्ट अपलोड करने में लेटलतीफी हो रही है। अस्पताल जाकर जानकारी की, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। मजबूरन फोन पर डाक्टर से दवा पूछकर इलाज करते रहे।
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