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साढ़े छह करोड़ से बने पशु क्लीनिक में ताला
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बांदा। मंडल मुख्यालय बांदा में 6.49 करोड़ रुपये की लागत से बने पशु चिकित्सा पॉलीक्लीनिक व पशु रोग निदान प्रयोगशाला शुरू कराने की प्रक्रिया में मंडलायुक्त के निर्देश पर पदों के सृजन की कार्रवाई शुरू हो गई है। सर्जरी, ग्यानोलॉजिस्ट, मेडिसिन, पैथालॉजिस्ट विभाग में नियुक्तियां की जानी हैं।
मंडल मुख्यालय में वर्ष 2017 में 6.49 करोड़ रुपये की लागत से पशु चिकित्सा पॉलीक्लीनिक और वर्ष 2016 में 35.73 लाख से पशु रोग निदान प्रयोगशाला की स्वीकृति मिली थी। यह दोनों भवन क्रमश: मई 2018 व जून 2019 में बनकर तैयार हो गए थे, लेकिन अब तक कर्मियों की नियुक्तियां नहीं हुईं। अब मंडलायुक्त दिनेश कुमार सिंह की पहल पर शासन ने सर्जरी, गायनी, पैथोलॉजी सहित मेडिसिन विभाग में विशेषज्ञ चिकित्सक व कर्मचारियों की नियुक्ति की कवायद शुरू कर दी है। आयुक्त ने 29 जनवरी को प्रदेश के प्रमुख सचिव पशुधन को भेजे पत्र में कहा था कि जनपद में 209 स्थायी और अस्थायी गोशालाओं में 33000 से अधिक पशु संरक्षित हैं, लेकिन स्टॉफ की कमी से संचालन में व्यवधान पैदा हो रहा है। पशु चिकित्सा पॉलीक्लीनिक बंद पड़ा है।
इंसेट---
आवासीय भवन को मिले 1.22 करोड़
शासन ने पॉलीक्लीनिक में कर्मियों के आवास निर्माण के लिए 1.22 करोड़ रुपये दिए हैं। आयुक्त ने कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) लखनऊ और उप कृषि निदेशक पशुपालन को निर्देश दिए कि आवासीय व अनावासीय भवनों का निर्माण जून 2021-22 तक पूरा कर लिया जाए।
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बांदा और झांसी में हैं पॉलीक्लीनिक
पशुपालन विभाग उप निदेशक मनोज अवस्थी का कहना है कि बुंदेलखंड में झांसी और बांदा में पशु निरोग प्रयोगशाला व पशु चिकित्सा पॉलीक्लीनिक भवन तैयार हैं, लेकिन स्टाफ न होने से वह बेमतलब है।
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पालीक्लीनिक में सर्जरी, 100 पशु होंगे भर्ती
पशु निरोग प्रयोगशाला और पॉलीक्लीनिक में पशुओं की सर्जरी सहित गंभीर बीमारियों का इलाज होगा। अभी इसके लिए पशु पालकों को कानपुर व लखनऊ जाना पड़ता है। पशुओं की डिलीवरी व रक्त की जांच और अधिकतम 100 पशुओं के भर्ती होने की सुविधा होगी। प्रयोगशाला में पशुओं में होने वाले रोगों पर शोध और इलाज होगा।
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मंडल मुख्यालय में वर्ष 2017 में 6.49 करोड़ रुपये की लागत से पशु चिकित्सा पॉलीक्लीनिक और वर्ष 2016 में 35.73 लाख से पशु रोग निदान प्रयोगशाला की स्वीकृति मिली थी। यह दोनों भवन क्रमश: मई 2018 व जून 2019 में बनकर तैयार हो गए थे, लेकिन अब तक कर्मियों की नियुक्तियां नहीं हुईं। अब मंडलायुक्त दिनेश कुमार सिंह की पहल पर शासन ने सर्जरी, गायनी, पैथोलॉजी सहित मेडिसिन विभाग में विशेषज्ञ चिकित्सक व कर्मचारियों की नियुक्ति की कवायद शुरू कर दी है। आयुक्त ने 29 जनवरी को प्रदेश के प्रमुख सचिव पशुधन को भेजे पत्र में कहा था कि जनपद में 209 स्थायी और अस्थायी गोशालाओं में 33000 से अधिक पशु संरक्षित हैं, लेकिन स्टॉफ की कमी से संचालन में व्यवधान पैदा हो रहा है। पशु चिकित्सा पॉलीक्लीनिक बंद पड़ा है।
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आवासीय भवन को मिले 1.22 करोड़
शासन ने पॉलीक्लीनिक में कर्मियों के आवास निर्माण के लिए 1.22 करोड़ रुपये दिए हैं। आयुक्त ने कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) लखनऊ और उप कृषि निदेशक पशुपालन को निर्देश दिए कि आवासीय व अनावासीय भवनों का निर्माण जून 2021-22 तक पूरा कर लिया जाए।
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बांदा और झांसी में हैं पॉलीक्लीनिक
पशुपालन विभाग उप निदेशक मनोज अवस्थी का कहना है कि बुंदेलखंड में झांसी और बांदा में पशु निरोग प्रयोगशाला व पशु चिकित्सा पॉलीक्लीनिक भवन तैयार हैं, लेकिन स्टाफ न होने से वह बेमतलब है।
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पालीक्लीनिक में सर्जरी, 100 पशु होंगे भर्ती
पशु निरोग प्रयोगशाला और पॉलीक्लीनिक में पशुओं की सर्जरी सहित गंभीर बीमारियों का इलाज होगा। अभी इसके लिए पशु पालकों को कानपुर व लखनऊ जाना पड़ता है। पशुओं की डिलीवरी व रक्त की जांच और अधिकतम 100 पशुओं के भर्ती होने की सुविधा होगी। प्रयोगशाला में पशुओं में होने वाले रोगों पर शोध और इलाज होगा।