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ईंट के टुकड़ों से भरे जा रहे हाईवे के गड्ढे
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तिंदवारी। बांदा-टांडा नेशनल हाईवे के जानलेवा गड्ढों को भरने की कवायद शुरू हो गई। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया, रायबरेली के कर्मचारी शुक्रवार को ईंट के टुकड़े बिछाकर हाईवे के गड्ढे भरने में जुटे रहे।
हाईवे में गड्ढों की खबर को अमर उजाला ने 27 अगस्त के अंक में प्रमुखता से छापी थी। बारिश से बांदा-टांडा हाईवे बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो गया है। सबसे बुरी हालत महोखर गांव से बेंदाघाट तक है। यहां 40 किलोमीटर की इस सड़क में लगभग एक सैकड़ा भारी-भरकम गड्ढे हैं।
राहगीरों को लगभग 40 किलोमीटर का यह सफर तय करने में डेढ़ से दो घंटे का समय लग रहा था। हादसे भी हो रहे थे। 27 अगस्त के अंक में अमर उजाला ने गड्ढों में तब्दील हाईवे की दुर्दशा बयां करती खबर प्रमुखता से प्रकाशित की तो एनएच अथारिटी ऑफ इंडिया, रायबरेली ने सुध लेकर आनन-फानन अस्थायी रूप से गड्ढों को भरवाना शुरू कर दिया है।
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परियोजना प्रबंधक योगेश तिलक ने बताया कि अभी अस्थायी रूप से गड्ढों को ईंटों से भरवाया जा रहा है। अगले माह सितंबर के अंत तक टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद सड़क निर्माण शुरू हो जाएगा।
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हाईवे में गड्ढों की खबर को अमर उजाला ने 27 अगस्त के अंक में प्रमुखता से छापी थी। बारिश से बांदा-टांडा हाईवे बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो गया है। सबसे बुरी हालत महोखर गांव से बेंदाघाट तक है। यहां 40 किलोमीटर की इस सड़क में लगभग एक सैकड़ा भारी-भरकम गड्ढे हैं।
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राहगीरों को लगभग 40 किलोमीटर का यह सफर तय करने में डेढ़ से दो घंटे का समय लग रहा था। हादसे भी हो रहे थे। 27 अगस्त के अंक में अमर उजाला ने गड्ढों में तब्दील हाईवे की दुर्दशा बयां करती खबर प्रमुखता से प्रकाशित की तो एनएच अथारिटी ऑफ इंडिया, रायबरेली ने सुध लेकर आनन-फानन अस्थायी रूप से गड्ढों को भरवाना शुरू कर दिया है।
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परियोजना प्रबंधक योगेश तिलक ने बताया कि अभी अस्थायी रूप से गड्ढों को ईंटों से भरवाया जा रहा है। अगले माह सितंबर के अंत तक टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद सड़क निर्माण शुरू हो जाएगा।