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Banda News: फर्जी आदेशों से प्रमोशन पाने वाला हेड कांस्टेबल भाईलाल करोड़ों का खिलाड़ी

Sun, 23 Nov 2025 12:12 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा Updated Sun, 23 Nov 2025 12:12 AM IST
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Head constable Bhailal, who got promotion through fake orders, is a player worth crores.
बांदा।
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फर्जी आदेश पत्र तैयार कर विभागीय लाभ, प्रमोशन और मृतक आश्रित बहाली तक हासिल करने वाला हेड कांस्टेबल भाईलाल का नेटवर्क जितना गहरा था, उसकी कमाई के तौर-तरीके उससे भी ज्यादा चौंकाने वाले निकल रहे हैं। हाल ही में उजागर हुए मामले ने न केवल पुलिस विभाग को हिलाकर रख दिया है बल्कि बांदा जिले में उसकी पुरानी तैनाती भी अब जांच के दायरे में आ सकती है।
सूत्रों के अनुसार भाईलाल ने अपने पद और विभागीय पहुंच का दुरुपयोग करते हुए शराब, तहबाजारी और खनन कारोबार में परिजनों के नाम पर हिस्सेदारी ले रखी थी। यही नहीं विभाग में तैनाती का प्रभाव दिखाकर लोगों से काम कराने और शेयर दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये तक वसूलने की चर्चाएं जोरों पर हैं।
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रसूखदारों के संरक्षण में चलता था भाईलाल का ‘गुप्त कारोबार’
बताया जा रहा है कि बांदा में 1995 से 2011 तक लंबी तैनाती के दौरान भाईलाल सबसे ज्यादा रसूखदारों की छत्रछाया में रहा। नरैनी थाने और पुलिस लाइन में तैनाती के प्राथमिक साक्ष्य मिले हैं, लेकिन सूत्रों का दावा है कि वह जिले के एक बड़े शराब कारोबारी की शहर स्थित कोठी में अक्सर ठहरता था। इससे उसकी पकड़ और भी मजबूत दिखाई देती है। जानकारों का कहना है कि यदि उसके पुराने सभी कार्यकालों की गहन जांच हो, तो करोड़ों की वसूली व अनैतिक लाभ के कई और राज खुल सकते हैं।
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पहले भी दर्ज हुआ था गंभीर मुकदमा
मिर्जापुर जनपद के कोतवाली देहात क्षेत्र के राजपुर आमघाट गांव का निवासी भाईलाल 2005 में कोतवाली नरैनी में बतौर कांस्टेबल तैनात था। इसी दौरान उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, घर में घुसकर मारपीट, धमकी और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था। इसके बावजूद वह विभिन्न जनपदों, जैसे फतेहपुर और लखीमपुर खीरी में तैनात होता रहा, जिससे उसके नेटवर्क और संरक्षण की गहराई का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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जांच हुई तो खुलेंगे कई परतें
फर्जी आदेशों के आधार पर नौकरी में प्रमोशन, विभागीय लाभ और मृतक आश्रित नियुक्ति तक हड़पने का मामला सामने आने के बाद अब विभागीय जांच तेज होने की संभावना है। यदि बांदा में उसकी 16 साल पुरानी तैनाती के हर पहलू की पड़ताल हुई, तो भाईलाल से जुड़े कई रसूखदारों और उसके असली सरगनाओं की भूमिका भी सामने आ सकती है।

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हेड कांस्टेबल भाईलाल के खिलाफ सामने आए तथ्यों की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने मामले को प्राथमिकता पर लिया है। उसके द्वारा फर्जी आदेश पत्र बनाकर प्रमोशन और लाभ लेने सहित अन्य आरोपों की जांच की जा रही है। यदि बांदा सहित उसके पूर्व कार्यकाल में अवैध गतिविधियों के प्रमाण मिलते हैं तो उसके पूरे नेटवर्क की परतें खोली जाएंगी। किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या अवैध वसूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषी पाए जाने पर विभागीय व कानूनी कार्रवाई दोनों सुनिश्चित की जाएगी।

- शिवराज, अपर पुलिस अधीक्षक
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