सांप्रदायिकता का सहारा ले रहा उदारवादी निजाम- करात
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जनवादी लेखक संघ के तीन दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन
सत्र में जाति उन्मूलन और मार्क्सवाद पर विचार वक्त करते हुए करात ने बदलते
सामाजिक परिवेश से सावधान किया। इससे पहले मीडिया से बातचीत में वामपंथी
नेता प्रकाश कारात ने राजनीतिक दलों पर सवाल उठाए।
कहा कि चुनाव के
बाद जनता को भुला दिया जाता है। लोकलुभावन वादे तो हजार होते हैं, लेकिन
देश में अंदरूनी आर्थिक प्रगति हुए बगैर गरीबी और बेरोजगारी नहीं खत्म
होगी। उन्होंने कहा कि भाजपा ने चुनाव के समय कालाधन वापस लाने का वादा
किया था।
डेढ़ वर्ष से ज्यादा समय बीत गया। यह धन वापस नहीं आया।
उन्होंने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव के बारे में कहा कि वहां की बुनियादी
समस्याएं ज्यों की त्यों बरकरार हैं।
कृषि और औद्योगिकीकरण के
प्रति वहां की सरकारें निष्पक्ष नहीं रहीं। कानून व्यवस्था की स्थिति भी
वैसी ही बकरार है। उन्होंने कहा कि वामपंथी दल एक नए विकल्प के आधार पर
चुनाव मैदान में है।