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Banda News: नए तालाब खूब बनवाए, पुराने पाटने से रोक न पाए
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फोटो 01- बांदा में प्राचीन लोहार तलैया (तालाब) में पटा कचरा और चारों ओर आबाद बस्ती। संवाद
बांदा। बुंदेलखंड में चार हजार से ज्यादा तालाबों और कुओं के लापता होने की मीडिया की खबरों का इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा संज्ञान लिए जाने से यह मुद्दा फिर संबंधित अफसरों की बेचैनी का सबब बन गया है। खेत-तालाब जैसी खर्चीली योजनाओं के बजट से अफसरों ने नए तालाब तो खूब बनवाए पर पुराने तालाब और कुओं के तेजी से मिटते वजूद पर आंखें बंद रखीं। नतीजतन कभी बुंदेलखंड में पानी का मुख्य स्रोत रहे तालाब और कुओं को बड़ी संख्या में पाटकर बस्तियां आबाद हो गईं। अमर उजाला यह मुद्दा करीब एक दशक से ख़बरों के जरिए प्रमुखता से उठाता चला आ रहा है।
जनसूचना अधिकार अधिनियम और अन्य जरियों से बुंदेलखंड में तालाब, कुओं और पोखर आदि कुदरती जल स्रोतों के मिटते अस्तित्व उजागर होते रहे हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट और एनजीटी में भी जनहित याचिकाएं दायर हुई हैं। जांच और सर्वे में अधिकारियों ने यह तथ्य स्वीकारा भी है पर नतीजा कुछ नहीं निकला। 5 मई, 2014 को अमर उजाला में - ’बुंदेलखंड की धरती से 2963 तालाब नदारद’ शीर्षक से फोटो सहित खबर प्रकाशित हुई थी। इसमें बताया था कि चित्रकूटधाम मंडल में सरकारी अभिलेखों में दर्ज 39,144 तालाब, पोखर और कुओं में से 4263 तालाब, कुओं पर अवैध कब्जे करके उन्हें पाटकर निर्माण कर लिया गया। कई जगह बस्तियां बन गईं। 159 तालाब व कुएं अफसरों को ढूंढे नहीं मिले।
15 मार्च 2023 को अमर उजाला में छपी - ‘अफसर नहीं तलाश पाए गावों में 602 तालाब’ शीर्षक की खबर में बताया गया था कि बांदा में तालाबों का सुंदरीकरण करने के लिए किए गए सर्वे में 602 तालाबों का नामोनिशान नहीं मिला। इसी सिलसिले में 24 अक्टूबर 2024 को अमर उजाला की खबर - ‘पांच हजार नए बने, 2575 पुराने तालाबों का वजूद खत्म‘ में उजागर किया गया था कि कई विभागों ने 5000 नए तालाब बनवाने का आंकड़ा परोस दिया जबकि ढाई हजार से ज्यादा पुराने तालाब गायब मिले। इस पर चुप्पी साध लिया है।
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इनसेट
मन की बात में सराहे गए गांव में ही तालाब नदारद
बुंदेलखंड में तालाब, कुओं और पर्यावरण तथा अवैध खनन को लेकर लगातार कानूनी सहारा लेकर जद्दोजेहद में जुटे आशीष सागर दीक्षित ने बीते वर्ष तालाब, कुओं आदि की सूचना आरटीआई में न मिलने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट दायर की थी। तब बमुशकिल कुछ सूचनाएं और सूची मिलीं। वह बताते हैं कि बांदा के लुकतरा गांव में खोदे गए 42 तालाबों की सूची उन्हें दी गई। इसमें मौके पर ज्यादातर तालाब नदारद मिले। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ‘मन की बात’ के 102वें एपीसोड में इस गांव का जिक्र करके प्रशंसा की थी। आशीष के मुताबिक हाईकोर्ट में अच्छी पैरवी हो जाए तो पानी के दुश्मनों की शामत आ सकती है।
इनसेट -
डीएम ने चलाई थी कुआं-तालाब बचाओ मुहिम
वर्ष 2019 में तत्कालीन डीएम हीरालाल ने जनपद में ‘कुआं बचाओ-तालाब बचाओ‘ अभियान जोरशोर से चलाया था। सरकारी और स्वयं सेवी संस्थाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कुआं, तालाबों में की सफाई और मरम्मत कराकर वहां दीपक जलाए जाने लगे। प्रशासनिक मदद से ग्रामीणों ने श्रमदान के जरिए कई तालाबों और कुओं का जीर्णोद्धार किया। जल संरक्षण की इस मुहिम पर डीएम को अवार्ड भी मिला। शासन ने सराहा।
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जनसूचना अधिकार अधिनियम और अन्य जरियों से बुंदेलखंड में तालाब, कुओं और पोखर आदि कुदरती जल स्रोतों के मिटते अस्तित्व उजागर होते रहे हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट और एनजीटी में भी जनहित याचिकाएं दायर हुई हैं। जांच और सर्वे में अधिकारियों ने यह तथ्य स्वीकारा भी है पर नतीजा कुछ नहीं निकला। 5 मई, 2014 को अमर उजाला में - ’बुंदेलखंड की धरती से 2963 तालाब नदारद’ शीर्षक से फोटो सहित खबर प्रकाशित हुई थी। इसमें बताया था कि चित्रकूटधाम मंडल में सरकारी अभिलेखों में दर्ज 39,144 तालाब, पोखर और कुओं में से 4263 तालाब, कुओं पर अवैध कब्जे करके उन्हें पाटकर निर्माण कर लिया गया। कई जगह बस्तियां बन गईं। 159 तालाब व कुएं अफसरों को ढूंढे नहीं मिले।
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15 मार्च 2023 को अमर उजाला में छपी - ‘अफसर नहीं तलाश पाए गावों में 602 तालाब’ शीर्षक की खबर में बताया गया था कि बांदा में तालाबों का सुंदरीकरण करने के लिए किए गए सर्वे में 602 तालाबों का नामोनिशान नहीं मिला। इसी सिलसिले में 24 अक्टूबर 2024 को अमर उजाला की खबर - ‘पांच हजार नए बने, 2575 पुराने तालाबों का वजूद खत्म‘ में उजागर किया गया था कि कई विभागों ने 5000 नए तालाब बनवाने का आंकड़ा परोस दिया जबकि ढाई हजार से ज्यादा पुराने तालाब गायब मिले। इस पर चुप्पी साध लिया है।
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मन की बात में सराहे गए गांव में ही तालाब नदारद
बुंदेलखंड में तालाब, कुओं और पर्यावरण तथा अवैध खनन को लेकर लगातार कानूनी सहारा लेकर जद्दोजेहद में जुटे आशीष सागर दीक्षित ने बीते वर्ष तालाब, कुओं आदि की सूचना आरटीआई में न मिलने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट दायर की थी। तब बमुशकिल कुछ सूचनाएं और सूची मिलीं। वह बताते हैं कि बांदा के लुकतरा गांव में खोदे गए 42 तालाबों की सूची उन्हें दी गई। इसमें मौके पर ज्यादातर तालाब नदारद मिले। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ‘मन की बात’ के 102वें एपीसोड में इस गांव का जिक्र करके प्रशंसा की थी। आशीष के मुताबिक हाईकोर्ट में अच्छी पैरवी हो जाए तो पानी के दुश्मनों की शामत आ सकती है।
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डीएम ने चलाई थी कुआं-तालाब बचाओ मुहिम
वर्ष 2019 में तत्कालीन डीएम हीरालाल ने जनपद में ‘कुआं बचाओ-तालाब बचाओ‘ अभियान जोरशोर से चलाया था। सरकारी और स्वयं सेवी संस्थाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कुआं, तालाबों में की सफाई और मरम्मत कराकर वहां दीपक जलाए जाने लगे। प्रशासनिक मदद से ग्रामीणों ने श्रमदान के जरिए कई तालाबों और कुओं का जीर्णोद्धार किया। जल संरक्षण की इस मुहिम पर डीएम को अवार्ड भी मिला। शासन ने सराहा।

फोटो 01- बांदा में प्राचीन लोहार तलैया (तालाब) में पटा कचरा और चारों ओर आबाद बस्ती। संवाद