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बुंदेलखंड के किसानों के लिए खुशखबरी, अब एमपी से ज्यादा मिलेगा पानी
Fri, 08 Feb 2019 11:41 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
Published by: ASIF ASIF
Updated Fri, 08 Feb 2019 11:41 PM IST
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सर्किट हाउस में भाजपा नेताओं के साथ बैठक करते सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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मध्य प्रदेश के बांधों से अब उत्तर प्रदेश को 22 फीसदी पानी मिलेगा। इसके पूर्व 17 फीसदी ही पानी मिल रहा था, जबकि समझौते के तहत यूपी को 25 फीसदी पानी मिलना चाहिए था। यह बात प्रदेश के सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह ने बताई।
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शुक्रवार को सर्किट हाउस में सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह ने मीडिया से बातचीत में बताया कि मध्य प्रदेश के बांध (गंगऊ) से यूपी के बांदा जिले को सिंचाई के लिए नहरों के जरिये पानी मिलता है। इन बांधों का रखरखाव उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग करता है। पुराने समझौते के तहत यूपी-एमपी सरकारों में बांध के पानी का बंटवारा हो चुका है। मंत्री ने बताया कि बांध से केन नदी को 25 फीसदी पानी मिलने का समझौता था, लेकिन यह मिलता नहीं था। बमुश्किल 17 फीसदी पानी ही मिल पा रहा था। मंत्री ने बताया कि अब यूपी सरकार की कोशिश से पानी की मात्रा बढ़कर 22 फीसदी हो गई है। इससे सबसे ज्यादा फायदा बांदा को होगा। किसानों को सिंचाई सुविधा बढ़ेगी।
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सिंचाई मंत्री ने यह भी बताया कि विलुप्त नदियों को बचाने के लिए नदी संरक्षण एवं पुनर्जीवी सेल का गठन किया गया है। पहले चरण में मैदानी स्थल से उद्गम होने वाली 8 विलुप्त नदियों को लिया गया है। दूसरे चरण में चित्रकूट धाम मंडल की चंद्रावल नदी पर काम होगा। सिंचाई मंत्री ने बताया कि 15 से 30 साल से अधूरी पड़ी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए सरकार ने बजट में प्रावधान किया है। कहा कि पूर्व सरकारों की उपेक्षा से अधूरी पड़ी अर्जुन सहायक परियोजना अब जल्द पूरी होगी। इससे महोबा जिले में पानी का संकट नहीं होगा। यह भी बताया कि बांदा शहर को आपूर्ति के लिए नवाब टैंक से जलापूर्ति करने के बारे में अधिकारियों से बातचीत की जाएगी।
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बुंदेलखंड में लागू होगी इजराइली सिंचाई पद्धति
बांदा। सिंचाई मंत्री ने बताया कि बुंदेलखंड में सूखे से निपटने के लिए इजराइल पद्धति लागू की जाएगी। किसानों को स्प्रिंकलर और ड्रिप योजना के लिए प्रेरित किया जा रहा है। लघु व सीमांत किसानों को 90 फीसदी और सभी किसानों को 80 फीसदी अनुदान पर स्प्रिंकलर सेट दिए जाएंगे। अलोना पंप केनाल प्रकरण पर मंत्री ने जांच व कार्रवाई को कहा है। बताया कि 15 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी झांसी आ रहे हैं।
बुंदेलखंड की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और डिफेंस कॉरिडोर का भी शुभारंभ करेंगे। उन्होंने कहा कि 2019 लोकसभा चुनाव वैचारिक युद्ध का चुनाव है। दूसरे दल के पास न नेता है न नीयत। प्रधानमंत्री की प्राथमिकता किसान हैं। कहा कि पैसा आसमान में नहीं, जमीन में पैदा होता है। इसके पूर्व सर्किट हाउस में भाजपा नेताओं के साथ बैठक में बांदा जिले के प्रभारी मंत्री धर्मपाल सिंह ने प्रधानमंत्री के झांसी आगमन पर बांदा से ज्यादा से ज्यादा लोगों को वहां जुटने की रणनीति पर विचार-विमर्श किया। विधायक प्रकाश द्विवेदी (बांदा), ब्रजेश प्रजापति (तिंदवारी), राजकरन कबीर (नरैनी) व चंद्रपाल कुशवाहा (बबेरू), जिलाध्यक्ष लवलेश सिंह भी मौजूद रहे।
यूपी-एमपी के बीच पानी का विवाद कई दशक पुराना
बांदा। केन नदी में बांधों के पानी को लेकर मध्य प्रदेश से पुराना जल विवाद है। मुख्य तौर पर गंगऊ और रनगवां बांध तथा बरियारपुर वीयर के पानी को लेकर दोनों राज्यों के बीच कई बार विवाद होते रहे हैं। इसे लेकर दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री स्तर पर पहला समझौता पहली अगस्त 1972 को हुआ था। यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी और एमपी मुख्यमंत्री पीसी सेठी के हस्ताक्षरों से हुए लिखित समझौते से कहा गया था कि हर वर्ष 1 नवंबर को रनगवां बांध में उपलब्ध पानी यूपी और एमपी के बीच क्रमश: 36 व 15 अनुपात में बांटा जाएगा।
हालांकि इसके बाद 13 जनवरी 1977 को यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी और एमपी के मुख्यमंत्री श्यामाचरण शुक्ला के बीच भी पानी बंटवारे को लेकर लिखित समझौता हुआ था। बांधों का निर्माण अंग्रेजी शासनकाल में हुआ था। गंगऊ बांध 1915 में बना था। इसकी जल संग्रह क्षमता 3.15 टीएमसी थी। इसी तरह केन नदी की सहायक बन्ने नदी पर 1957 में यूपी सरकार ने रनगवां बांध बनवाया था। तब इसकी जल संग्रह क्षमता 5.48 टीएमसी थी। जो अब घटकर आधी भी नहीं बची है। केन नदी पर बनवाए गए बरियारपुर वीयर की जल संग्रह क्षमता मात्र 0.45 टीएमसी थी। यह अब और घट गई।