{"_id":"63b47fa5ddd56639aa162a15","slug":"goat-shed-not-made-digested-rs-3-90-lakh-banda-news-knp736906021","type":"story","status":"publish","title_hn":"Banda News: बिना बकरी शेड बनवाए 3.90 लाख रुपये हजम किए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Banda News: बिना बकरी शेड बनवाए 3.90 लाख रुपये हजम किए
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बांदा। प्रधान और सचिव ने बिना निर्माण कराए बकरी शेड का निर्माण दिखाकर 3.90 हजार रुपये भुगतान कर राशि हजम कर ली। सोशल आडिट के सत्यापन में खुलासा होने पर उपायुक्त (श्रम रोजगार) संयुक्त जिला कार्यक्रम समन्वयक राघवेंद्र तिवारी ने ग्राम पंचायत चंदवारा के तत्कालीन ग्राम प्रधान और सचिव को नोटिस जारी कर तीन दिन के अंदर साक्ष्यों सहित स्पष्टीकरण मांगा है।
ग्राम पंचायत चंदवारा को वर्ष 2020-21 में पशुपालक बाबूलाल, गोरेलला, रामदास, रामखिलवन, रामनरायण, स्वामी दीन, रामरतन, रामतीरथ पुत्र बोधी, रामतीरथ पुत्र टेरन के यहां नौ बकरी शेड स्वीकृत हुए थे। प्रत्येक की लागत 43,220 रुपये थी। निर्माण की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत को दी गई थी, लेकिन काम कराए बिना ही रुपये निकालकर हजम कर लिए गए।
इसका खुलासा सोशल आडिट के सत्यापन में है। सामने आया कि ग्राम पंचायत में बिना शेड निर्माण के ग्राम पंचायत ने सामग्री मद के नाम पर 3,90,798 रुपये का भुगतान कर लिया है। जो वित्तीय अनियमितता और गबन की श्रेणी में आता है। उपायुक्त (श्रम रोजगार) संयुक्त जिला कार्यक्रम समन्वयक ने तत्कालीन प्रधान आकांक्षा सिंह, सचिव दिनेश कुमार और तकनीकी सहायक रूपेश सहित रोजगार सेवक को नोटिस जारी कर तीन दिन के अंदर बीडीओ के माध्यम से साक्ष्यों सहित स्पष्टीकरण देने के आदेश दिए हैं। चेतावनी द्री कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर संबंधित पर मनरेगा अधिनियम के विरुद्ध मनमाने तरीके से बिना कार्य के शासकीय धन के गबन की रिपोर्ट दर्ज कराते हुए विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
ग्राम पंचायत चंदवारा को वर्ष 2020-21 में पशुपालक बाबूलाल, गोरेलला, रामदास, रामखिलवन, रामनरायण, स्वामी दीन, रामरतन, रामतीरथ पुत्र बोधी, रामतीरथ पुत्र टेरन के यहां नौ बकरी शेड स्वीकृत हुए थे। प्रत्येक की लागत 43,220 रुपये थी। निर्माण की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत को दी गई थी, लेकिन काम कराए बिना ही रुपये निकालकर हजम कर लिए गए।
विज्ञापन
इसका खुलासा सोशल आडिट के सत्यापन में है। सामने आया कि ग्राम पंचायत में बिना शेड निर्माण के ग्राम पंचायत ने सामग्री मद के नाम पर 3,90,798 रुपये का भुगतान कर लिया है। जो वित्तीय अनियमितता और गबन की श्रेणी में आता है। उपायुक्त (श्रम रोजगार) संयुक्त जिला कार्यक्रम समन्वयक ने तत्कालीन प्रधान आकांक्षा सिंह, सचिव दिनेश कुमार और तकनीकी सहायक रूपेश सहित रोजगार सेवक को नोटिस जारी कर तीन दिन के अंदर बीडीओ के माध्यम से साक्ष्यों सहित स्पष्टीकरण देने के आदेश दिए हैं। चेतावनी द्री कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर संबंधित पर मनरेगा अधिनियम के विरुद्ध मनमाने तरीके से बिना कार्य के शासकीय धन के गबन की रिपोर्ट दर्ज कराते हुए विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन