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चार अस्पतालों को इमरजेंसी सेवाओं की संस्तुति
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बांदा। लॉकडाउन में निजी अस्पताल/नर्सिंगहोम की बंद कर दी गई आपातकालीन सेवाओं को पुन: चालू करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने मंडल मुख्यालय के चार निजी अस्पतालों की संस्तुति की है। लॉकडाउन अवधि में एक प्राइवेट अस्पताल की ओपीडी और एक नर्सिंगहोम की आपातकालीन सेवाओं पर रोक लगाने की संस्तुति की गई है। स्वास्थ्य विभाग ने मुख्यालय के कुल आठ निजी अस्पतालों की जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी है।
इनमें रफीक नर्सिंग होम (अलीगंज), अनुराग नर्सिंग होम (कालूकुंआ) और अक्षत नर्सिंग होम (कटरा)को आपातकालीन सेवाओं के संचालन के अनुमति की संस्तुति की गई है। इसके अलावा अवनी परिधि हेल्थ केयर (चिल्ला चौराहा) की आपातकालीन सेवाएं चालू रखने और लॉकडाउन अवधि में ओपीडी सेवाएं बाधित करने की संस्तुति की गई है। शहर के अन्य निजी अस्पताल प्रभा नर्सिंग होम कटरा की लॉकडाउन के दौरान आपातकालीन सेवाओं के संचालन को रोक लगाने की संस्तुति की गई है।
दूसरी ओर भार्गव नर्सिंग होम में सनेटाइजेशन समुचित व्यवस्था नहीं पाई गई। शास्वत मेडिकल सेंटर में पीपीई किट उपलब्ध नहीं मिली। इसे मंगाने के लिए आर्डर किया गया है। अवनी परिधि हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड में दवा काउंटर पर कई लोगों की भीड़ मिली। ओपीडी में भी 25-30 मरीज सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करते मिले। सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं थी। इनके अलावा विक्रम चाइल्ड केयर सेंटर (कालूकुंआ) की भी जांच रिपोर्ट भेजी गई है।
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लॉकडाउन में 20 अप्रैल से कुछ रियायत देने के संबंध में प्रधानमंत्री की गई घोषणा के बाद प्रदेश के प्रमुख सचिव (चिकित्सा) ने निजी चिकित्सालयों/नर्सिंग होम तथा क्लीनिक को कुछ शर्तों के साथ चालू करने को कहा था। इस पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कई दिन पूर्व मुख्यालय के आठ निजी अस्पतालों का निरीक्षण किया था। हालांकि एक हफ्ता बीत जाने के बाद भी अभी तक किसी निजी अस्पताल को अनुमति नहीं मिली। यहां आने वाले मरीज परेशान हैं।
मंडलायुक्त गौरव दयाल ने बताया कि मुख्यालय के आठ निजी अस्पतालों की जांच सीएमओ डा. संतोष कुमार और अपर सीएमओ डा. आरएन प्रसाद व एआरओ आज्ञाराम वर्मा आदि ने की थी। इन अधिकारियों ने अपनी जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को 25 अप्रैल को भेज दी है। जांच में इन अस्पतालों में डाक्टर और स्टाफ को कोविड-19 से संबधित प्रोटोकाल व इंफेक्शन/प्रीवेंशन का प्रशिक्षण, सेनिटाइजेशन, डाक्टर व स्टाफ को मास्क व ग्ल्बस, पीपीई किट, थर्मल स्क्रीनिंग, हैंड सेनेटाइजेशन, सोशल डिस्टेंसिंग और बायोमेडिकल वेस्ट व्यवस्था आदि को देखा गया है। अलबत्ता हॉटस्पॉट वाले क्षेत्र के निजी अस्पतालों को इसमें शामिल नहीं किया गया है। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. संतोष कुमार ने मुख्यालय के इन आठ निजी अस्पतालों/नर्सिंग होम की निरीक्षण रिपोर्ट डीएम को भेज दी है।
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इनमें रफीक नर्सिंग होम (अलीगंज), अनुराग नर्सिंग होम (कालूकुंआ) और अक्षत नर्सिंग होम (कटरा)को आपातकालीन सेवाओं के संचालन के अनुमति की संस्तुति की गई है। इसके अलावा अवनी परिधि हेल्थ केयर (चिल्ला चौराहा) की आपातकालीन सेवाएं चालू रखने और लॉकडाउन अवधि में ओपीडी सेवाएं बाधित करने की संस्तुति की गई है। शहर के अन्य निजी अस्पताल प्रभा नर्सिंग होम कटरा की लॉकडाउन के दौरान आपातकालीन सेवाओं के संचालन को रोक लगाने की संस्तुति की गई है।
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दूसरी ओर भार्गव नर्सिंग होम में सनेटाइजेशन समुचित व्यवस्था नहीं पाई गई। शास्वत मेडिकल सेंटर में पीपीई किट उपलब्ध नहीं मिली। इसे मंगाने के लिए आर्डर किया गया है। अवनी परिधि हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड में दवा काउंटर पर कई लोगों की भीड़ मिली। ओपीडी में भी 25-30 मरीज सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करते मिले। सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं थी। इनके अलावा विक्रम चाइल्ड केयर सेंटर (कालूकुंआ) की भी जांच रिपोर्ट भेजी गई है।
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लॉकडाउन में 20 अप्रैल से कुछ रियायत देने के संबंध में प्रधानमंत्री की गई घोषणा के बाद प्रदेश के प्रमुख सचिव (चिकित्सा) ने निजी चिकित्सालयों/नर्सिंग होम तथा क्लीनिक को कुछ शर्तों के साथ चालू करने को कहा था। इस पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कई दिन पूर्व मुख्यालय के आठ निजी अस्पतालों का निरीक्षण किया था। हालांकि एक हफ्ता बीत जाने के बाद भी अभी तक किसी निजी अस्पताल को अनुमति नहीं मिली। यहां आने वाले मरीज परेशान हैं।
मंडलायुक्त गौरव दयाल ने बताया कि मुख्यालय के आठ निजी अस्पतालों की जांच सीएमओ डा. संतोष कुमार और अपर सीएमओ डा. आरएन प्रसाद व एआरओ आज्ञाराम वर्मा आदि ने की थी। इन अधिकारियों ने अपनी जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को 25 अप्रैल को भेज दी है। जांच में इन अस्पतालों में डाक्टर और स्टाफ को कोविड-19 से संबधित प्रोटोकाल व इंफेक्शन/प्रीवेंशन का प्रशिक्षण, सेनिटाइजेशन, डाक्टर व स्टाफ को मास्क व ग्ल्बस, पीपीई किट, थर्मल स्क्रीनिंग, हैंड सेनेटाइजेशन, सोशल डिस्टेंसिंग और बायोमेडिकल वेस्ट व्यवस्था आदि को देखा गया है। अलबत्ता हॉटस्पॉट वाले क्षेत्र के निजी अस्पतालों को इसमें शामिल नहीं किया गया है। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. संतोष कुमार ने मुख्यालय के इन आठ निजी अस्पतालों/नर्सिंग होम की निरीक्षण रिपोर्ट डीएम को भेज दी है।