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हत्या के चार आरोपी बरी
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बांदा। युवक की हत्या में नामजद आरोपियों को अदालत ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। चार आरोपियों में दो अभी भी जेल में हैं, दो जमानत पर थे। अभियोजन पक्ष अदालत में कोई कानूनी गवाह नहीं पेश कर पाया न ही यह साबित कर पाया कि हत्या का उद्देश्य क्या था? घटना के करीब सात साल बाद अदालत से फैसला आया।
शहर के कांशीराम कालोनी के पास 18 जुलाई 2015 की रात करीब 10 बजे 26 वर्षीय युवक शब्बीर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उसके पिता हबीब ने मुमताज, इश्तियाक, प्रेम गधेड़, मतीन और आमिर के विरुद्ध हत्या और क्रिमिनल लॉ एमेडमेंट एक्ट आदि धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोपियों में इश्तियाक नाबालिग था। अदालत ने उसकी फाइल अलग कर शेष चार आरोपियों की सुनवाई की। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोप पत्र दाखिल किया। अभियोजन ने 10 गवाह पेश किए।
आरोपियों की अलग-अलग अधिवक्ताओं ने पैरवी की। अभियुक्त मतीन के अधिवक्ता न्याज अहमद, आमिर के अधिवक्ता मनोज यादव और मुमताज व प्रेम गधेड़ की पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक दीक्षित व अभिसार दीक्षित ने की। दोनों पक्षों की सुनवाई और सुबूतों के आधार पर सत्र न्यायाधीश गजेंद्र कुमार ने सोमवार को फैसला सुनाया। अपने आदेश में सत्र न्यायाधीश ने कहा कि अभियोजन पक्ष हत्या का उद्देश्य सिद्ध कर पाने में नाकाम रहा। न ही कोई लीगल गवाह और अभिलेख पेश किए। सत्र न्यायाधीश ने चारों आरोपियों को बरी कर दिया।
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शहर के कांशीराम कालोनी के पास 18 जुलाई 2015 की रात करीब 10 बजे 26 वर्षीय युवक शब्बीर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उसके पिता हबीब ने मुमताज, इश्तियाक, प्रेम गधेड़, मतीन और आमिर के विरुद्ध हत्या और क्रिमिनल लॉ एमेडमेंट एक्ट आदि धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोपियों में इश्तियाक नाबालिग था। अदालत ने उसकी फाइल अलग कर शेष चार आरोपियों की सुनवाई की। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोप पत्र दाखिल किया। अभियोजन ने 10 गवाह पेश किए।
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आरोपियों की अलग-अलग अधिवक्ताओं ने पैरवी की। अभियुक्त मतीन के अधिवक्ता न्याज अहमद, आमिर के अधिवक्ता मनोज यादव और मुमताज व प्रेम गधेड़ की पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक दीक्षित व अभिसार दीक्षित ने की। दोनों पक्षों की सुनवाई और सुबूतों के आधार पर सत्र न्यायाधीश गजेंद्र कुमार ने सोमवार को फैसला सुनाया। अपने आदेश में सत्र न्यायाधीश ने कहा कि अभियोजन पक्ष हत्या का उद्देश्य सिद्ध कर पाने में नाकाम रहा। न ही कोई लीगल गवाह और अभिलेख पेश किए। सत्र न्यायाधीश ने चारों आरोपियों को बरी कर दिया।
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