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Banda News: चंद रुपयों के लिए दांव पर लगा रहे लाडलों की जान

Fri, 27 Dec 2024 11:56 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 27 Dec 2024 11:56 PM IST
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For a few rupees, the lives of the children are being put at stake
बांदा। चंद रुपये बचाने के लिए कुछ लोग बच्चों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं। स्कूल भेजने के लिए अभिभावकों ने स्कूल बस या वैन की जगह ई-रिक्शा और टेंपो का सहारा ले रहे हैं, जो खतरे से खाली नहीं है। हमेशा हादसों का भय बना रहता है। संभागीय परिवहन विभाग की ओर से स्कूल बस या वैन में ही बच्चों को स्कूल लेकर जाने और वापस घर छोड़ने की इजाजत है।
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शहर के प्राइवेट स्कूलों की बसों में 1500 रुपये और मारुति वैन या मैजिक से बच्चों को लाने और ले जाने का एक हजार रुपये का शुल्क लिया जाता है, जबकि ई-रिक्शा, ऑटो व टेंपो में एक बच्चे को स्कूल लाने और ले जाने का शुल्क 400 से 500 रुपये लगता है। हर माह 500 रुपये बचाने के चक्कर में कुछ अभिभावक बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। कई हादसे हो चुके हैं, जिसमें बच्चों को चोटें आई हैं। फतेहपुर में सवारियों से भरे ई-रिक्शा को गुरुवार की सुबह डीसीएम ने टक्कर मार दी। इस हादसे में ई-रिक्शा चालक और एक छात्रा की मौत हो गई। बावजूद इसके अभिभावक सबक नहीं ले रहे हैं।
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ई-रिक्शा में बैठाए जा रहे 15 बच्चे
बच्चों को घर से स्कूल ले जाने और स्कूल से घर वापस लाने के लिए अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन की सहमति से ई-रिक्शा लगाया जाता है। चालक 12 से 15 बच्चों को ई-रिक्शा में बैठाते हैं। कई चालकों ने तो ई-रिक्शा के पिछले हिस्से में भी एक सीट लगा रखी है, उसमें भी चार से पांच बच्चों को बैठाया जाता है। टेंपो और ऑटो चालक तो 15 से 20 बच्चों को आगे से पीछे तक बैठा लेते हैं। इससे कभी भी अनहोनी हो सकती है।
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बंद वाहन की इजाजत, खुले वाहन पर है प्रतिबंध
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी शंकर सिंह और यात्री कर अधिकारी रामसुमेर यादव ने कहा कि बच्चों को स्कूल लाने और स्कूल से घर छोड़ने के लिए बंद वाहन ही अधिकृत है। इनमें स्कूल बस और स्कूल वैन शामिल हैं। इनके अलावा अगर किसी वाहन से बच्चों को स्कूल लाने और घर ले जाने का काम किया जाता है तो वह गलत है। ई-रिक्शा और ऑटो या टेंपो में स्कूली बच्चे मिले तो वाहन सीज किए जाएंगे।




वैन और बस वाले ज्यादा लेते हैं फीस
मुक्तिधाम क्योटरा निवासी पुरुषोत्तम विश्वकर्मा का कहना है कि स्कूल वैन और बस की फीस महंगी है। इस वजह से ई-रिक्शा और ऑटो लगा दिया है। दो बच्चे एक हजार रुपये में एक माह तक ई-रिक्शा से स्कूल आते-जाते हैं, जबकि स्कूली बस में इतनी ही फीस एक बच्चे की ली जाती है। कुछ ऐसा ही कहना है कालूकुआं के अनिरुद्ध गुप्ता और डीएम कॉलोनी निवासी प्रियंका द्विवेदी का। बताया कि स्कूल प्रबंधन एक बच्चे का 1200 रुपये किराया लेता है, जबकि ई-रिक्शा और ऑटो वाले 500 रुपये ही लेते हैं।
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