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Banda News: कोहरे से रबी की फसलों को भारी नुकसान, गेहूं के लिए संजीवनी
Sun, 01 Feb 2026 11:57 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Sun, 01 Feb 2026 11:57 PM IST
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फोटो- 29 नाई गांव में फूल रही मटर की फसल। संवाद
बांदा। रबी की फसलों पर एक बार फिर मानसूनी आपदा के बादल मंडराने लगे हैं। पिछले कई दिनों से घने कोहरे और बारिश ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इन आपदाओं के कारण दलहन और तिलहन की फसलें, विशेषकर चना, सरसों, मटर, मसूर और अरहर, खराब होने की कगार पर हैं। किसानों के अनुसार, पौधों के फूल झड़ने लगे हैं, जिससे उत्पादन पर गहरा असर पड़ने की आशंका है।
किसानों का कहना है कि कोहरे व बारिश से सरसों, मटर, मसूर और अरहर जैसी फसलों के फूल झड़ रहे हैं। पाला का असर भी फसलों पर दिखने लगा है। चने की फसल में जोरई नामक कीड़े लग गए हैं, जो अंदर से फल को खा जाते हैं, जिससे खेत में केवल ठूंठ बचते हैं। इसी तरह, सरसों और चने की फसलों पर माहू व जुरई कीटों का प्रकोप बढ़ गया है। ठंड के कारण अरहर, सरसों और चने का फूल भी झड़ रहा है। किसानों के अनुसार, फूल झड़ने और दोबारा फूल आने की प्रक्रिया से उत्पादन में भारी कमी आएगी।
कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों की राय कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक दिनेश शाह के अनुसार, पहाड़ों पर बर्फबारी के कारण सर्दी बढ़ने की संभावना है और कोहरे का प्रकोप भी जारी रहेगा। ठंड और कोहरे के कारण चना, मटर, मसूर, अरहर, सरसों और अलसी जैसी रबी की फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। धूप की कमी से पौधों की बढ़वार रुक जाती है। वातावरण में अत्यधिक नमी के कारण कीटों का प्रकोप बढ़ जाता है और फूल झड़ने लगते हैं।
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फसलों को बचाने के उपाय उप निदेशक कृषि ने किसानों को सलाह दी है कि गेहूं की फसल में सिंचाई के बाद यूरिया का प्रयोग अवश्य करें। चना और मटर में फफूंदी लगने पर मैनकोजेब, कार्बेंडाजिम, इमिडावक्लोप्रिड या एसिटामिप्रिड का छिड़काव करें। सरसों में माहू लगने पर कात्यायनी डीमैट जैसी दवाओं का प्रयोग किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, फसलों में धुआं करने और हल्की सिंचाई जैसे देशी उपाय भी कारगर हो सकते हैं। हालांकि, कोई भी दवा कृषि रक्षा अधिकारी की सलाह के बिना प्रयोग न करें।
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किसानों का कहना है कि कोहरे व बारिश से सरसों, मटर, मसूर और अरहर जैसी फसलों के फूल झड़ रहे हैं। पाला का असर भी फसलों पर दिखने लगा है। चने की फसल में जोरई नामक कीड़े लग गए हैं, जो अंदर से फल को खा जाते हैं, जिससे खेत में केवल ठूंठ बचते हैं। इसी तरह, सरसों और चने की फसलों पर माहू व जुरई कीटों का प्रकोप बढ़ गया है। ठंड के कारण अरहर, सरसों और चने का फूल भी झड़ रहा है। किसानों के अनुसार, फूल झड़ने और दोबारा फूल आने की प्रक्रिया से उत्पादन में भारी कमी आएगी।
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कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों की राय कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक दिनेश शाह के अनुसार, पहाड़ों पर बर्फबारी के कारण सर्दी बढ़ने की संभावना है और कोहरे का प्रकोप भी जारी रहेगा। ठंड और कोहरे के कारण चना, मटर, मसूर, अरहर, सरसों और अलसी जैसी रबी की फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। धूप की कमी से पौधों की बढ़वार रुक जाती है। वातावरण में अत्यधिक नमी के कारण कीटों का प्रकोप बढ़ जाता है और फूल झड़ने लगते हैं।
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फसलों को बचाने के उपाय उप निदेशक कृषि ने किसानों को सलाह दी है कि गेहूं की फसल में सिंचाई के बाद यूरिया का प्रयोग अवश्य करें। चना और मटर में फफूंदी लगने पर मैनकोजेब, कार्बेंडाजिम, इमिडावक्लोप्रिड या एसिटामिप्रिड का छिड़काव करें। सरसों में माहू लगने पर कात्यायनी डीमैट जैसी दवाओं का प्रयोग किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, फसलों में धुआं करने और हल्की सिंचाई जैसे देशी उपाय भी कारगर हो सकते हैं। हालांकि, कोई भी दवा कृषि रक्षा अधिकारी की सलाह के बिना प्रयोग न करें।