गांवों में तबाही के निशान छोड़ गई बाढ़
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बांदा। गांवों में बाढ़ अपनी तबाही के निशान छोड़ गई है। इक्का-दुक्का पक्के मकानों को छोड़कर सारे कच्चे मकान धराशायी हो गए। लौटे ग्रामीण अपने ध्वस्त घरौंदों में बचा-खुचा सामान तलाश कर सुरक्षित कर रहे हैं। कई स्थानों पर मकानों की सीमा का विवाद खड़ा हो रहा है। एक दूसरे से मिले मकान मिट्टी के ढेर में बदलने के बाद अब यह नहीं पता चल रहा कि उनकी दीवार और पड़ोसी की कहां थी। केन नदी किनारे आबाद सदर तहसील के कनवारा, ब्रह्माडेरा, चकचटगन, छावनी, दरदा, रघुवंशीडेरा, पैलानी तहसील के खप्टिहा, पैलानी, जसपुरा आदि गांवों में बाढ़ का पानी सिमट गया है। सड़कों और स्कूलों आदि में शरण लिए यहां के बाढ़ पीड़ित अब गांवों को लौट रहे हैं।
हालांकि उन्हें अभी सिर छिपाने की जगह नहीं है। मकान मिट्टी के ढेर में तब्दील हो चुके हैं। इन्हीं ढेर में बाढ़ पीड़ित अपनी गृहस्थी और लठा, बांस, खपरा आदि का इमारती सामान तलाश कर निकाल रहे हैं। ताकि दोबारा आशियाना खड़ा किया जा सके। फिलहाल प्रशासन भी बाढ़ पीड़ितों को फौरी तौर गृहगिरी आदि अनुदान नहीं दे रहा है। अलबत्ता प्रशासन द्वारा कुछ लोगों को पालीथिन के टुकड़े बांटे गए हैं। इन्हें लठे, बांस के सहारे तानकर बाढ़ पीड़ित सिर छिपाने का ठिकाना बनाए हुए हैं।