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इमामबाड़ों में फातेहाख्वानी
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बांदा। सार्वजनिक स्थानों और सड़कों पर मोहर्रम मनाने पर लगी रोक के चलते मंगलवार को सातवीं मोहर्रम के आयोजन नहीं हो सके। शहर में बड़ी संख्या में पुलिस तैनाती कर दी गई। नतीजे में इमामबाड़ों में फातेहाख्वानी व लंगर की रस्मे हुईं। शिया इमामबाड़ों में मजलिसों का सिलसिला जारी है।
सातवीं मोहर्रम को सुबह ताजिए और दोपहर को अलम जुलूस निकलते थे। तीसरे पहर सभी इमामबाड़ों ने नाल सवारी के जत्थे जुलूस बाजे गाजे के साथ शहर में भ्रमण करते थे। नवाबी जामा मस्जिद के सामने भारी भरकम मेला लगता था।
अबकी कोरोना संक्रमण के संक्रमण के चलते यह कोई को आयोजन नहीं हो सका। प्रशासन ने सुबह से ही कई थानों का फोर्स बुलाकर शहर में लगा दिया। उधर, मोहर्रम आयोजकों और आयोजन समिति ने प्रशासन के दोहरे रवैए पर नाराजगी है।
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श्रद्धालुओं का कहना है कि प्रशासन के अफसर धार्मिक आयोजनों में कोरोना गाइडलाइन का हवाला देकर सख्ती बरत रहे हैं। दूसरी तरफ सरकारी और राजनीतिक आयोजनों में गाइडलाइन की खुले आम धज्जियां उड़ रही हैं। इसमें अधिकारी और जन प्रतिनिधि भी खुद शामिल हो रहे हैं।
हाल ही में नवाब टैंक में हुआ आयोजन इसकी ताजा बानगी है। आयोजकों ने कहा कि शासन ने नई गाइडलाइन में कोरोना शर्तों का पालन करते हुए 50 लोगों तक शामिल होने की ढील दी है, लेकिन यहां का प्रशासन इसे भी नहीं मान रहा।
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सातवीं मोहर्रम को सुबह ताजिए और दोपहर को अलम जुलूस निकलते थे। तीसरे पहर सभी इमामबाड़ों ने नाल सवारी के जत्थे जुलूस बाजे गाजे के साथ शहर में भ्रमण करते थे। नवाबी जामा मस्जिद के सामने भारी भरकम मेला लगता था।
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अबकी कोरोना संक्रमण के संक्रमण के चलते यह कोई को आयोजन नहीं हो सका। प्रशासन ने सुबह से ही कई थानों का फोर्स बुलाकर शहर में लगा दिया। उधर, मोहर्रम आयोजकों और आयोजन समिति ने प्रशासन के दोहरे रवैए पर नाराजगी है।
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श्रद्धालुओं का कहना है कि प्रशासन के अफसर धार्मिक आयोजनों में कोरोना गाइडलाइन का हवाला देकर सख्ती बरत रहे हैं। दूसरी तरफ सरकारी और राजनीतिक आयोजनों में गाइडलाइन की खुले आम धज्जियां उड़ रही हैं। इसमें अधिकारी और जन प्रतिनिधि भी खुद शामिल हो रहे हैं।
हाल ही में नवाब टैंक में हुआ आयोजन इसकी ताजा बानगी है। आयोजकों ने कहा कि शासन ने नई गाइडलाइन में कोरोना शर्तों का पालन करते हुए 50 लोगों तक शामिल होने की ढील दी है, लेकिन यहां का प्रशासन इसे भी नहीं मान रहा।