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किसानों की मौत से फिर मुकरा प्रशासन

Fri, 10 Jun 2016 11:50 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा Updated Fri, 10 Jun 2016 11:50 PM IST
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Farmers from the death of the administration , then turns hostile
किसान

बांदा। बुंदेलखंड में दैवी आपदा या भूख से आत्महत्या या सदमे से मौत को एक बार फिर प्रशासन ने दोटूक शब्दों में नकार दिया। बुंदेलखंड के ज्यादातर जिलों से तहसील स्तर पर दी गई सूचनाओं मेें कहा गया है कि वर्ष 2012 में ओला गिरने से एक मौत के अलावा कोई मौत सूखा, भूख, ओला, पाला, अतिवृष्टि या कर्ज आदि से नहीं हुई है।

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समाजसेवी प्रमोद आजाद (दादौं) बुंदेलखंड के सभी जनपदों से जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत सूचना मांगी थी कि दैवी आपदा और सदमे से कितने किसानों ने आत्महत्या कर ली या कितनों की हार्टअटैक से मौत हुई? कितने किसानों ने कर्ज से आहत होकर मौत को लगे लगा लिया? शासन ने उन्हें क्या-क्या सहायता प्राप्त कराई? श्री आजाद ने यह सूचना वर्ष 2012 से अब तक मांगी थी।प्रत्येक जनपद के जिलाधिकारी या अपर जिलाधिकारी अथवा तहसीलदार ने अलग-अलग सूचनाएं भेजी हैं। बांदा के अपर जिलाधिकारी ने कहा है कि जनपद में वर्ष 2013-14 से अब तक सूखा, भूख, ओला, पाला, अतिवृष्टि, कर्ज आदि से कोई मृत्यु होने से पुष्टि नहीं हुई। यह भी कहा है कि मृतकों के परिजनों से भूराजस्व की वसूली स्थगित करने, वसूली के लिए किसी प्रकार की उत्पीड़नात्मक कार्रवाई न किए जाने, मृतक के परिवार को पात्रता के आधार पर राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना, वृद्धावस्था पेंशन अथवा मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
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ललितपुर जिले की तालबेहट तहसील के तहसीलदार ने दी सूचना में कहा कि मार्च 2014 में ओला गिरने से टोडी गांव के धूप सिंह की मौत हो गई थी। इसके अलावा वर्ष 2013-14 से अब तक सूखा, भूख, पाला, अति वर्षा, कर्ज आदि से किसी की मौत का कोई प्रकरण प्रकाश में नहीं आया है। ललितपुर सदर तहसीलदार ने भी किसानों की कर्ज या सदमे से मौत न होने की बात कही है। हमीरपुर सदर तहसीलदार ने भी कर्ज या दैवी आपदा से मौत की बात को खारिज कर दिया है। झांसी सदर और इसी जनपद के मोठ व गरौठा तहसीलदार ने भी अपनी सूचना में सूखा, भूख या कर्ज आदि से कोई मौत होना नहीं स्वीकारा है।

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