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बिजली के लिए तरस रहे किसान
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Fri, 11 Dec 2015 12:03 AM IST
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बांदा। बुंदेलखंड में भीषण सूखे के बावजूद 24 घंटे
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बिजली आपूर्ति का सरकारी फरमान फ्लाप हो गया। अलग-अलग फीडरों में ग्रामीण
क्षेत्रों को 12-12 घंटे बिजली आपूर्ति के दावे की हवा निकल गई।
हालत यह है कि चार से छह घंटे बिजली मिलने से कई क्षेत्रों के किसान पलेवा नहीं कर पा रहे। उधर, अभियंता कुछ सब स्टेशनवों में ट्रांसफार्मर की क्षमता कम बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर 25 नवंबर से बुंदेलखंड को 24 घंटे बिजली आपूर्ति की जा रही है। चित्रकूटधाम मंडल के पावर कारपोरेशन ने अपने खटरा सिस्टम की पोल खुलने से बचाने के लिए 24 घंटे बिजली न देकर 12-12 घंटे आपूर्ति का शेड्यूल लागू किया है।
अब हालत है कि 12 घंटे तो दूर कई सब स्टेशनों में 8 से 10 घंटे भी बिजली आपूर्ति नहीं हो पा रही। सूखे के चलते बांध में पानी कम होने से किसानों को रबी की बुआई के लिए केन नहर का सहारा भी नहीं रहा।
अब सरकारी व निजी नलकूप ही सिंचाई के साधन हैं। पर्याप्त बिजली आपूर्ति न होने से किसान रात-रात भर नलकूपों में बैठकर बिजली आने का इंतजार करते हैं। सुबह उन्हें मायूस होकर वापस लौटना पड़ता है।
जिले में तिंदवारी क्षेत्र में राजकीय नलकूपों की संख्या सबसे ज्यादा है। प्राइवेट नलकूपों की भी भरमार है। लेकिन सबसे ज्यादा बिजली का संकट इसी क्षेत्र में है।
पलरा सब स्टेशन से जुड़े ग्राम पदारथपुर, बरेठीकलां, गुगौली, बंबिया, महेदू, भड़ौली, दतरौली आदि गांवों में मुश्किल से चार से छह घंटे बिजली मिल रही है।
बंबिया गांव के किसान केदार सिंह यादव, चंद्रपाल, सूरजबली, दुल्ला आदि ने बताया कि बिजली की आस में रातभर ट्यूबवेल बैठना पड़ता है। सैकड़ों बीघा जमीन परती है।
खौड़ा गांव के जुगराज, पदमदेव, भड़ौली गांव के रामराज सिंह आदि ने बताया कि बिजली आने-जाने का कोई समय निर्धारित नहीं है। 24 घंटे में आठ घंटे भी बिजली नहीं मिल रही।
उधर, पावर कारपोरेशन अधीक्षण अभियंता एके मिश्रा से गांवों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने गोलमोल जवाब देते हुए कहा कि कुछ सब स्टेशनों में ट्रांसफार्मर की क्षमता कम होने से रोस्टर के मुताबिक फीडरवार बिजली आपूर्ति की जा रही है।
तिंदवारी व बबेरू सब स्टेशन में पांच एमवीए के ट्रांसफार्मर होने से लोड नहीं ले पा रहे। इनके स्थान पर 10 एमवीए के ट्रांसफार्मर लगाए जाना है।
यह पूछे जाने पर कि उनके 10 एमवीए ट्रांसफार्मर लगाने तक किसानों को पलेवा का समय निकल जाएगा और उनके खेतों की बुआई नहीं हो पाएगी ? उन्होंने कहा कि 15 दिन में 10 एमवीए के ट्रांसफार्मर लगाने की बाद व्यवस्था सही हो जाएगी।
हालत यह है कि चार से छह घंटे बिजली मिलने से कई क्षेत्रों के किसान पलेवा नहीं कर पा रहे। उधर, अभियंता कुछ सब स्टेशनवों में ट्रांसफार्मर की क्षमता कम बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर 25 नवंबर से बुंदेलखंड को 24 घंटे बिजली आपूर्ति की जा रही है। चित्रकूटधाम मंडल के पावर कारपोरेशन ने अपने खटरा सिस्टम की पोल खुलने से बचाने के लिए 24 घंटे बिजली न देकर 12-12 घंटे आपूर्ति का शेड्यूल लागू किया है।
अब हालत है कि 12 घंटे तो दूर कई सब स्टेशनों में 8 से 10 घंटे भी बिजली आपूर्ति नहीं हो पा रही। सूखे के चलते बांध में पानी कम होने से किसानों को रबी की बुआई के लिए केन नहर का सहारा भी नहीं रहा।
अब सरकारी व निजी नलकूप ही सिंचाई के साधन हैं। पर्याप्त बिजली आपूर्ति न होने से किसान रात-रात भर नलकूपों में बैठकर बिजली आने का इंतजार करते हैं। सुबह उन्हें मायूस होकर वापस लौटना पड़ता है।
जिले में तिंदवारी क्षेत्र में राजकीय नलकूपों की संख्या सबसे ज्यादा है। प्राइवेट नलकूपों की भी भरमार है। लेकिन सबसे ज्यादा बिजली का संकट इसी क्षेत्र में है।
पलरा सब स्टेशन से जुड़े ग्राम पदारथपुर, बरेठीकलां, गुगौली, बंबिया, महेदू, भड़ौली, दतरौली आदि गांवों में मुश्किल से चार से छह घंटे बिजली मिल रही है।
बंबिया गांव के किसान केदार सिंह यादव, चंद्रपाल, सूरजबली, दुल्ला आदि ने बताया कि बिजली की आस में रातभर ट्यूबवेल बैठना पड़ता है। सैकड़ों बीघा जमीन परती है।
खौड़ा गांव के जुगराज, पदमदेव, भड़ौली गांव के रामराज सिंह आदि ने बताया कि बिजली आने-जाने का कोई समय निर्धारित नहीं है। 24 घंटे में आठ घंटे भी बिजली नहीं मिल रही।
उधर, पावर कारपोरेशन अधीक्षण अभियंता एके मिश्रा से गांवों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने गोलमोल जवाब देते हुए कहा कि कुछ सब स्टेशनों में ट्रांसफार्मर की क्षमता कम होने से रोस्टर के मुताबिक फीडरवार बिजली आपूर्ति की जा रही है।
तिंदवारी व बबेरू सब स्टेशन में पांच एमवीए के ट्रांसफार्मर होने से लोड नहीं ले पा रहे। इनके स्थान पर 10 एमवीए के ट्रांसफार्मर लगाए जाना है।
यह पूछे जाने पर कि उनके 10 एमवीए ट्रांसफार्मर लगाने तक किसानों को पलेवा का समय निकल जाएगा और उनके खेतों की बुआई नहीं हो पाएगी ? उन्होंने कहा कि 15 दिन में 10 एमवीए के ट्रांसफार्मर लगाने की बाद व्यवस्था सही हो जाएगी।