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Banda News: मेडिकल कॉलेज में मुर्दे का करने का परिजनों ने लगाया आरोप
Sat, 18 Apr 2026 01:04 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Sat, 18 Apr 2026 01:04 AM IST
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फोटो - 24 शादी के जोड़े में पत्नी रागिनी के साथ दिवंगत रामजी साहू। परिजन
बांदा। मेडिकल कॉलेज में हड़ताल के दौरान आईसीयू में भर्ती मरीज की मौत के मामले में परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर मौत के बाद भी इलाज करते रहे। परिजनों को मरीज की मौत की सूचना नहीं दी। घटना से आक्रोशित परिजनों ने मेडिकल कॉलेज चौकी में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है।
शहर कोतवाली क्षेत्र के पड़ुई निवासी रामजी साहू ने बुधवार देर शाम घरेलू विवाद के चलते मेंहदी (बालों में लगाने वाला केमिकल) खा लिया था। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे तत्काल मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने गंभीर स्थिति बताते हुए मरीज आईसीयू में भर्ती किया गया। परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान ही रामजी की मौत हो गई, लेकिन डॉक्टरों ने इसकी जानकारी देने के बजाय उपचार जारी रखा।
इतना ही नहीं बाहर से ब्लड जांच कराने के लिए सैंपल भी देते रहे। कई घंटों बाद जब परिजनों ने मरीज को देखने को बात कही तो उन्हें मना कर दिया गया। जिस पर वह जबरन आईसीयू में गए तो पाया कि उनके मरीज की मौत पहले ही हो चुकी थी। मुर्दे का इलाज होते देखकर परिजन भी स्तब्ध रह गए और वीडियो बनाने का प्रयास किया तो मेडिकल कॉलेज के कर्मचारियों ने परिजनों का मोबाइल फोन तक तोड़ दिया।
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दिवंगत के रिश्तेदार जितेंद्र राज साहू ने बताया कि यदि समय पर सही जानकारी दी जाती तो वे अन्य विकल्पों पर विचार कर सकते थे। उन्होंने डॉक्टरों पर लापरवाही और सच्चाई छिपाने का गंभीर आरोप लगाया।
घटना के बाद परिजन मेडिकल कॉलेज चौकी पहुंचे और लिखित शिकायत दी। उन्होंने बताया कि शनिवार को जिलाधिकारी से मिलकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करेंगे, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
प्राचार्य ने आरोपों को बताया निराधार
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुनील कौशल ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मरीज गंभीर हालत में लाया गया था और उपचार के दौरान उसकी मौत हुई है। किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई है।
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शहर कोतवाली क्षेत्र के पड़ुई निवासी रामजी साहू ने बुधवार देर शाम घरेलू विवाद के चलते मेंहदी (बालों में लगाने वाला केमिकल) खा लिया था। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे तत्काल मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने गंभीर स्थिति बताते हुए मरीज आईसीयू में भर्ती किया गया। परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान ही रामजी की मौत हो गई, लेकिन डॉक्टरों ने इसकी जानकारी देने के बजाय उपचार जारी रखा।
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इतना ही नहीं बाहर से ब्लड जांच कराने के लिए सैंपल भी देते रहे। कई घंटों बाद जब परिजनों ने मरीज को देखने को बात कही तो उन्हें मना कर दिया गया। जिस पर वह जबरन आईसीयू में गए तो पाया कि उनके मरीज की मौत पहले ही हो चुकी थी। मुर्दे का इलाज होते देखकर परिजन भी स्तब्ध रह गए और वीडियो बनाने का प्रयास किया तो मेडिकल कॉलेज के कर्मचारियों ने परिजनों का मोबाइल फोन तक तोड़ दिया।
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दिवंगत के रिश्तेदार जितेंद्र राज साहू ने बताया कि यदि समय पर सही जानकारी दी जाती तो वे अन्य विकल्पों पर विचार कर सकते थे। उन्होंने डॉक्टरों पर लापरवाही और सच्चाई छिपाने का गंभीर आरोप लगाया।
घटना के बाद परिजन मेडिकल कॉलेज चौकी पहुंचे और लिखित शिकायत दी। उन्होंने बताया कि शनिवार को जिलाधिकारी से मिलकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करेंगे, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
प्राचार्य ने आरोपों को बताया निराधार
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुनील कौशल ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मरीज गंभीर हालत में लाया गया था और उपचार के दौरान उसकी मौत हुई है। किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई है।