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खेतों में दरारें पड़ने से सूख रहे गेहूं के पौधे
ब्यूरो/अमर उजाला,ब्यूरो
Updated Wed, 24 Feb 2016 11:51 PM IST
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बांदा। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के
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निरीक्षण में फसलों की हालत मिली जुली मिली। कहीं अच्छी तो कहीं खराब। बिन
पानी सूखे पड़े खेतों में गेहूं के पौधे सूखते नजर आए। अरहर के पौधों में
फली भेदक और सरसों में माहू का प्रकोप मिला।
वैज्ञानिक के दल ने लगभग एक दर्जन गांवों का भ्रमण कर खेतों में जाकर फसलों का जायजा लिया। कृषि विज्ञान केंद्र अध्यक्ष डॉ. वीके शर्मा ने बताया कि बबेरू, बरगहनी, पडुई और गुरेह आदि गांवों में सूखे का असर साफ दिखाई दिया।
चना और मटर की फसल कमजोर पाई गई। यहां दो प्रतिशत यूरिया घोल के छिड़काव के सुझाव दिए गए। पडुई गांव में देर से बुआई और चने की भाजी की तुड़ाई से फसल कमजोर पाई गई।
यहां भी यूरिया घोल छिड़काव बताया गया। बबेरू में मसूर की फसल वैज्ञानिकों ने बेहतर पाई। जमीन में नमी की कमी से दरारें पड़ने लगी हैं। नतीजे में गेहूं की जड़े टूटने से पौधे सूखने लगे हैं। किसानों को यहां शीघ्र सिंचाई की सलाह दी गई।
अरहर में फली भेदक और सरसों में माहू का प्रकोप पाया गया। रोकथाम के लिए दवा छिड़काव के तरीके बताए। वैज्ञानिकों के दल में अध्यक्ष श्री शर्मा समेत डॉ. मुलायम सिंह और डॉ. पृथ्वी पाल आदि शामिल थे।
वैज्ञानिक के दल ने लगभग एक दर्जन गांवों का भ्रमण कर खेतों में जाकर फसलों का जायजा लिया। कृषि विज्ञान केंद्र अध्यक्ष डॉ. वीके शर्मा ने बताया कि बबेरू, बरगहनी, पडुई और गुरेह आदि गांवों में सूखे का असर साफ दिखाई दिया।
चना और मटर की फसल कमजोर पाई गई। यहां दो प्रतिशत यूरिया घोल के छिड़काव के सुझाव दिए गए। पडुई गांव में देर से बुआई और चने की भाजी की तुड़ाई से फसल कमजोर पाई गई।
यहां भी यूरिया घोल छिड़काव बताया गया। बबेरू में मसूर की फसल वैज्ञानिकों ने बेहतर पाई। जमीन में नमी की कमी से दरारें पड़ने लगी हैं। नतीजे में गेहूं की जड़े टूटने से पौधे सूखने लगे हैं। किसानों को यहां शीघ्र सिंचाई की सलाह दी गई।
अरहर में फली भेदक और सरसों में माहू का प्रकोप पाया गया। रोकथाम के लिए दवा छिड़काव के तरीके बताए। वैज्ञानिकों के दल में अध्यक्ष श्री शर्मा समेत डॉ. मुलायम सिंह और डॉ. पृथ्वी पाल आदि शामिल थे।