{"_id":"61817f7e5d1e9c5d282aaadc","slug":"education-banda-news-knp66197594","type":"story","status":"publish","title_hn":"बुंदेलखंड को उत्तम बनाए बिना उत्तम प्रदेश नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बुंदेलखंड को उत्तम बनाए बिना उत्तम प्रदेश नहीं
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बांदा। कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय बांदा के नवागंतुक कुलपति प्रो. नरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा है कि बुंदेलखंड को उत्तम बनाए बिना उत्तम प्रदेश की कल्पना नहीं की जा सकती। यहां संस्कृति, उत्पाद, खानपान और प्रतिभा की ब्रांडिंग आवश्यक है। तीन वर्षों के कार्यकाल में कुछ ऐसा करने का प्रयास किया जाएगा कि लोग 30 वर्षों तक याद रखें।
वह मंगलवार को कुलपति पद का कार्यभार ग्रहण के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय के छात्र शिक्षा, शोध और प्रसार विकसित करने पर पूरा ध्यान दें। इसी से अपनी पहचान बनाएं। यहां के विकास के लिए हम खुद मजदूर बनकर नेतृत्व देंगे।
उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड समस्याओं और पलायन के लिए जाना जाता है। अन्ना प्रथा यहां के किसानों के लिए अभिशाप है। लेकिन यही वरदान साबित हो सकती है। बुंदेलखंड को जैविक उत्पाद के हब के रूप में विकसित करने से यह वरदान साबित होगा।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय यहां की कृषि दशा और दिशा बदल रहा है। किसानों को सलाह दी कि अपनी जोत के अनुसार फसलों का चुनाव करें और क्षेत्र अनुकूल तकनीक अपनाकर जीविकोपार्जन का साधन और समृद्धि का आधार बनाएं। कुलपति ने कहा कि देश के 75 विश्वविद्यालय में बांदा विश्वविद्यालय को 10 स्थानों में स्थान मिले इसका पूरा प्रयास होगा। इस दौरान विश्वविद्यालय के जन संपर्क अधिकारी डॉ. बीके गुप्ता भी मौजूद रहे।
विज्ञापन
वह मंगलवार को कुलपति पद का कार्यभार ग्रहण के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय के छात्र शिक्षा, शोध और प्रसार विकसित करने पर पूरा ध्यान दें। इसी से अपनी पहचान बनाएं। यहां के विकास के लिए हम खुद मजदूर बनकर नेतृत्व देंगे।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड समस्याओं और पलायन के लिए जाना जाता है। अन्ना प्रथा यहां के किसानों के लिए अभिशाप है। लेकिन यही वरदान साबित हो सकती है। बुंदेलखंड को जैविक उत्पाद के हब के रूप में विकसित करने से यह वरदान साबित होगा।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय यहां की कृषि दशा और दिशा बदल रहा है। किसानों को सलाह दी कि अपनी जोत के अनुसार फसलों का चुनाव करें और क्षेत्र अनुकूल तकनीक अपनाकर जीविकोपार्जन का साधन और समृद्धि का आधार बनाएं। कुलपति ने कहा कि देश के 75 विश्वविद्यालय में बांदा विश्वविद्यालय को 10 स्थानों में स्थान मिले इसका पूरा प्रयास होगा। इस दौरान विश्वविद्यालय के जन संपर्क अधिकारी डॉ. बीके गुप्ता भी मौजूद रहे।