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खाना स्कूल में खाओ, पानी घर पीकर आओ
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बांदा। जिले के 72 स्कूलों में पानी की व्यवस्था नहीं है। यहां पढ़ने वाले करीब 7500 बच्चे स्कूल परिसर के बाहर लगे हैंडपंपों या फिर घर जाकर पानी पीते हैं। मिड-डे मील बनाने के लिए भी गांवों में लगे हैंडपंपों से पानी लाना पड़ता है।
आलम यह है कि बच्चे मिड-डे मील स्कूल में खाते हैं और पानी घर जाकर पीते हैं। इन विद्यालयों की समस्या के समाधान के लिए शासन ने इन्हें जल जीवन मिशन-100 दिवसीय अभियान में शामिल किया है। ऐसे विद्यालयों में पाइप लाइन से पानी ले जाने का काम माह अगस्त तक पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
जिले में 1725 परिषदीय विद्यालय हैं। ग्रामीण क्षेत्र के 72 ऐसे विद्यालय हैं, जिनमें पीने के पानी के इंतजाम नहीं हैं। इन विद्यालयों के बच्चे मिड-डे मील का भोजन करने के बाद घर जाकर या फिर बोतल में पानी लाकर पानी पीते हैं।
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रसोइया भी खाना बनाने के लिए डिब्बों में पानी ढोकर लातीं हैं। ऐसे विद्यालयों की सूची तैयार कर कार्यदायी संस्था यूपीपीसीएल को देने के निर्देश दिए गए हैं। यह कार्य अगस्त तक पूरा करना है। जल जीवन मिशन अभियान के क्रम में जिले में ऐसे विद्यालयों के चिह्नांकन का कार्य शुरू हो गया है।
जिन स्कूलों में समुचित पेयजल सुविधा नहीं है। ऐसे विद्यालयों के चिह्नांकन का काम चल रहा है। इसके अलावा बिजली न रहने पर सबमर्सिबल से भी पानी की सप्लाई नहीं हो पाती। इन स्कूलों को भी चिह्नित किया जा रहा है। रामपाल, बीएसए।
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आलम यह है कि बच्चे मिड-डे मील स्कूल में खाते हैं और पानी घर जाकर पीते हैं। इन विद्यालयों की समस्या के समाधान के लिए शासन ने इन्हें जल जीवन मिशन-100 दिवसीय अभियान में शामिल किया है। ऐसे विद्यालयों में पाइप लाइन से पानी ले जाने का काम माह अगस्त तक पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
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जिले में 1725 परिषदीय विद्यालय हैं। ग्रामीण क्षेत्र के 72 ऐसे विद्यालय हैं, जिनमें पीने के पानी के इंतजाम नहीं हैं। इन विद्यालयों के बच्चे मिड-डे मील का भोजन करने के बाद घर जाकर या फिर बोतल में पानी लाकर पानी पीते हैं।
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रसोइया भी खाना बनाने के लिए डिब्बों में पानी ढोकर लातीं हैं। ऐसे विद्यालयों की सूची तैयार कर कार्यदायी संस्था यूपीपीसीएल को देने के निर्देश दिए गए हैं। यह कार्य अगस्त तक पूरा करना है। जल जीवन मिशन अभियान के क्रम में जिले में ऐसे विद्यालयों के चिह्नांकन का कार्य शुरू हो गया है।
जिन स्कूलों में समुचित पेयजल सुविधा नहीं है। ऐसे विद्यालयों के चिह्नांकन का काम चल रहा है। इसके अलावा बिजली न रहने पर सबमर्सिबल से भी पानी की सप्लाई नहीं हो पाती। इन स्कूलों को भी चिह्नित किया जा रहा है। रामपाल, बीएसए।