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जरैली कोठी में डायरिया का प्रकोप
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बांदा। मौसम के बदलाव से उल्टी-दस्त और पेट दर्द के मरीजों में इजाफा हो गया है। रोजाना सैकड़ों की संख्या में मरीज इलाज कराने ओपीडी पहुंच रहे हैं। आलम यह है कि ट्रामा सेंटर से लेकर जिला अस्पताल के वार्ड तक मरीजों से हाउसफुल हैं। सबसे ज्यादा डायरिया का प्रकोप शहर के जरैली कोठी में फैला है। यहां के दो मासूमों समेत लगभग 10 लोगों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
तेज धूप और उमस से डायरिया के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। शुक्रवार को जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में लगभग 25 मरीज भर्ती हुए। इनमें सबसे ज्यादा संख्या जरैली कोठी के मरीजों की है। यहां के अभिनव दीक्षित, रामप्रताप, माया, आदित्य, सालिया, सुनीता सविता, सानू, रुद्र, विकास और प्रांजल शामिल हैं। इनके अलावा स्वराज कालोनी के लखन व निक्की, आवास विकास के अश्विन गुप्ता को भी उल्टी-दस्त से ग्रसित होने पर भर्ती कराया गया है।
ट्रामा सेंटर वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डा. विनीत सचान ने बताया कि मौसम में बदलाव से संक्रामक बीमारियां बढ़ रही हैं। उमस भरे मौसम पाचन क्रिया सुस्त हो जाती है। बांसी, भारी व मसालेदार खानपान से लोगों की तबीयत बिगड़ रही है। रोजाना उल्टी-दस्त और पेट दर्द के लगभग आधा सैकड़ा से ज्यादा मरीज आ रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि शहर के कुछ मोहल्लों से डायरिया मरीज ज्यादा आ रहे हैं। उन्होंने नसीहत दी कि पानी की कमी न होने दें। ताजा खाना खाएं।
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ओपीडी में देर से आ रहे हैं डाक्टर
बांदा। जिला अस्पताल की ओपीडी में डाक्टर समय से नहीं आ रहे। मरीजों को देर तक उनका इंतजार करना पड़ता है। कोविड का कहर थमने के बाद चार जून से ओपीडी शुरू हुई, लेकिन कोरोना के डर से ज्यादा मरीज नहीं आ रहे। अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक, पहले रोजाना 1300 से 1500 मरीज ओपीडी में आते थे। अब यह संख्या 50-60 फीसदी पर सिमट कर रह गई है। बमुश्किल रोजाना 700-800 मरीज ही इलाज के लिए ओपीडी में आ रहे हैं। मरीजों का आरोप है कि ओपीडी शुरू होने के लगभग आधा से एक घंटे बाद डाक्टर आते हैं। सीएमएस डा. यूबी सिंह ने आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि डाक्टर ओपीडी में समय पर पहुंच जाते हैं। जल्दबाजी करने वाले मरीज अनर्गल आरोप लगाते हैं।
तीमारदारों की भीड़ से परेशान गंभीर मरीज
बांदा। जिला अस्पताल में तीमारदारों की भी खासी भीड़ रहती है। एक मरीज के साथ तीन से चार तीमारदार रहने से अस्पताल की व्यवस्थाएं गड़बड़ा रही हैं। ट्रामा सेंटर और जिला अस्पताल के वार्डों में यह नजारा आम है। मरीज के पलंग के अलावा आसपास खाली पलंगों पर भी तीमारदारों का जमघट रहता है। भीड़भाड़ से अन्य गंभीर मरीजों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। तीमारदारों की भीड़ को लेकर डा. विनीत सचान ने सीएमएस से शिकायत की है। सीएमएस ने निर्देश दिए कि मरीज के साथ एक तीमारदार ही रुक सकेगा।
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तेज धूप और उमस से डायरिया के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। शुक्रवार को जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में लगभग 25 मरीज भर्ती हुए। इनमें सबसे ज्यादा संख्या जरैली कोठी के मरीजों की है। यहां के अभिनव दीक्षित, रामप्रताप, माया, आदित्य, सालिया, सुनीता सविता, सानू, रुद्र, विकास और प्रांजल शामिल हैं। इनके अलावा स्वराज कालोनी के लखन व निक्की, आवास विकास के अश्विन गुप्ता को भी उल्टी-दस्त से ग्रसित होने पर भर्ती कराया गया है।
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ट्रामा सेंटर वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डा. विनीत सचान ने बताया कि मौसम में बदलाव से संक्रामक बीमारियां बढ़ रही हैं। उमस भरे मौसम पाचन क्रिया सुस्त हो जाती है। बांसी, भारी व मसालेदार खानपान से लोगों की तबीयत बिगड़ रही है। रोजाना उल्टी-दस्त और पेट दर्द के लगभग आधा सैकड़ा से ज्यादा मरीज आ रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि शहर के कुछ मोहल्लों से डायरिया मरीज ज्यादा आ रहे हैं। उन्होंने नसीहत दी कि पानी की कमी न होने दें। ताजा खाना खाएं।
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ओपीडी में देर से आ रहे हैं डाक्टर
बांदा। जिला अस्पताल की ओपीडी में डाक्टर समय से नहीं आ रहे। मरीजों को देर तक उनका इंतजार करना पड़ता है। कोविड का कहर थमने के बाद चार जून से ओपीडी शुरू हुई, लेकिन कोरोना के डर से ज्यादा मरीज नहीं आ रहे। अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक, पहले रोजाना 1300 से 1500 मरीज ओपीडी में आते थे। अब यह संख्या 50-60 फीसदी पर सिमट कर रह गई है। बमुश्किल रोजाना 700-800 मरीज ही इलाज के लिए ओपीडी में आ रहे हैं। मरीजों का आरोप है कि ओपीडी शुरू होने के लगभग आधा से एक घंटे बाद डाक्टर आते हैं। सीएमएस डा. यूबी सिंह ने आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि डाक्टर ओपीडी में समय पर पहुंच जाते हैं। जल्दबाजी करने वाले मरीज अनर्गल आरोप लगाते हैं।
तीमारदारों की भीड़ से परेशान गंभीर मरीज
बांदा। जिला अस्पताल में तीमारदारों की भी खासी भीड़ रहती है। एक मरीज के साथ तीन से चार तीमारदार रहने से अस्पताल की व्यवस्थाएं गड़बड़ा रही हैं। ट्रामा सेंटर और जिला अस्पताल के वार्डों में यह नजारा आम है। मरीज के पलंग के अलावा आसपास खाली पलंगों पर भी तीमारदारों का जमघट रहता है। भीड़भाड़ से अन्य गंभीर मरीजों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। तीमारदारों की भीड़ को लेकर डा. विनीत सचान ने सीएमएस से शिकायत की है। सीएमएस ने निर्देश दिए कि मरीज के साथ एक तीमारदार ही रुक सकेगा।