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लोकतंत्र रक्षक सेनानियों की सूची से वंचितों की होगी तलाश
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बांदा। 1977 में आपातकाल के दौरान जेल भेजे गए राजनैतिक बंदियों की सूची में दर्ज न होने वाले या दिवंगत मीसा बंदियों की सूची तैयार की जाएगी। इसके लिए वर्ष 2006 के पूर्व की सीमा तय की गई है। यह सूची शासन को भेजी जाएगी।
प्रदेश की तत्कालीन सपा सरकार ने इन लोकतंत्र रक्षक सेनानियों को वर्ष 2006 में 5000 रुपये मासिक सम्मान राशि शुरू की थी। बांदा जिले में 80 जेल बंदियों की सूची तैयार की गई थी, लेकिन ये शिकायतें हो रही थीं कि कई मीसा बंदियों को सूची में शामिल नहीं किया गया है। इस कारण उन्हें यह सम्मान राशि नहीं मिल रही।
इस पर मौजूदा प्रदेश सरकार ने ऐसे व्यक्तियों की खोज शुरू कर दी है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कल्याण परिषद की निदेशक निर्मला श्रीवास्तव ने डीएम को भेजे पत्र में कहा है कि 22 मार्च 1977 से पहली अप्रैल 2006 के पूर्व ऐसे जीवित अथवा दिवंगत व्यक्ति जो आपातकाल के समय जेल गए हों और लोकतंत्र सेनानी घोषित नहीं हो सके हैं, उनकी सूची तैयार कर शासन को भेजी जाए, ताकि उन्हें भी लोकतंत्र सेनानी रक्षक के रूप में सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विचार किया जा सके। सिटी मजिस्ट्रेट प्रदीप कुमार ने बताया कि शासन के निर्देश पर ऐसे व्यक्तियों की जानकारी जेल व पुलिस अधीक्षक से मंगाई गई है।
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प्रदेश की तत्कालीन सपा सरकार ने इन लोकतंत्र रक्षक सेनानियों को वर्ष 2006 में 5000 रुपये मासिक सम्मान राशि शुरू की थी। बांदा जिले में 80 जेल बंदियों की सूची तैयार की गई थी, लेकिन ये शिकायतें हो रही थीं कि कई मीसा बंदियों को सूची में शामिल नहीं किया गया है। इस कारण उन्हें यह सम्मान राशि नहीं मिल रही।
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इस पर मौजूदा प्रदेश सरकार ने ऐसे व्यक्तियों की खोज शुरू कर दी है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कल्याण परिषद की निदेशक निर्मला श्रीवास्तव ने डीएम को भेजे पत्र में कहा है कि 22 मार्च 1977 से पहली अप्रैल 2006 के पूर्व ऐसे जीवित अथवा दिवंगत व्यक्ति जो आपातकाल के समय जेल गए हों और लोकतंत्र सेनानी घोषित नहीं हो सके हैं, उनकी सूची तैयार कर शासन को भेजी जाए, ताकि उन्हें भी लोकतंत्र सेनानी रक्षक के रूप में सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विचार किया जा सके। सिटी मजिस्ट्रेट प्रदीप कुमार ने बताया कि शासन के निर्देश पर ऐसे व्यक्तियों की जानकारी जेल व पुलिस अधीक्षक से मंगाई गई है।
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