फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Banda News ›   Delivery of the flood victims in dunes

टीले में हुआ बाढ़ पीड़ित का प्रसव

Mon, 22 Aug 2016 11:37 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा Updated Mon, 22 Aug 2016 11:37 PM IST
विज्ञापन
Delivery of the flood victims in dunes
शंकर पुरवा में खुले आसमान तले टीले पर प्रसव के बाद जच्चा और बच्चा। - फोटो : अमर उजाला

बांदा। पैलानी तहसील से शंकर के पुरवा में टीले पर डेरा डाले बाढ़ पीड़ित निषाद बिरादरी की महिला राजकली ने खुले आसमान के नीचे शिशु को जन्म दिया। प्रसव पीड़ा होने के बाद भी उसके पास तक प्रशासन ने स्टीमर और नाव नहीं पहुंचाई। शिशु को गंदे कपड़ों में लपेटकर रखा। सोमवार को सुबह सपा सांसद विशंभर प्रसाद निषाद ने प्रशासन को फटकार लगाई। इसके बाद प्रशासन ने सुध ली।केन और यमुना नदियों की दोहरी बाढ़ों से जूझ रहे जनपद के हजारों बाढ़ पीड़ितों को सहायता में भारी कोताही बरती जा रही है। बेघर होकर खुले स्थानों और सड़कों किनारे पड़े बाढ़ पीड़ितों को तीन दिनों में मात्र एक या दो बार और वह भी गिनेचुने पीड़ितों को लंच पैकेट या लाई, चना मिला है। प्रशासन के अधिकारी वाट्सअप पर सब कुछ ‘गुड’ बताकर खुद की पीठ ठोंक रहे हैं। तमाम बाढ़ पीड़ित में बुखार और डायरिया की चपेट में हैं।

विज्ञापन


उन्हें इलाज नहीं मिल रहा। राजकली का पति गुजरात में मजदूरी कर रहा है। वह यहां अकेले रहती है। गर्भवती राजकली को रविवार की रात प्रसव पीड़ा हुई। दर्द में वह गुहार लगाती रही लेकिन कोई मदद नहीं मिली। अंतत: राजकली नेे खुले आसमान तले टीले पर ही शिशु को जन्म दिया। सोमवार को सुबह सपा सांसद विशंभर प्रसाद निषाद द्वारा प्रशासन को फटकार लगाए जाने के बाद राजकली की सुध ली गई। सांसद ने बताया कि शंकर पुरवा में सिर्फ रविवार को दिन में पूड़ी के पैकेट पहुंचे थे। केन नदी में पानी कम हो जाने के बाद भी प्रभावित गांवों में अभी कई दिनों तक जाने या रहने के हालात नहीं हैं। दलदल और सड़ांध मची है। वहां अब तक दवा का छिड़काव नहीं हुआ। उधर, बाढ़ पीड़ितों को चाय-नाश्ता भी नहीं नसीब हो रहा। बाढ़ के दो दिनों बाद कुछ लोगों को लंच पैकेट पहुंचाए गए। यह पैकेट लेकर पहुंची पीएसी की बोट में भूखे-प्यासे बाढ़ पीड़ित टूट पड़े। ऐसे में छीना छपटी से बचने के लिए पीएसी जवानों ने ब्रह्माडेरा में दूर से ही लंच पैकेट बाढ़ पीड़ितों की भीड़ पर लुटा दिए। आगे के लिए पैकेट नहीं बचे। खप्टिहकलां। सैमरा डेरा के ग्रामीण अभी भी केन नदी की बाढ़ से बचने के लिए ऊंचे टीले पर शरण लिए हैं। गांवों के पक्के मकानों में बड़ी संख्या में लोग पनाह लिए हुए हैं। प्रशासन ने लंच पैकेट और पालीथिन तथा कुछ टेंट की व्यवस्था कराई है। एसडीएम पुष्पराज सिंह और तहसीलदार गिरिविर सिंह ने कहा कि अब तक बाढ़ से कोई जनहानि नहीं हुई है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed