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दलबदल का मिला इनाम, चुनाव लड़ने का फरमान
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बृजेश राजपूत
- फोटो : BANDA
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बांदा। चौथे चरण में नामांकन की शुरूआत से दो दिन पूर्व सपा ने 4 सीटों में से 2 में नरैनी (सुरक्षित) और तिंदवारी से प्रत्याशी घोषित कर दिए। दोनों ही सीटों पर सपा ने हाल ही में इंट्री कराने वाले नेताओं पर दांव लगाया है।
पूर्व मंत्री और बसपा के संस्थापक नेताओं में शामिल रहे दद्दू प्रसाद को नरैनी और भाजपा से सपा में आए मौजूदा विधायक बृजेश प्रजापति को तिंदवारी से चुनाव मैदान में उतारा है। दद्दू प्रसाद ने 2018 में बसपा से निकाले जाने के बाद सामाजिक परिवर्तन मिशन गठित कर उसी के बैनर तले अपनी गतिविधियां जारी रखीं।
पिछले माह उन्होंने सपा से हाथ मिला लिया। उधर, बृजेश प्रजापति तिंदवारी से मौजूदा विधायक हैं। वह भाजपा के सिंबल पर जीते थे। पिछले माह उनके राजनीतिक गुरु स्वामी प्रसाद मौर्य के सपा में शामिल होने पर बृजेश भी भाजपा से इस्तीफा देकर सपा की साइकिल में सवार हो गए थे।
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दद्दू प्रसाद बुंदेलखंड में अनुसूचित जाति के मतदाताओं में खास चेहरा हैं। वह मूलरूप से बांदा जनपद के ग्योरा मुगली गांव के बाशिंदे हैं। शुरूआत से ही बसपा में अहम किरदार निभाते रहे। 2007 में बसपा से ही पहली बार सुरक्षित सीट मानिकपुर (चित्रकूट) से जीतकर विधायक बने। मायावती सरकार में काबीना मंत्री रहे।
बसपा के बुंदेलखंड कोआर्डिनेटर समेत कई पदों पर रहे। वर्ष 2015 में मायावती ने दद्दू प्रसाद को बसपा से बाहर कर दिया। वर्ष-2017 में उन्हें फिर बसपा में इंट्री मिल गई। लेकिन अगले ही वर्ष 2018 में उन्हें मायावती ने फिर बसपा से निष्कासित कर दिया। तब से दद्दू प्रसाद किसी राजनीतिक दल में शामिल होने के बजाए सामाजिक परिवर्तन मिशन गठित कर उसमें सक्रिय रहे।
बसपा के जमीनी नेता रहे जोगी लाल के बेटे बृजेश कुमार प्रजापति ने अपनी सियासी पारी की शुरूआत वर्ष 2017 में भाजपा के टिकट पर तिंदवारी विधान सभा सीट से चुनाव लड़कर की। निकटतम प्रतिद्वंद्वी बसपा प्रत्याशी को 37 हजार से ज्यादा वोटों से हराया।
बृजेश को यह टिकट स्वामी प्रसाद मौर्य खेमे के कोटे से मिला था। विधायकी काल में वह अपने तीखे बयानों के लिए कई बार सुर्खियों में आए। पिछले माह स्वामी प्रसाद मौर्य के भाजपा से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल होने पर बृजेश ने भी भाजपा से त्यागपत्र दे दिया और सपा में शामिल हो गए।
तभी से यह कयास लगाया जा रहा था कि स्वामी प्रसाद मौर्य कोटे से उन्हें तिंदवारी से ही सपा टिकट पर चुनाव लड़ाया जाएगा। ब्रजेश मूल रूप से बांदा जनपद के जारी गांव के निवासी हैं। एलएलबी डिग्रीधारक हैं।
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पूर्व मंत्री और बसपा के संस्थापक नेताओं में शामिल रहे दद्दू प्रसाद को नरैनी और भाजपा से सपा में आए मौजूदा विधायक बृजेश प्रजापति को तिंदवारी से चुनाव मैदान में उतारा है। दद्दू प्रसाद ने 2018 में बसपा से निकाले जाने के बाद सामाजिक परिवर्तन मिशन गठित कर उसी के बैनर तले अपनी गतिविधियां जारी रखीं।
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पिछले माह उन्होंने सपा से हाथ मिला लिया। उधर, बृजेश प्रजापति तिंदवारी से मौजूदा विधायक हैं। वह भाजपा के सिंबल पर जीते थे। पिछले माह उनके राजनीतिक गुरु स्वामी प्रसाद मौर्य के सपा में शामिल होने पर बृजेश भी भाजपा से इस्तीफा देकर सपा की साइकिल में सवार हो गए थे।
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दद्दू प्रसाद बुंदेलखंड में अनुसूचित जाति के मतदाताओं में खास चेहरा हैं। वह मूलरूप से बांदा जनपद के ग्योरा मुगली गांव के बाशिंदे हैं। शुरूआत से ही बसपा में अहम किरदार निभाते रहे। 2007 में बसपा से ही पहली बार सुरक्षित सीट मानिकपुर (चित्रकूट) से जीतकर विधायक बने। मायावती सरकार में काबीना मंत्री रहे।
बसपा के बुंदेलखंड कोआर्डिनेटर समेत कई पदों पर रहे। वर्ष 2015 में मायावती ने दद्दू प्रसाद को बसपा से बाहर कर दिया। वर्ष-2017 में उन्हें फिर बसपा में इंट्री मिल गई। लेकिन अगले ही वर्ष 2018 में उन्हें मायावती ने फिर बसपा से निष्कासित कर दिया। तब से दद्दू प्रसाद किसी राजनीतिक दल में शामिल होने के बजाए सामाजिक परिवर्तन मिशन गठित कर उसमें सक्रिय रहे।
बसपा के जमीनी नेता रहे जोगी लाल के बेटे बृजेश कुमार प्रजापति ने अपनी सियासी पारी की शुरूआत वर्ष 2017 में भाजपा के टिकट पर तिंदवारी विधान सभा सीट से चुनाव लड़कर की। निकटतम प्रतिद्वंद्वी बसपा प्रत्याशी को 37 हजार से ज्यादा वोटों से हराया।
बृजेश को यह टिकट स्वामी प्रसाद मौर्य खेमे के कोटे से मिला था। विधायकी काल में वह अपने तीखे बयानों के लिए कई बार सुर्खियों में आए। पिछले माह स्वामी प्रसाद मौर्य के भाजपा से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल होने पर बृजेश ने भी भाजपा से त्यागपत्र दे दिया और सपा में शामिल हो गए।
तभी से यह कयास लगाया जा रहा था कि स्वामी प्रसाद मौर्य कोटे से उन्हें तिंदवारी से ही सपा टिकट पर चुनाव लड़ाया जाएगा। ब्रजेश मूल रूप से बांदा जनपद के जारी गांव के निवासी हैं। एलएलबी डिग्रीधारक हैं।

दद्दू प्रसाद - फोटो : BANDA