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श्रीराम के हाथों मौत का मतलब अमर होना
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Death means immortality at the hands of Shri Ram
- फोटो : BANDA
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बांदा। रावण के किरदार में श्रीराम के हाथों मरने के मंचन से किसी तरह की हीन भावना नहीं बल्कि अमर होने की खुशी होने का एहसास होता है। मन में एक उत्तेजना आ जाती है।
यह कहना है शहर की प्रमुख अलीगंज रामलीला में रावण की भूमिका अदा करने वाले पंडित मधुसूदन शुक्ला का। स्नातक श्री शुक्ल पिछले 10 वर्षों से रावण की भूमिका अदा कर रहे हैं। जनपद के ब्योंजा गांव निवासी मधुसूदन बताते हैं कि उनके गांव में करीब डेढ़ सौ वर्षों से रामलीला हो रही है। एक दशक पूर्व उनके गांव में रावण की भूमिका निभाने वाले सिमौनी के कलाकार ने 500 रुपये प्रति रात मेहनताना मांगा।
मधुसूदन के मुताबिक यह सुनकर उनके मन में भाव आया कि गांव की रामलीला में यह भूमिका खुद क्यूं न अदा करूं? तभी से रामलीला में रावण का रूप हासिल कर लिया। अपना आराध्य भगवान शिव को बताया।
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मधुसूदन कहते हैं कि श्रीराम से युद्ध के दौरान मरने पर उनके अंदर यह दिव्य उत्तेजना पैदा होती है कि मरना तो है ही। लेकिन इस किरदार में मौत का मतलब अमर होना है। हम अपने को बहुत गौरवांवित महसूस करते हैं। मधुसूदन किसान परिवार के हैं। 20 बीघा खेती है। बेटा-बेटी उच्च शिक्षा हासिल कर रहे हैं।
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यह कहना है शहर की प्रमुख अलीगंज रामलीला में रावण की भूमिका अदा करने वाले पंडित मधुसूदन शुक्ला का। स्नातक श्री शुक्ल पिछले 10 वर्षों से रावण की भूमिका अदा कर रहे हैं। जनपद के ब्योंजा गांव निवासी मधुसूदन बताते हैं कि उनके गांव में करीब डेढ़ सौ वर्षों से रामलीला हो रही है। एक दशक पूर्व उनके गांव में रावण की भूमिका निभाने वाले सिमौनी के कलाकार ने 500 रुपये प्रति रात मेहनताना मांगा।
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मधुसूदन के मुताबिक यह सुनकर उनके मन में भाव आया कि गांव की रामलीला में यह भूमिका खुद क्यूं न अदा करूं? तभी से रामलीला में रावण का रूप हासिल कर लिया। अपना आराध्य भगवान शिव को बताया।
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मधुसूदन कहते हैं कि श्रीराम से युद्ध के दौरान मरने पर उनके अंदर यह दिव्य उत्तेजना पैदा होती है कि मरना तो है ही। लेकिन इस किरदार में मौत का मतलब अमर होना है। हम अपने को बहुत गौरवांवित महसूस करते हैं। मधुसूदन किसान परिवार के हैं। 20 बीघा खेती है। बेटा-बेटी उच्च शिक्षा हासिल कर रहे हैं।