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56.64 लाख में केदार बाबू के आवास का सौदा
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Mon, 22 Jun 2015 12:37 AM IST
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बुंदेलखंड की शान और पहचान कहे जाने वाले जनकवि बाबू केदारनाथ अग्रवाल का आवास बिकने की चर्चा गलत नहीं है। मकान का सौदा 56. 64 लाख रुपये में हुआ है। जिले के साहित्यकारों ने केदार बाबू की पुत्रवधू की ओर से किया गया सौदे का रजिस्टर्ड इकरारनामा हासिल कर लिया है। उन्होंने मीडिया को इकरारनामे की फोटोकॉपी उपलब्ध कराई।
सिविल लाइन स्थित जनकवि केदार के खपरैलदारनुमा पुराने मकान में अभी भी उनकी यादें मौजूद हैं। हर साल उनकी जयंती और पुण्यतिथि यहीं मनाई जाती है। केदारबाबू की पुत्रवधू ज्योति अग्रवाल ने सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में 15 जून 2015 को आवास बेचने के लिए स्वराज कालोनी निवासी मंजुला सिंह को 56.64 हजार रुपये में बेचने का इकरारनामा किया।
नौ लाख रुपये बयाने के तौर पर लिए गए हैं। 350 रुपये प्रति वर्ग फीट की दर से सौदा तय हुआ है। इकरारनामे में विक्रेता पुत्रवधू ने कहा कि बाउंड्री का निर्माण कराकर मकान के वास्तविक नाप के बाद अंतिम बैनामा होगा। हालांकि दो दिन पूर्व ज्योति अग्रवाल ने मीडिया से कहा था कि वह बाउंड्री बनवा रही हैं।
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बेच नहीं रहीं। अब बिक्री का इकरारनामा सामने आने के बाद रविवार को ज्योति अग्रवाल ने कहा कि कुछ हिस्सा बेचकर जो धन संग्रह होगा, उससे म्यूजियम बनवाएंगी। उधर, डीसीडीएफ के अध्यक्ष सुधीर सिंह ने बताया कि शुक्रवार को इलाहाबाद में जुटे देश के साहित्यकारों की ओर से सामूहिक हस्ताक्षर कर एक ज्ञापन मुख्यमंत्री को भेजा गया।
कहा गया कि विश्व प्रसिद्ध कवि केदारबाबू वर्ष 1935 से 2000 तक इसी मकान में रहे। देश के महान रचनाकारों का यहां आना-जाना रहा। 1972 में बांदा में आयोजित साहित्य सम्मेलन में भी यही घर केंद्र रहा। केदारबाबू के निजी संग्रह की लगभग 7 दशकों की दुर्लभ पत्र-पत्रिकाएं और हजारों पुस्तकेें यहीं रखी हुई हैं।
18 जून की शाम ढेर सारी निर्माण सामग्री इस मकान के बाहर इकट्ठी करके निर्माण शुरू करा दिया गया। साहित्यकारों ने प्रदेश सरकार से इस साहित्यिक धरोहर को संरक्षित करने की अपील की।
अपील करने वालों में ज्ञान पीठ से सम्मानित केदारनाथ सिंह (दिल्ली), ज्ञानेंद्र पति (वाराणसी), ए अरविंदाक्षन (कुलपति हिंदी विश्वविद्यालय), राजेंद्र कुमार (पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष, इलाहाबाद विश्वविद्यालय), हरिश्चंद्र पांडेय (इलाहाबाद), दूधनाथ सिंह, कुमार अंबुज व मदन कश्यप (भोपाल), अनामिका (दिल्ली), राजेश जोशी, प्रो.अली अहमद फात्मी (इलाहाबाद), प्रीति चौधरी (लखनऊ), संतोष चतुर्वेदी (इलाहाबाद), चंद्रकांत पाटिल (मुंबई), लीलाधर मंडलोई (महानिदेशक, दूरदर्शन), रघुवंश मणि (फैजाबाद) आदि शामिल हैं।
केदारबाबू की 15वीं पुण्यतिथि आज
चित्रकूट। जनकवि केदारनाथ अग्रवाल की 15वीं पुण्यतिथि पर केदार स्मृति शोध संस्थान और प्रगतिशील लेखक संघ 22 जून को राजकीय महिला डिग्री कालेज में संगोष्ठी आयोजित करेगा। इसमें किसान चेतना और केदारनाथ अग्रवाल विषय निर्धारित किया गया है। वरिष्ठ कवि स्वप्निल श्रीवास्तव (फैजाबाद) और चर्चित आलोचक डा. रघुवंश मणि इसमें शरीक होंगे। कवि डा. रामचंद्र सरस ने बताया कि आयोजन दो सत्रों में होगा। पहले सत्र में केदारबाबू की कविताओं को लेकर विचार-विमर्श होगा। दूसरे सत्र में कविता पाठ होगा।
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सिविल लाइन स्थित जनकवि केदार के खपरैलदारनुमा पुराने मकान में अभी भी उनकी यादें मौजूद हैं। हर साल उनकी जयंती और पुण्यतिथि यहीं मनाई जाती है। केदारबाबू की पुत्रवधू ज्योति अग्रवाल ने सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में 15 जून 2015 को आवास बेचने के लिए स्वराज कालोनी निवासी मंजुला सिंह को 56.64 हजार रुपये में बेचने का इकरारनामा किया।
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नौ लाख रुपये बयाने के तौर पर लिए गए हैं। 350 रुपये प्रति वर्ग फीट की दर से सौदा तय हुआ है। इकरारनामे में विक्रेता पुत्रवधू ने कहा कि बाउंड्री का निर्माण कराकर मकान के वास्तविक नाप के बाद अंतिम बैनामा होगा। हालांकि दो दिन पूर्व ज्योति अग्रवाल ने मीडिया से कहा था कि वह बाउंड्री बनवा रही हैं।
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बेच नहीं रहीं। अब बिक्री का इकरारनामा सामने आने के बाद रविवार को ज्योति अग्रवाल ने कहा कि कुछ हिस्सा बेचकर जो धन संग्रह होगा, उससे म्यूजियम बनवाएंगी। उधर, डीसीडीएफ के अध्यक्ष सुधीर सिंह ने बताया कि शुक्रवार को इलाहाबाद में जुटे देश के साहित्यकारों की ओर से सामूहिक हस्ताक्षर कर एक ज्ञापन मुख्यमंत्री को भेजा गया।
कहा गया कि विश्व प्रसिद्ध कवि केदारबाबू वर्ष 1935 से 2000 तक इसी मकान में रहे। देश के महान रचनाकारों का यहां आना-जाना रहा। 1972 में बांदा में आयोजित साहित्य सम्मेलन में भी यही घर केंद्र रहा। केदारबाबू के निजी संग्रह की लगभग 7 दशकों की दुर्लभ पत्र-पत्रिकाएं और हजारों पुस्तकेें यहीं रखी हुई हैं।
18 जून की शाम ढेर सारी निर्माण सामग्री इस मकान के बाहर इकट्ठी करके निर्माण शुरू करा दिया गया। साहित्यकारों ने प्रदेश सरकार से इस साहित्यिक धरोहर को संरक्षित करने की अपील की।
अपील करने वालों में ज्ञान पीठ से सम्मानित केदारनाथ सिंह (दिल्ली), ज्ञानेंद्र पति (वाराणसी), ए अरविंदाक्षन (कुलपति हिंदी विश्वविद्यालय), राजेंद्र कुमार (पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष, इलाहाबाद विश्वविद्यालय), हरिश्चंद्र पांडेय (इलाहाबाद), दूधनाथ सिंह, कुमार अंबुज व मदन कश्यप (भोपाल), अनामिका (दिल्ली), राजेश जोशी, प्रो.अली अहमद फात्मी (इलाहाबाद), प्रीति चौधरी (लखनऊ), संतोष चतुर्वेदी (इलाहाबाद), चंद्रकांत पाटिल (मुंबई), लीलाधर मंडलोई (महानिदेशक, दूरदर्शन), रघुवंश मणि (फैजाबाद) आदि शामिल हैं।
केदारबाबू की 15वीं पुण्यतिथि आज
चित्रकूट। जनकवि केदारनाथ अग्रवाल की 15वीं पुण्यतिथि पर केदार स्मृति शोध संस्थान और प्रगतिशील लेखक संघ 22 जून को राजकीय महिला डिग्री कालेज में संगोष्ठी आयोजित करेगा। इसमें किसान चेतना और केदारनाथ अग्रवाल विषय निर्धारित किया गया है। वरिष्ठ कवि स्वप्निल श्रीवास्तव (फैजाबाद) और चर्चित आलोचक डा. रघुवंश मणि इसमें शरीक होंगे। कवि डा. रामचंद्र सरस ने बताया कि आयोजन दो सत्रों में होगा। पहले सत्र में केदारबाबू की कविताओं को लेकर विचार-विमर्श होगा। दूसरे सत्र में कविता पाठ होगा।