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मंडल की 236 माइनरों की सफाई के लिए फिर करोड़ों का इंतजाम

Tue, 10 Nov 2020 11:48 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 10 Nov 2020 11:48 PM IST
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Crores again arranged for cleaning 236 Minors of Mandal
केन नदी में बना गंगऊ बांध। - फोटो : BANDA
बांदा। चित्रकूटधाम मंडल की नहरों में सफाई के नाम पर एक बार फिर कई करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी है। सिंचाई विभाग ने चारों जनपदों की 236 माइनरों की सफाई का लक्ष्य चालू वर्ष 2021 में तय किया है। मंडल मुख्यालय बांदा में 145 माइनर की सफाई पर 1.52 करोड़ रुपये खर्च होंगे। सिंचाई विभाग इसी माह यह काम पूरा करने का दावा कर रहा है जबकि कई नहरें अभी चलाई जा रही हैं।
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मंडल के चारों जनपदों में नहर और बड़ी संख्या में माइनर हैं। इनकी कुल लंबाई 982.663 किलोमीटर है। इनमें अवैध कटान और सिल्ट पर मलबा जमा होने पर छोर तक पानी नहीं पहुंच पाता। किसान आए दिन इसकी शिकायत करते हैं। सिंचाई विभाग लगभग हर साल नहरों की सफाई पर करोड़ों रुपये खर्च भी करता है। इस वर्ष भी रबी 1428 फसली (2020-21) में चारों जिलों की 236 माइनर की सफाई का लक्ष्य निर्धारित किया है।
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जनपद में 145 माइनरों की सफाई कराई जा रही है। अधिशासी अभियंता (केन नहर प्रखंड) केके पांडेय ने बताया कि 30 नवंबर तक सभी माइनरों की सिल्ट साफ करा दी जाएगी। लगभग 595 मजदूर लगाए गए हैं। इसके लिए शासन से एक करोड़ 52 लाख 80 हजार रुपये दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि फिलहाल नहर चल रही है। 14 नवंबर से यह बंद हो जाएगी। इसी के बाद काम शुरू होगा। सफाई कार्य के लिए टेंडर आवंटित कर लिए गए हैं। बांदा जनपद में कुल 965 किलोमीटर लंबी नहरें हैं।
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उधर, चित्रकूटधाम मंडल के सभी लगभग 13 बांधों में पानी के भंडार की स्थिति अच्छी नहीं है। पूरी बारिश के मौसम में कोई भी बांध पूरी क्षमता से लबरेज नहीं हो पाया। अधिकांश तो पूरी क्षमता से भी कम भर पाए हैं। बारिश का मौसम बीत जाने के बाद सिंचाई विभाग ने बांधों के गेट खड़े कर दिए हैं ताकि पानी का स्टॉक किया जा सके।
बांदा जनपद को पानी देने वाले गंगऊ वियर 19 फीसदी, रनगवां 39 फीसदी और बरियारपुर 29 फीसदी भर पाया है। चित्रकूट में ओहन बांध व बरुआ बांध 18-18 प्रतिशत, गुंता बांध 73 प्रतिशत और रसिन बांध 80 प्रतिशत भरे हैं।

महोबा में अर्जुन बांध 82 और चंद्रावल बांध 66 प्रतिशत भरा है। मझगवां बांध में 10 फीसदी और उर्मिल बांध 12 फीसदी भरे बताए गए हैं। इन बांधों में उपलब्ध पानी उपयोगी पानी की क्षमता की स्थिति भी गंभीर है। बांदा के सिंचाई विभाग ने गंगऊ और बरियारपुर बांधों के गेट खड़े कर दिए हैं। इन्हें 15 जून को गिरा दिया गया था। अब गेट खड़े करके पानी रोका जा रहा है।
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