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34 साल चले केस में आरोपी को तीन साल की कैद
Mon, 11 Mar 2019 11:44 PM IST
gaurav gaurav
बांदा, उत्तर प्रदेश
बांदा, उत्तर प्रदेश
Published by: gaurav gaurav
Updated Mon, 11 Mar 2019 11:44 PM IST
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चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय
- फोटो : file photo
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मात्र 16 बरस की नाबालिग उम्र में अंजाम दिए हत्या के जुर्म की सजा 50 बरस की उम्र में मिली। तकरीबन साढ़े 34 साल तक चले मुकदमें के बाद आरोपी को तीन साल की जेल और जुर्माने की सजा सुनाई गई है।
बबेरू कोतवाली क्षेत्र के बुढ़ौली गांव निवासी बाबूलाल यादव 26 अक्तूबर 1984 की शाम 5 बजे अपने चचेरे भाई झम्मन के साथ खेत से घर आ रहे थे। झम्मन बाबूलाल के पीछे चल रहा था। वह अपनी दो नली बंदूक लिए था। रास्ते में गांव के कल्लू उर्फ उग्रसेन पुत्र सूरजदीन ने उसे ललकारते हुए तमंचा से पीठ पर गोली मार दी और झम्मन की दोनली बंदूक छीनकर फरार हो गया। अस्पताल ले जाते समय झम्मन की रास्ते में मौत हो गई। बाबूलाल यादव की तहरीर पर पुलिस ने धारा 307, 394 आईपीसी के तहत रिपोर्ट दर्ज की।
विवेचना में धारा 302 और बढ़ा दी गई। पुलिस ने कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। विशेष न्यायाधीश (दस्यु प्रभावित क्षेत्र) न्यायालय में सुनवाई हुई। यहां से आरोपी को उम्रकैद की सजा हुई। उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने आरोपी को 16 वर्षीय किशोर मानते हुए मामले की पुन: गुण-दोष के आधार पर सुनवाई के आदेश दिए।
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इस पर प्रथम अपर जिला सत्र न्यायाधीश की अदालत में पुन: सुनवाई की गई। सोमवार को प्रथम अपर जिला सत्र न्यायाधीश साकेत बिहारी दीपक ने इस केस का फैसला सुनाते हुए कहा कि आरोपी की उम्र वर्तमान में 50 साल से अधिक हो गई है। इस दौरान उसका चाल-चलन भी ठीक रहा है। सोमवार को न्यायाधीश ने जुबेनाइल एक्ट की धारा-21 में कल्लू उर्फ उग्रसेन को तीन वर्ष की कैद की सजा सुनाई।
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बबेरू कोतवाली क्षेत्र के बुढ़ौली गांव निवासी बाबूलाल यादव 26 अक्तूबर 1984 की शाम 5 बजे अपने चचेरे भाई झम्मन के साथ खेत से घर आ रहे थे। झम्मन बाबूलाल के पीछे चल रहा था। वह अपनी दो नली बंदूक लिए था। रास्ते में गांव के कल्लू उर्फ उग्रसेन पुत्र सूरजदीन ने उसे ललकारते हुए तमंचा से पीठ पर गोली मार दी और झम्मन की दोनली बंदूक छीनकर फरार हो गया। अस्पताल ले जाते समय झम्मन की रास्ते में मौत हो गई। बाबूलाल यादव की तहरीर पर पुलिस ने धारा 307, 394 आईपीसी के तहत रिपोर्ट दर्ज की।
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विवेचना में धारा 302 और बढ़ा दी गई। पुलिस ने कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। विशेष न्यायाधीश (दस्यु प्रभावित क्षेत्र) न्यायालय में सुनवाई हुई। यहां से आरोपी को उम्रकैद की सजा हुई। उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने आरोपी को 16 वर्षीय किशोर मानते हुए मामले की पुन: गुण-दोष के आधार पर सुनवाई के आदेश दिए।
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इस पर प्रथम अपर जिला सत्र न्यायाधीश की अदालत में पुन: सुनवाई की गई। सोमवार को प्रथम अपर जिला सत्र न्यायाधीश साकेत बिहारी दीपक ने इस केस का फैसला सुनाते हुए कहा कि आरोपी की उम्र वर्तमान में 50 साल से अधिक हो गई है। इस दौरान उसका चाल-चलन भी ठीक रहा है। सोमवार को न्यायाधीश ने जुबेनाइल एक्ट की धारा-21 में कल्लू उर्फ उग्रसेन को तीन वर्ष की कैद की सजा सुनाई।