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हत्या में दो को उम्रकैद
ब्यूरो, अमर उजाला, बांदा
Updated Mon, 14 Nov 2016 08:11 PM IST
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बांदा। करीब 23 साल बाद सुनाए गए फैसले में अदालत ने दो हत्यारों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इन पर 15-15 हजार रुपये जुर्माना किया है। जुर्माना अदा न करने पर 15 माह की अतिरिक्त कैद काटनी होगी। इस दौरान एक अभियुक्त की मौत हो गई। पांच अन्य बरी हो गए।
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कमासिन थाना क्षेत्र के तिलौसा गांव निवासी दलित बंधना पुत्र गंगा प्रसाद का पुत्र सिकदार 3 अप्रैल 1993 की शाम कीर्तन सुनने घर से निकला था। तीन दिन तक वापस न लौटने पर थाने में गुमशुदगी की सूचना दर्ज कराई गई। 12 अप्रैल 1993 को दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा कि 10 अप्रैल को गांव के रामविशाल पुत्र दर्शन व राजकरन पुत्र कल्लू आदि ने सिकदार को जंगल की ओर ले जाते हुए देखा था।
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इनमें गांव का गुलाब सिंह पुत्र बेनी माधव, उत्तम सिंह पुत्र बच्ची सिंह, रंजीत सिंह व बड़कू पुत्रगण रामराज समेत चुकउवा, फूल सिंह, संतोष सिंह और कमासिन निवासी करन सिंह पुत्र दंगल सिंह शामिल थे। पुलिस ने रंजीत सिंह से पूछताछ में हत्याकांड का खुलासा किया। पता चला कि हत्या के बाद सिकदार को रंजीत सिंह के मवेशी बाड़े में दफन कर दिया गया। पुलिस ने गड्ढे से रंजीत की लाश बरामद की।
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विवेचना अधिकारी ने आरोपियों के विरुद्ध अपहरण, हत्या, सुबूत छिपाने और एससीएसटी एक्ट के तहत आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया। विशेष न्यायाधीश एससीएसटी एक्ट डीपीएन सिंह की अदालत में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी राघवेंद्र प्रताप सिंह सेंगर व सहायक शासकीय अधिवक्ता फेरन सिंह पाल ने आठ गवाह पेश किए।
सोमवार को अदालत ने रंजीत सिंह व चुकउवा को धारा 302 व एससीएसटी एक्ट में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। 10-10 हजार रुपये जुर्माना या एक-एक साल की अतिरिक्त कैद, धारा 201 में 5-5 साल की सजा व पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना की सजा दी।