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कारीगर का हथौड़ा ही बना जानलेवा हथियार
ब्यूरो अमर उजाला, बांदा
Updated Sun, 07 Aug 2016 11:30 PM IST
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पुलिस हिरासत में शिवबरन।
- फोटो : अमर उजाला
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बांदा। जसपुरा थाना क्षेत्र के शंकर पुरवा में कलियुगी पुत्र के हाथों मौत के घाट उतारा गया रामदास विश्वकर्मा अपने जमाने में सरौती बनाने का मशहूर कारीगर था। जिस बेटे ने उसका कत्ल किया, उसी की जमानत के लिए उसने अपने पांच पुत्रों से छिपाकर तीन बीघा जमीन बेच दी थी। उधर, पुलिस ने हत्यारोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
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मृतक रामदास मूलरूप से पैलानी कस्बे का रहने वाला था। बुंदेलखंड में सुपाड़ी खाने के शौकीनों के लिए पैलानी की सरौती मशहूर है। रामदास सरौती का कारीगर था। पैलानी और शंकरपुर में उसकी लुसहरी (कारखाना) है। इसके साथ वह कृषि संबंधी औजार भी बनाता था। लगभग चार किलो वजन के जिस घन (हथौड़ा) से वह लोहा पीटता था, वही हथौड़ा पुत्र ने उसके सिर पर मारकर जान ले ली।
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हत्यारे शिवबरन ने हथौड़े से ताबड़तोड़ वार कर माता-पिता के सिर के साथ हड्डियां भी चकनाचूर कर दीं। हत्यारे के भाई शिवशरण ने बताया कि वर्ष 2002 में हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा होने के बाद हाईकोर्ट में शिवबरन की जमानत के लिए पिता ने सभी पुत्रों से छिपाकर तीन बीघा जमीन बेच दी थी। कोई जमानतदार नहीं मिला तो खुद माता और पिता ने उसकी जमानत ली थी। 10 साल जेल में रहने के बाद शिवबरन 2012 में जमानत पर छूटा था।
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