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सरकारी आवास में एडीओ ने लगाई फांसी
अमर उजाला ब्यूरो , बांदा
Updated Sat, 20 Jan 2018 11:55 PM IST
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जांच पड़ताल करते डीएम महेंद्र बहादुर सिंह व एसपी शालिनी।
- फोटो : अमर उजाला
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कमासिन (बांदा)। ब्लाक में तैनात सहायक खंड विकास अधिकारी (एडीओ पंचायत) ने सरकारी आवास में फांसी लगाकर जान दे दी। डीएम और एसपी ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। आवास से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। उधर, पुत्रों ने समिति चुनाव व विकास कार्यों की जांच को लेकर हत्या की आशंका जताई है।
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मूल रूप से इलाहाबाद जिले के करछना थाना क्षेत्र के लच्छीपुर गांव निवासी एडीओ पंचायत लालमणि यादव (59) यहां 25 मई 2017 को तबादले पर आए थे। वे ब्लाक स्थित सरकारी आवास में अकेले रहते थे। वर्तमान में सहकारी समितियों के चुनाव में उन्हें यहां की सहकारी समिति का निर्वाचन अधिकारी (आरओ) बनाया गया था।
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शुक्रवार को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशन के बाद शनिवार को नामांकन दाखिल होना था। सुबह 9 बजे तक समिति कार्यालय न पहुंचने पर सचिव सत्यनारायण मौर्य ने खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) सरवरयार खां को सूचना दी। बीडीओ ने लिपिक ललित कुमार को एडीओ को बुलाने के लिए उनके आवास भेजा।
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ललित कुमार अपने साथ कालोनी में रहने वाले राजकुमार व सुरेंद्र को लेकर एडीओ के आवास पहुंचा तो दरवाजे अंदर से बंद थे। आवाज लगाने के बाद भी कोई जवाब नहीं मिला। तीनों ने धक्का मारा तो दरवाजे की अंदर से बंद कुंडी टूट गई। वहां सीलिंग फैन से प्लास्टिक की रस्सी से एडीओ का शव फंदे पर टंगा देखा। तीनों ने इसकी जानकारी बीडीओ को दी। बीडीओ की सूचना पर थानाध्यक्ष राकेश पांडेय तत्काल घटनास्थल आ गए।
उधर, अधिकारी की मौत की जानकारी मिलने पर डीएम महेंद्र बहादुर सिंह व एसपी शालिनी समेत अन्य अधिकारी भी पहुंच गए। डीएम व एसपी ने कमरे का निरीक्षण कर फोरेंसिस टीम बुलाई। शव को फंदे से उतारकर पोस्टमार्टम को भेजा गया। एडीओ की मौत से ब्लाक में अफरा-तफरी का माहौल रहा।
विकास कार्यों में अनियमितता की कर रहे थे जांच
कमासिन। एडीओ लालमणि यादव की मौत की खबर मिलने पर उनके पुत्रों ने पिता की हत्या की आशंका जताई है। आरोप लगाया कि विकास कार्यों की जांच में अनियमितता मिलने पर उनके ऊपर दबाव बनाया जा रहा था। उधर, आवास से कोई सुसाइड नोट न मिलने से मौत की वजह संदिग्ध बनी हुई है।
लच्छीपुर करछना निवासी मृतक के पुत्र पवन यादव, रामेश्वर यादव व नीरज यादव ने अपर पुलिस अधीक्षक लाल भरत कुमार पाल से बताया कि उनके पिता की हत्या की गई है और आत्महत्या का रुप देने के लिए शव फंदे पर टांगा गया है। इसके पहले उन्होंने खाना खाया था। कोई व्यक्ति आत्महत्या के पहले खाना नहीं खा सकता। पैर पलंग पर टिके थे और फांसी से मौत के कोई लक्षण नहीं दिखाई दिए।
आवास की चाहारदीवारी की ऊंचाई भी बहुत कम है। दरवाजे भी आसानी से खोले व बंद किए जा सकते हैं। उन्हें कई ग्राम पंचायतों में विकास कार्यो की जांच करने को मिली थी। 13 जनवरी के पूर्व एक ग्राम पंचायत में सीसी रोड की जगह खंड़जा लगा पाया गया था। जांच में उनके ऊपर दबाव बनाया जा रहा था। सहकारी समिति के चुनाव को लेकर भी उन्होंने आशंका जताई है।