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बुंदेलखंड में बच्चों के टीकाकरण में बांदा व झांसी फिसडडी
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बांदा। एक वर्ष तक के बच्चों के टीकाकरण में बुंदेलखंड के दो मंडल मुख्यालय बांदा व झांसी फिसड्डी साबित हुए। चित्रकूटधाम मंडल में बांदा तीसरे और मंडल मुख्यालय झांसी छठवें स्थान पर है। वहीं दो छोटे जनपद महोबा व चित्रकूट क्रमश: पहले व दूसरे नंबर पर रहे। अपर निदेशक (एडी) स्वास्थ्य ने मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को टीकाकरण व डाटा फीडिंग में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
राज्य प्रतिरक्षण अधिकारी अजय घई की जारी रिपोर्ट के हवाले से एडी डॉ.आरबी गौतम ने बताया कि फरवरी में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए एक वर्ष तक के बच्चों के टीकाकरण की उपलब्धि बेहद कम पाई गई है। कोरोना काल में शून्य से एक वर्ष तक के बच्चों के टीकाकरण में महोबा प्रदेश में चौथे व बुंदेलखंड में पहले स्थान पर रहा। यहां 23,245 के सापेक्ष 23,155 (99.70 फीसदी) बच्चों का टीकाकरण हुआ। उन्होंने सीएमओ डा. एमके सिन्हा की सराहना की। इसके अलावा चित्रकूट 88.37 प्रतिशत के साथ दूसरे व बांदा 82.91 फीसदी के साथ तीसरे पायदान पर रहा। ललितपुर (82.12 फीसदी) चौथे, हमीरपुर (72.20) पांचवें, झांसी (66.91) छठवें और जालौन (66.85 फीसदी) सातवें स्थान पर रहा।
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इनसेट
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टीका बचाते हैं रोग से बच्चों को
बांदा। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी/डिप्टी सीएमओ डा.एमसी पाल ने बताया कि बच्चे के जन्म के बाद उसे बीसीजी, ओपीवी-0 तथा हेपेटाइटिस बी का टीका लगाया जाता है। यह बच्चे को तपेदिक, पोलियो व हेपेटाइटिस जैसी खतरनाक बीमारी से बचाता है। इसी तरह शिशु के छह सप्ताह का होने पर ओपीवी-1, रोटावाइरस-1, एफआईपीवी-1 आरवीवी-1, पीसीवी-1 व पेंटा-1 की डोज दी जाती है। यह बच्चे को पोलियो, वायरल, डायरिया, डिप्थीरिया, टेटेनस, हेपेटाइटिस बी, इन्फ्लुएंजा आदि रोगों से सुरक्षित रखता है। 10 सप्ताह बाद ओपीवी-2, आरवीवी-2, पेंटा-2 तथा 14 सप्ताह बाद ओपीवी-3, रोटावायरस-3, एफआईपीवी-2, पेंटा-3 व पीसीवी-2 टीके लगते हैं। 9 से 11 माह में लगने वाला मजील्स रूबैला-1, पीसीवी बूस्टर, विटामिन ए घोल शिशु को रोगों से बचाती हैं। उन्होंने अभिभावकों से टीकाकरण में लापरवाही न बरतने को कहा।
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राज्य प्रतिरक्षण अधिकारी अजय घई की जारी रिपोर्ट के हवाले से एडी डॉ.आरबी गौतम ने बताया कि फरवरी में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए एक वर्ष तक के बच्चों के टीकाकरण की उपलब्धि बेहद कम पाई गई है। कोरोना काल में शून्य से एक वर्ष तक के बच्चों के टीकाकरण में महोबा प्रदेश में चौथे व बुंदेलखंड में पहले स्थान पर रहा। यहां 23,245 के सापेक्ष 23,155 (99.70 फीसदी) बच्चों का टीकाकरण हुआ। उन्होंने सीएमओ डा. एमके सिन्हा की सराहना की। इसके अलावा चित्रकूट 88.37 प्रतिशत के साथ दूसरे व बांदा 82.91 फीसदी के साथ तीसरे पायदान पर रहा। ललितपुर (82.12 फीसदी) चौथे, हमीरपुर (72.20) पांचवें, झांसी (66.91) छठवें और जालौन (66.85 फीसदी) सातवें स्थान पर रहा।
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टीका बचाते हैं रोग से बच्चों को
बांदा। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी/डिप्टी सीएमओ डा.एमसी पाल ने बताया कि बच्चे के जन्म के बाद उसे बीसीजी, ओपीवी-0 तथा हेपेटाइटिस बी का टीका लगाया जाता है। यह बच्चे को तपेदिक, पोलियो व हेपेटाइटिस जैसी खतरनाक बीमारी से बचाता है। इसी तरह शिशु के छह सप्ताह का होने पर ओपीवी-1, रोटावाइरस-1, एफआईपीवी-1 आरवीवी-1, पीसीवी-1 व पेंटा-1 की डोज दी जाती है। यह बच्चे को पोलियो, वायरल, डायरिया, डिप्थीरिया, टेटेनस, हेपेटाइटिस बी, इन्फ्लुएंजा आदि रोगों से सुरक्षित रखता है। 10 सप्ताह बाद ओपीवी-2, आरवीवी-2, पेंटा-2 तथा 14 सप्ताह बाद ओपीवी-3, रोटावायरस-3, एफआईपीवी-2, पेंटा-3 व पीसीवी-2 टीके लगते हैं। 9 से 11 माह में लगने वाला मजील्स रूबैला-1, पीसीवी बूस्टर, विटामिन ए घोल शिशु को रोगों से बचाती हैं। उन्होंने अभिभावकों से टीकाकरण में लापरवाही न बरतने को कहा।
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