{"_id":"626c1d281e45027e573727ae","slug":"couldn-t-see-shweta-hanging-banda-news-knp694017454","type":"story","status":"publish","title_hn":"श्वेता को फांसी लगाते देख नहीं सकता था","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
श्वेता को फांसी लगाते देख नहीं सकता था
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बांदा। अदालत में पेशी के बाद जेल जाते समय दीपक सिंह गौर ने मीडिया से कुछ बातचीत की। सवालों के जवाब दिए। उसने कहाकि उस पर हत्या का मुकदमा दबाव में लिखा गया है। मेरे माता-पिता, भाई और सारे लोग निर्दोष हैं। बड़ी बिटिया का दाखिला कराने हम दोनों लखनऊ गए। 15 दिन वहीं अपने भाई के घर रहे। पिता और माता जी गांव में रहते हैं। घटना के समय बिटिया को लेने स्कूल गया था। तभी वहां फोन पर फांसी की सूचना मिली।
दीपक ने कहा कि जिस वीडियो में हत्या की बात कही है उस वक्त नशे में था। यह 20 अप्रैल का वीडियो है। दीपक ने यह भी कहा कि श्वेता को वह फांसी लगाते देख नहीं सकता था। इसीलिए वहां से चला गया। हालांकि कुछ ही देर बाद अपनी बात से पलटते हुए कहा कि वह बेटी को लेने स्कूल गया था। तभी वहां फोन पर फांसी लगाने की सूचना मिली। न्यायालय निर्णय करेगा। मेरी बच्चियों को बरगला कर कुछ भी कहला दिया गया है। उनको समझ नहीं है।
विवेचना में हो सकती है धाराओं में तब्दीली
बांदा। जिला अधिवक्ता संघ के सचिव और फौजदारी के वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश कुमार सिंह की राय में श्वेता गौर मामले में दर्ज रिपोर्ट में लगाई गई हत्या की धारा विवेचना और अदालत में टिक नहीं पाएगी। शायद पुलिस ही अपनी विवेचना में इसे धारा 306 आईपीसी (आत्महत्या के लिए प्रेरित करना) में तब्दील कर दे। क्योंकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी हैंगिंग पुलिस बता रही है। और भी कई स्थलीय परिस्थितियां साक्ष्य बन सकती हैं। उन्होंने कहा कि यदि धारा 306 लगाई गई तो इसमें सात वर्ष की कैद का प्रावधान है। श्वेता की बेटियों द्वारा पिता व अन्य परिजनों पर लगाए गए आरोपों के बारे में अधिवक्ता ने कहा कि इसे दबाव में कहा जाना भी माना जा सकता है। विवेचना के दौरान पुलिस 161 सीआरपीसी के तहत बेटियों के बयान अदालत में कराएगी। वही मान्य होंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
दीपक ने कहा कि जिस वीडियो में हत्या की बात कही है उस वक्त नशे में था। यह 20 अप्रैल का वीडियो है। दीपक ने यह भी कहा कि श्वेता को वह फांसी लगाते देख नहीं सकता था। इसीलिए वहां से चला गया। हालांकि कुछ ही देर बाद अपनी बात से पलटते हुए कहा कि वह बेटी को लेने स्कूल गया था। तभी वहां फोन पर फांसी लगाने की सूचना मिली। न्यायालय निर्णय करेगा। मेरी बच्चियों को बरगला कर कुछ भी कहला दिया गया है। उनको समझ नहीं है।
विज्ञापन
विवेचना में हो सकती है धाराओं में तब्दीली
बांदा। जिला अधिवक्ता संघ के सचिव और फौजदारी के वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश कुमार सिंह की राय में श्वेता गौर मामले में दर्ज रिपोर्ट में लगाई गई हत्या की धारा विवेचना और अदालत में टिक नहीं पाएगी। शायद पुलिस ही अपनी विवेचना में इसे धारा 306 आईपीसी (आत्महत्या के लिए प्रेरित करना) में तब्दील कर दे। क्योंकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी हैंगिंग पुलिस बता रही है। और भी कई स्थलीय परिस्थितियां साक्ष्य बन सकती हैं। उन्होंने कहा कि यदि धारा 306 लगाई गई तो इसमें सात वर्ष की कैद का प्रावधान है। श्वेता की बेटियों द्वारा पिता व अन्य परिजनों पर लगाए गए आरोपों के बारे में अधिवक्ता ने कहा कि इसे दबाव में कहा जाना भी माना जा सकता है। विवेचना के दौरान पुलिस 161 सीआरपीसी के तहत बेटियों के बयान अदालत में कराएगी। वही मान्य होंगे।
विज्ञापन