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Banda News: बुखार और डायरिया से अस्पतालों में दवाओं की खपत हुई दोगुनी
Sat, 25 May 2024 10:35 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Sat, 25 May 2024 10:35 PM IST
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बांदा। जिला अस्पताल में इन दिनों डायरिया और बुखार से पीड़ित मरीज बढ़ रहे हैं। ओपीडी में प्रतिदिन एक हजार या 1200 मरीज अपना रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं। इनमें गंभीर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। ओपीडी बंद होने के बाद ट्राॅमा सेंटर इमरजेंसी में डायरिया और बुखार पीड़ित मरीजों की लाइन लग रही है।
सीएमएस डा. आरके गुप्ता का कहना है कि मरीज बढ़ने के साथ आईबी फ्लूड की खपत भी बढ़ गई है। बताया कि इन दिनों प्रतिदिन चार हजार पैरासिटामोल और अन्य टेबलेट, दो हजार डीएनएस, डी-फाइव और आरएल बोतलें, दो हजार पाउच ओआरएस और इतनी ही सिरिंज की खपत हो रही है। आईबी फ्लूड भंडार में तैनात जेएल राजपूत ने बताया कि पर्याप्त मात्रा में आईबी फ्लूड का स्टाॅक है। डिमांड के मुताबिक अस्पताल को दवाएं, इंजेक्शन, बोतलें और अन्य सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
48 घंटे भर्ती रहते हैं डायरिया और बुखार पीड़ित
बांदा। ट्राॅमा सेंटर में तैनात ईएमओ डाॅ. विनीत सचान ने बताया कि डायरिया से पीड़ित होकर आने वाले मरीज को कम से कम दो दिनों तक भर्ती रखा जाता है। इस दौरान जरूरत के मुताबिक बोतलें चढ़ाकर और दवा व इंजेक्शन देकर उसे स्वस्थ किया जाता है। इसके बाद उसकी हालत में सुधार होने पर ही उसे जाने दिया जाता है। यही स्थिति बुखार पीड़ित मरीज की भी होती है। उसको भी कम से कम दो दिनों तक भर्ती रखा जाता है, इसके बाद मरीज की हालत के मुताबिक उसे अस्पताल से छुट्टी दी जाती है।
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सीएमएस डा. आरके गुप्ता का कहना है कि मरीज बढ़ने के साथ आईबी फ्लूड की खपत भी बढ़ गई है। बताया कि इन दिनों प्रतिदिन चार हजार पैरासिटामोल और अन्य टेबलेट, दो हजार डीएनएस, डी-फाइव और आरएल बोतलें, दो हजार पाउच ओआरएस और इतनी ही सिरिंज की खपत हो रही है। आईबी फ्लूड भंडार में तैनात जेएल राजपूत ने बताया कि पर्याप्त मात्रा में आईबी फ्लूड का स्टाॅक है। डिमांड के मुताबिक अस्पताल को दवाएं, इंजेक्शन, बोतलें और अन्य सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
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48 घंटे भर्ती रहते हैं डायरिया और बुखार पीड़ित
बांदा। ट्राॅमा सेंटर में तैनात ईएमओ डाॅ. विनीत सचान ने बताया कि डायरिया से पीड़ित होकर आने वाले मरीज को कम से कम दो दिनों तक भर्ती रखा जाता है। इस दौरान जरूरत के मुताबिक बोतलें चढ़ाकर और दवा व इंजेक्शन देकर उसे स्वस्थ किया जाता है। इसके बाद उसकी हालत में सुधार होने पर ही उसे जाने दिया जाता है। यही स्थिति बुखार पीड़ित मरीज की भी होती है। उसको भी कम से कम दो दिनों तक भर्ती रखा जाता है, इसके बाद मरीज की हालत के मुताबिक उसे अस्पताल से छुट्टी दी जाती है।
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