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बुंदेलखंड में पानी कम नहीं, कमी है संरक्षण की
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Concern expressed over water crisis in mandal level public dialogue
- फोटो : BANDA
बांदा। चित्रकूटधाम मंडल में सरकारी नीतियों और योजनाओं के दावों के बावजूद पानी का संकट दूर न होने पर विभिन्न संगठनों के पुरोधाओं ने चिंता जताई। कहा कि बुंदेलखंड सहित पूरे मंडल में पानी का संकट गहराता जा रहा है। इसके उपाय भी सुझाए गए। खेत और मेड़ में पौधरोपण पर जोर दिया गया। कहा गया कि बुंदेलखंड में बारिश कम नहीं है। कमी है तो इस पानी को संरक्षित करने की।
गुरुवार को जिला पंचायत सभागार में आयोजित जन संवाद कार्यक्रम में मंडल के चारों जिलों में जल संचयन और जल संरक्षण पर चर्चा हुई। 43 ग्राम पंचायतों से आए 150 समाजसेवियों और ग्रामीणों ने इसमें भाग लिया। महिलाएं भी बड़ी संख्या में शामिल हुईं। स्वयंसेवी संगठन कासा (लखनऊ) के गौरव सोनकर ने मंडल में जल संकट के हालात बताने के साथ ही इसके उपायों पर भी चर्चा की। राज्य समन्वयक कमल कुमार ने कहा कि 22 से अधिक जनपदों में जन समुदायों के आजीविका सशक्तीकरण और जेंडर भेदभाव को दूर करने के लिए काम किया जा रहा है। अभियान संस्था निदेशक अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि इस क्षेत्र में गरीबी और बेबसी साफ नजर आ रही है। उन्होंने इसके लिए समाज को आगे आने का आह्वान किया। साथ ही मंडल में किए गए सर्वे के आंकड़े पेश किए।
जन संगठनों के लोगों ने अपने सुझाव साझा किए। डीएम अनुराग पटेल ने कहा कि बुंदेलखंड में वर्षा कम नहीं होती। लेकिन यहां पानी का संरक्षण और संचय न होने से बारिश का पानी नदी-नालों में बह जाता है। उन्होंने गहरार नाला, चंद्रावल और मटौंध तालाब में जल संरक्षण के कराए गए कार्यों को वीडियो के माध्यम से दिखाया।
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मनरेगा उपायुक्त रावेंद्र तिवारी, जिला पंचायत सदस्य सदाशिव ने भी संबोधित किया। जल योद्धा कहे जाने वाले उमाशंकर पांडेय ने मुख्य रूप से जल संकट की पूरी परिस्थितियों पर चर्चा की।
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गुरुवार को जिला पंचायत सभागार में आयोजित जन संवाद कार्यक्रम में मंडल के चारों जिलों में जल संचयन और जल संरक्षण पर चर्चा हुई। 43 ग्राम पंचायतों से आए 150 समाजसेवियों और ग्रामीणों ने इसमें भाग लिया। महिलाएं भी बड़ी संख्या में शामिल हुईं। स्वयंसेवी संगठन कासा (लखनऊ) के गौरव सोनकर ने मंडल में जल संकट के हालात बताने के साथ ही इसके उपायों पर भी चर्चा की। राज्य समन्वयक कमल कुमार ने कहा कि 22 से अधिक जनपदों में जन समुदायों के आजीविका सशक्तीकरण और जेंडर भेदभाव को दूर करने के लिए काम किया जा रहा है। अभियान संस्था निदेशक अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि इस क्षेत्र में गरीबी और बेबसी साफ नजर आ रही है। उन्होंने इसके लिए समाज को आगे आने का आह्वान किया। साथ ही मंडल में किए गए सर्वे के आंकड़े पेश किए।
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जन संगठनों के लोगों ने अपने सुझाव साझा किए। डीएम अनुराग पटेल ने कहा कि बुंदेलखंड में वर्षा कम नहीं होती। लेकिन यहां पानी का संरक्षण और संचय न होने से बारिश का पानी नदी-नालों में बह जाता है। उन्होंने गहरार नाला, चंद्रावल और मटौंध तालाब में जल संरक्षण के कराए गए कार्यों को वीडियो के माध्यम से दिखाया।
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मनरेगा उपायुक्त रावेंद्र तिवारी, जिला पंचायत सदस्य सदाशिव ने भी संबोधित किया। जल योद्धा कहे जाने वाले उमाशंकर पांडेय ने मुख्य रूप से जल संकट की पूरी परिस्थितियों पर चर्चा की।