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बसों की धुलाई के नाम पर कंपनी की कमाई
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बांदा डिपो स्थित धुलाई प्लांट में धोए जाने के लिए खड़ी बस। संवाद
- फोटो : BANDA
बांदा। चित्रकूटधाम मंडल परिवहन निगम में बसों की धुलाई से ज्यादा कंपनी की कमाई हो रही है। बसोें की संख्या से डेढ़ गुना दर्शाकर निगम को चूना लगाया जा रहा है। दो कंपनियों के पास धुलाई का ठेका है। मंडल में प्रति बस 71 से 75 रुपये धुलाई का पैसा दिया जाता है। लेकिन बसों की धुलाई मानक के मुताबिक नहीं हो रही। बस के अंदर गंदगी जस की तस बनी रहती है।
चित्रकूटधाम मंडल के चार डिपो में तीन में आटोमेटिक धुलाई प्लांट लगे हैं। कई कंपनियां अलग-अलग रेट पर ठेका लिए हुए हैं। बांदा डिपो में लखनऊ की कंपनी प्रति बस 71 रुपये और महोबा व राठ डिपो में बांदा की कंपनी प्रति बस 75 रुपये रेट पर ठेका लिए है।
उधर, हमीरपुर डिपो में स्थानीय स्तर पर धुलाई का ठेका 42 रुपये प्रति बस की दर से दे रखा गया है। यहां प्लांट नहीं है, जिससे यहां मैनुअल धुलाई होती है। 60 फीसदी बसों कीधुलाई का मानक है। बांदा में 125 बसों में 75, महोबा में 116 में 70, राठ में 88 में 53 व हमीरपुर में 63 में 38 बसों की नियमित धुलाई की जाना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। बसें कम धुल रही है पर दर्शाई ज्यादा जाती हैं।
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पानी की फुहार मारकर धुलाई की रस्म अदायगी
बांदा। बसों की धुलाई में सिर्फ औपचारिकता की जा रही है। चालकों का कहना है कि अंदर गंदगी पटी रहती है। बाहर से पानी की फुहार मारने की रस्म अदायगी कर दी जाती है। धुलाई पाउडर का भी इस्तेमाल नहीं होता। धुलाई में भीग गईं सीटें सुखाई नहीं जाती। भीगीं सीटों पर बैठने से यात्रियों के कपड़े खराब होते हैं। प्रचार सामग्री जस की तस लगी रहती है।
टेंडर शर्तों के मुताबिक, प्लांट में कंपनी के दो सुपरवाइजर व नौ कर्मचारी होने चाहिए। लेकिन महज तीन-तीन कर्मचारियों से काम चलाया जा रहा है। इस संबंध में चित्रकूटधाम मंडल के स्टेशन प्रबंधक केपी सिंह का कहना है कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी।
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चित्रकूटधाम मंडल के चार डिपो में तीन में आटोमेटिक धुलाई प्लांट लगे हैं। कई कंपनियां अलग-अलग रेट पर ठेका लिए हुए हैं। बांदा डिपो में लखनऊ की कंपनी प्रति बस 71 रुपये और महोबा व राठ डिपो में बांदा की कंपनी प्रति बस 75 रुपये रेट पर ठेका लिए है।
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उधर, हमीरपुर डिपो में स्थानीय स्तर पर धुलाई का ठेका 42 रुपये प्रति बस की दर से दे रखा गया है। यहां प्लांट नहीं है, जिससे यहां मैनुअल धुलाई होती है। 60 फीसदी बसों कीधुलाई का मानक है। बांदा में 125 बसों में 75, महोबा में 116 में 70, राठ में 88 में 53 व हमीरपुर में 63 में 38 बसों की नियमित धुलाई की जाना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। बसें कम धुल रही है पर दर्शाई ज्यादा जाती हैं।
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पानी की फुहार मारकर धुलाई की रस्म अदायगी
बांदा। बसों की धुलाई में सिर्फ औपचारिकता की जा रही है। चालकों का कहना है कि अंदर गंदगी पटी रहती है। बाहर से पानी की फुहार मारने की रस्म अदायगी कर दी जाती है। धुलाई पाउडर का भी इस्तेमाल नहीं होता। धुलाई में भीग गईं सीटें सुखाई नहीं जाती। भीगीं सीटों पर बैठने से यात्रियों के कपड़े खराब होते हैं। प्रचार सामग्री जस की तस लगी रहती है।
टेंडर शर्तों के मुताबिक, प्लांट में कंपनी के दो सुपरवाइजर व नौ कर्मचारी होने चाहिए। लेकिन महज तीन-तीन कर्मचारियों से काम चलाया जा रहा है। इस संबंध में चित्रकूटधाम मंडल के स्टेशन प्रबंधक केपी सिंह का कहना है कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी।