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Banda News: शहर की सड़कें बढ़ाएंगी दर्द गड्ढे भरने में और लगेगा वक्त
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बांदा। नगर में करीब छह वार्डों की 16 सड़कें गड्ढे में तब्दील हैं। इनमें एक-एक किलोमीटर में तीन-तीन सौ गड्ढे हैं। नगर पालिका ने दो माह पहले सड़कों के मरम्मतीकरण व निर्माण को करीब साढ़े तीन करोड़ की योजना तैयार की थी, लेकिन शिकायत पर डीएम ने टेंडर निरस्त कर दिए थे। तब से दोबारा टेंडर नहीं हो सके। इससे शहरवासियों को अभी हिचकोले खाने पड़ेंगे।
नगर पालिका बांदा 31 वार्डों में विभाजित है। यहां पर हर वर्ष बारिश के बाद सड़कों की पैचिंग, मरम्मत और निर्माण का कार्य पालिका कराती है।
इस बार बारिश खत्म होने के बाद सड़कों के गड्ढे ज्यों के त्यों हैं। शहर की कई ऐसी सड़कें हैं, जो पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी हैं। मुक्तिधाम रोड, कंचन पुरवा, कुशवाहा नगर, सर्वोदय नगर, खाईंपार में सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। यहां एक-एक किलोमीटर की सड़कों में दो-दो सौ गड्ढे हैं।
कुछ गड्ढे ऐसे हैं, जो दस से 15 फीट लंबे और चौड़े हैं। नगरवासियों को उम्मीद थी कि बारिश के बाद नगर की सभी सड़कें दुरुस्त होंगी, पर उनकी इन उम्मीदों पर जिम्मेदारों की लापरवाही ने पानी फेर दिया है।
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दरअसल नगर पालिका ने वार्डों की गड्ढे में तब्दील हो चुकी सड़कों की मरम्मत व निर्माण के लिए जुलाई में निविदा आमंत्रित की थीं। इसमें छह वार्डों की 16 सड़कें शामिल हैं। साढ़े तीन करोड़ रुपये का बजट था। इनमें करीब 100 किलोमीटर सड़क की मरम्मत कराई जानी है।
एक अधिवक्ता ने इसमें डीएम से शिकायत की थी कि जहां कार्य कराया जा चुका है, वहां दोबारा टेंडर निकाले जा रहे हैं। डीएम ने जांच कराई और टेंडर निरस्त कर दिए। इसमें जिला पंचायत के पास डिवाइडर बनाने और खराब सड़क भी शामिल थीं। नगर पालिका ने अभी दोबारा न तो इस्टीमेट बनाया और न ही टेंडर के लिए जिलाधिकारी के यहां फाइल भेजी। ऐसे में नगरवासियों को अब बारिश के बाद भी सड़कों में हिचकोले खाने पड़ेंगे।
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नगर पालिका बांदा 31 वार्डों में विभाजित है। यहां पर हर वर्ष बारिश के बाद सड़कों की पैचिंग, मरम्मत और निर्माण का कार्य पालिका कराती है।
इस बार बारिश खत्म होने के बाद सड़कों के गड्ढे ज्यों के त्यों हैं। शहर की कई ऐसी सड़कें हैं, जो पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी हैं। मुक्तिधाम रोड, कंचन पुरवा, कुशवाहा नगर, सर्वोदय नगर, खाईंपार में सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। यहां एक-एक किलोमीटर की सड़कों में दो-दो सौ गड्ढे हैं।
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कुछ गड्ढे ऐसे हैं, जो दस से 15 फीट लंबे और चौड़े हैं। नगरवासियों को उम्मीद थी कि बारिश के बाद नगर की सभी सड़कें दुरुस्त होंगी, पर उनकी इन उम्मीदों पर जिम्मेदारों की लापरवाही ने पानी फेर दिया है।
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दरअसल नगर पालिका ने वार्डों की गड्ढे में तब्दील हो चुकी सड़कों की मरम्मत व निर्माण के लिए जुलाई में निविदा आमंत्रित की थीं। इसमें छह वार्डों की 16 सड़कें शामिल हैं। साढ़े तीन करोड़ रुपये का बजट था। इनमें करीब 100 किलोमीटर सड़क की मरम्मत कराई जानी है।
एक अधिवक्ता ने इसमें डीएम से शिकायत की थी कि जहां कार्य कराया जा चुका है, वहां दोबारा टेंडर निकाले जा रहे हैं। डीएम ने जांच कराई और टेंडर निरस्त कर दिए। इसमें जिला पंचायत के पास डिवाइडर बनाने और खराब सड़क भी शामिल थीं। नगर पालिका ने अभी दोबारा न तो इस्टीमेट बनाया और न ही टेंडर के लिए जिलाधिकारी के यहां फाइल भेजी। ऐसे में नगरवासियों को अब बारिश के बाद भी सड़कों में हिचकोले खाने पड़ेंगे।