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बच्चों के टेढ़े पैर रेडीमेड प्लास्टर से कर रहे दुरुस्त

Tue, 21 Jan 2020 12:00 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 21 Jan 2020 12:00 AM IST
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Children's crooked legs are better than ready made plaster
शिशु शनि को पहनाए गए विशेष जूते। - फोटो : BANDA
बांदा। जिन बच्चों के पैर जन्म से मुड़े (क्लब फुट) हैं, उनके लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) वरदान साबित हो रहा है। ऐसे बच्चों के पैर प्लास्टर लगाकर ठीक किए जा रहे हैं। पिछले वर्ष इस योजना से 36 बच्चों में 21 के मुड़े पैर दुरुस्त किए गए। इस साल 31 बच्चों को इलाज के लिए चिह्नित किया है।
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कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. आरएन प्रसाद ने बताया कि मुड़े पैर से पीड़ित बच्चों को उच्चतम उपचार दिया जा रहा है। इलाज के दौरान बच्चों को हर सप्ताह लगाया जाने वाला रेडीमेड प्लास्टर जिला अस्पताल में मुफ्त लगाया जाता है। मिरेकल फीट संस्था बच्चों को नि:शुल्क विशेष जूते भी जिला अस्पताल में उपलब्ध करा रही है।
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पहले इन सुविधाओं के लिए लखनऊ या कानपुर रेफर किया जाता था। नोडल अधिकारी ने बताया कि इस वर्ष 2019-20 में अब तक विकृति वाले 31 बच्चे चिह्नित किए गए हैं। 17 बच्चों का प्लास्टर के जरिये इलाज किया गया है। चार की सर्जरी हुई है। 10 अन्य का इलाज चल रहा है। बच्चों में तीन हमीरपुर जिले के भी हैं, जबकि वर्ष 2018-19 में मुड़े पैर वाले 21 का उपचार किया गया।
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डॉ. प्रसाद ने बताया कि मुड़े पैर (क्लब फुट) जन्मजात विकृति है। इसमें बच्चों के पैर जन्म से ही अंदर की ओर मुड़े होते हैं जो स्पष्ट नजर आते हैं। ऐसे बच्चों का जितनी जल्दी इलाज शुरू हो, उतनी जल्दी ठीक किया जा सकता है। जन्म के 10 दिन बाद ही इलाज शुरू हो सकता है। बच्चे को 5 से 7 हफ्ते तक प्लास्टर लगाकर ठीक किया जा सकता है। इलाज में देरी हुई तो सर्जरी करनी पड़ती है। इलाज न कराने पर अक्सर बच्चे विकलांग हो जाते हैं।
हर बुधवार कमरा नंबर-9 में बैठते हैं विशेषज्ञ
नोडल अधिकारी आरएन प्रसाद ने बताया कि क्लब फुट के नि:शुल्क इलाज के लिए हर बुधवार को जिला अस्पताल के कमरा नंबर-9 में विशेषज्ञ चिकित्सक से मिला जा सकता है। इसके अलावा पीएचसी, सीएचसी या ब्लाक की आरबीएस टीम से भी संपर्क किया जा सकता है।
तीन माह के बच्चों को हुआ इलाज से लाभ
बांदा। महुआ ब्लाक के पनगरा गांव की अंजुम बताती हैं कि उनकी तीन माह की बेटी पलक का पैर मुड़ा था। प्राइवेट इलाज में काफी खर्च बताया गया, लेकिन उन्होंने बच्ची को आरबीएसके के तहत जिला अस्पताल में दिखाया और इलाज शुरू किया।

बच्ची को हर हफ्ते मुफ्त में प्लास्टर लगाया जा रहा है। यह प्रक्रिया 5 से 7 हफ्ते तक चलेगी। इसी तरह बबेरू क्षेत्र के पतवन गांव निवासी सुशील यादव के तीन माह के पुत्र सनी का भी जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। यहां उसे मुफ्त प्लास्टर चढ़ाया जाता है।

पलक के पैर में चढ़ा प्लास्टर।

पलक के पैर में चढ़ा प्लास्टर।- फोटो : BANDA

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