{"_id":"58b9b8704f1c1b9e64831565","slug":"cbi-flown-sleep","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीबीआई ने उड़ाई माफिया-माननीय-अधिकारियों की नींद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सीबीआई ने उड़ाई माफिया-माननीय-अधिकारियों की नींद
ब्यूरो अमर उजाला, बांदा
Updated Sat, 04 Mar 2017 12:09 AM IST
विज्ञापन
खनन
- फोटो : प्रतीकात्मक फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हाईकोर्ट के आदेश पर खनन घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने विधानसभा चुनाव का मतदान निपटते ही अपनी जांच में तेजी ला दी है। प्रारंभिक रिपोर्ट (पीई) में हमीरपुर समेत पांच जनपदों की जांच शुरू हो जाने से बुंदेलखंड के बालू कारोबारियों और माफिया के साथ अवैध खनन में मिलीभगत करने वाले अधिकारियों की नींद उड़ गई है। जांच के दायरे में कई ऐसे बालू कारोबारी भी आ सकते हैं जिन्होंने हाल ही में विधानसभा चुनाव लड़ा है। कुछ कारोबारी विधायक भी हैं।
विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले वर्ष जुलाई में अवैध बालू खनन की जांच के आदेश सीबीआई को दिए थे। यह पता करने को कहा था कि अवैध खनन में अधिकारियों की कितनी मिलीभगत है? जांच में बुंदेलखंड भी शामिल है। सीबीआई ने पिछले वर्ष अगस्त में बांदा खनिज कार्यालय में धावा बोलकर कई अभिलेख अपने कब्जे में ले लिए थे। इनमें बालू खदानों के पट्टों की सूची, भंडारण लाइसेंसों की सूची और रिक्त खदानों की सूची शामिल थी। तभी से बालू कारोबारियों और अधिकारियों में बेचैनी थी।
विज्ञापन
इसी बीच विधानसभा चुनाव घोषित हो गए। जांच भी थम गई। बुंदेलखंड में कई बालू कारोबारी विधानसभा चुनाव के मैदान में हैं। भाजपा, बसपा और कांग्रेस-सपा गठबंधन ने इन्हें बेहिचक टिकट भी दिया है। बांदा में भाजपा और गठबंधन से दो तथा हमीरपुर से बसपा से चुनाव लड़े प्रत्याशी बालू कारोबारी हैं।
विज्ञापन
हमीरपुर के एक बालू कारोबारी विधान परिषद सदस्य हैं। यह बात अलग है कि जनप्रतिनिधि चुने जाने के बाद पट्टे और ठेके दूसरे नामों में तब्दील हो गए। दो दिन पूर्व सीबीआई ने यूपी के खनन घोटाले की पीई दर्ज कर औपचारिक जांच शुरू कर दी है। जांच के दायरे में प्रशासन और खनन विभाग के बेनाम अधिकारी शामिल हैं। जांच में सीबीआई को इनके विरुद्ध ठोस सुबूत मिले तो इन पर मुकदमे दर्ज हो सकते हैं। अधिकारियों समेत बालू कारोबारियों पर कार्रवाई की तलवार लटकने लगी है।
5 अरब टैक्स देकर 10 गुना की चोरीः बुंदेलखंड में बालू और पत्थर खदानों का खासा भंडार है। लगभग 1311 खदानें हैं। प्रदेश सरकार को यहां से रॉयल्टी के रूप में हर वर्ष लगभग साढ़े पांच अरब रुपये राजस्व के रूप में मिलते हैं। जबकि इससे कई गुना ज्यादा कमाई बालू कारोबारी करते हैं। सिंडीकेट के नाम पर भी पिछले करीब एक दशक से खूब लूट मची है। यही वजह है कि किसी जमाने में कौड़ियों के मोल मिलने वाली बालू अब ‘लाल सोना’ के रूप में मशहूर होकर दसियों गुना मंहगी बिक रही है।
पट्टाधारक अपने पट्टे वाली भूमि के अलावा भी खनन कराते हैं। रवन्ने में भी खूब खेल होता है। नकली रवन्ने चलते हैं। एक रवन्ने पर कई-कई ट्रक बालू निकाली जाती है। 10 घन मीटर का रवन्ना देकर 30 घन मीटर बालू ट्रक में लोड कर ली जाती है।
बुंदेलखंड में बंद, एमपी में चालू है खननः हाईकोर्ट की रोक के बाद पिछले वर्ष से लगभग पूरे बुंदेलखंड में बालू का खनन बंद है। अलबत्ता ट्रैक्टरों और खच्चरों से कुछ खदानों पर पुलिस, प्रशासन और खनिज विभाग की मिलीभगत से अवैध खनन हो रहा है। उधर, बुंदेलखंड की सरहद से जुड़े मध्य प्रदेश में खदानें चालू हैं।
वहां से रोजाना लगभग एक हजार ट्रक बालू निकाली जा रही है। बालू के ट्रक बांदा जनपद की नरैनी क्षेत्र और बांदा शहर से होकर गुजर रहे हैं। मध्य प्रदेश में खनन कराने वालों में यूपी की सत्ता में रसूख रखने में लोग शामिल बताए गए हैं। ट्रक गुजरने वाले रूट के हर थाना, चौकी को ट्रकों से रोजाना खासी आमदनी हो रही है। ऐसे में पुलिस भी खामोश है।