{"_id":"60d36f278ebc3e29872010f0","slug":"campaign-to-save-buckwheat-intensified-banda-news-knp6360164134","type":"story","status":"publish","title_hn":"बकस्वाहा को बचाने की मुहिम और तेज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बकस्वाहा को बचाने की मुहिम और तेज
विज्ञापन
Campaign to save Buckwheat intensified
- फोटो : BANDA
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बांदा। बुंदेलखंड के बकस्वाहा जंगल को हीरा खदान में तब्दील करने से बचाने का नारा अब मध्य प्रदेश के महामहिम तक पहुंचेगा। पर्यावरण पैरोकारों के संगठन 27 जून को राजभवन पर प्रदर्शन करेंगे। उधर, 30 जून को एनजीटी इस पर फिर सुनवाई करेगी। हीरा खदान कंपनी भी अपनी सफाई पेश करेगी।
बुंदेलखंड के सीमावर्ती छतरपुर जिले में बकस्वाहा जंगल को हीरा खनन के लिए बिड़ला ग्रुप की एक्सल माइनिंग इंड्रस्ट्रीज कंपनी को 50 साल के पट्टे पर एमपी सरकार ने दे दिया है। इसका रकबा लगभग 382.13 हेक्टेयर है। जंगल के लगभग 2.15 लाख हरे-भरे पेड़-पौधे काटे जाएंगे। इतनी बड़ी हरियाली पर मंडराते खतरे से पर्यावरण प्रेमी और उनके संगठनों ने आंदोलन छेड़ दिया है। बकस्वाहा जंगल में कई प्रदर्शन हो चुके हैं। वेबिनार के जरिये देश भर के पर्यावरण प्रेमी विरोध जता रहे हैं।
27 जून को भोपाल स्थित राजभवन और अन्य जनपदों में जल, जंगल और जमीन बचाने के लिए सक्रिय संगठन प्रदर्शन करेंगे। हीरा खदान को दी गई अनुमति को निरस्त करने की मांग करेंगे। पर्यावरण पैरोकारों का दावा है कि इस प्रदर्शन के लिए लगभग सौ संगठन अपनी सहमति जता चुके हैं। शायद पहली बार मध्य प्रदेश के महामहिम राज्यपाल की ड्योढ़ी पर यह मुद्दा गूंजेगा।
विज्ञापन
पर्यावरणविदें का 26 को भोपाल में जमघट
बकस्वाहा बचाओ आंदोलन को और धार देने के लिए तदर्थ समिति 26 जून को भोपाल में बैठक करेगी। इस बैठक में मेघा पाटकर, डॉ. सुनीलम, अनिल श्रीवास्तव और बादल सरोज के भी शामिल होने की संभावना है। समिति राहुल भाई जी (सागर), पुष्पराज (गुना) और सचिन श्रीवास्तव (भोपाल) संगठनों और लोगों से लिखित अनुमति जुटा रहे हैं।
एनजीटी में 30 को दूसरी बार सुनवाई
बकस्वाहा जंगल मुद्दे पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) 30 जून को फिर सुनवाई करेगी। उज्ज्वल शर्मा व डॉ. पुष्पराज शर्मा ने 11 जून को याचिका दायर की थी। इसमें 17 जून को पहली सुनवाई हो चुकी है। याचिका में राज्य सरकार, पर्यावरण मंत्रालय और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ खदान का पट्टा लेने वाली कंपनी एक्सल माइनिंग इंड्रस्ट्रीज, मुंबई को भी पक्ष (पार्टी) बनाया गया है।
अपनी दलीलें देगी हीरा कंपनी
हीरा खदान के लिए हरा-भरा बकस्वाहा लेने वाली कंपनी एक्सल माइनिंग इंड्रस्ट्रीज 30 जून को एनजीटी में अपनी दलीलें पेश करेगी। हालांकि कंपनी के नुमाइंदे 17 जून को भी सुनवाई के दौरान बिना बुलाए एनजीटी पहुंच गए थे। अपना पक्ष दाखिल करने का अनुरोध किया था, लेकिन एनजीटी ने उस दिन इसे अस्वीकार करते हुए 30 जून की तारीख दी है।
28 को मानव श्रंखला से विरोध
बकस्वाहा जंगल मुद्दे पर 28 जून को मंडल मुख्यालय इंदौर (एमपी) में संभाग आयुक्त कार्यालय के सामने मानव श्रंखला बनाकर प्रदर्शन किया जाएगा। राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन दिया जाएगा। पूर्व महाधिवक्ता आनंद मोहन माथुर की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। पर्यावरण के पैरोकारों ने कहा कि बकस्वाहा मुद्दा स्थानीय नहीं राष्ट्रीय है।
विज्ञापन
बुंदेलखंड के सीमावर्ती छतरपुर जिले में बकस्वाहा जंगल को हीरा खनन के लिए बिड़ला ग्रुप की एक्सल माइनिंग इंड्रस्ट्रीज कंपनी को 50 साल के पट्टे पर एमपी सरकार ने दे दिया है। इसका रकबा लगभग 382.13 हेक्टेयर है। जंगल के लगभग 2.15 लाख हरे-भरे पेड़-पौधे काटे जाएंगे। इतनी बड़ी हरियाली पर मंडराते खतरे से पर्यावरण प्रेमी और उनके संगठनों ने आंदोलन छेड़ दिया है। बकस्वाहा जंगल में कई प्रदर्शन हो चुके हैं। वेबिनार के जरिये देश भर के पर्यावरण प्रेमी विरोध जता रहे हैं।
विज्ञापन
27 जून को भोपाल स्थित राजभवन और अन्य जनपदों में जल, जंगल और जमीन बचाने के लिए सक्रिय संगठन प्रदर्शन करेंगे। हीरा खदान को दी गई अनुमति को निरस्त करने की मांग करेंगे। पर्यावरण पैरोकारों का दावा है कि इस प्रदर्शन के लिए लगभग सौ संगठन अपनी सहमति जता चुके हैं। शायद पहली बार मध्य प्रदेश के महामहिम राज्यपाल की ड्योढ़ी पर यह मुद्दा गूंजेगा।
विज्ञापन
पर्यावरणविदें का 26 को भोपाल में जमघट
बकस्वाहा बचाओ आंदोलन को और धार देने के लिए तदर्थ समिति 26 जून को भोपाल में बैठक करेगी। इस बैठक में मेघा पाटकर, डॉ. सुनीलम, अनिल श्रीवास्तव और बादल सरोज के भी शामिल होने की संभावना है। समिति राहुल भाई जी (सागर), पुष्पराज (गुना) और सचिन श्रीवास्तव (भोपाल) संगठनों और लोगों से लिखित अनुमति जुटा रहे हैं।
एनजीटी में 30 को दूसरी बार सुनवाई
बकस्वाहा जंगल मुद्दे पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) 30 जून को फिर सुनवाई करेगी। उज्ज्वल शर्मा व डॉ. पुष्पराज शर्मा ने 11 जून को याचिका दायर की थी। इसमें 17 जून को पहली सुनवाई हो चुकी है। याचिका में राज्य सरकार, पर्यावरण मंत्रालय और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ खदान का पट्टा लेने वाली कंपनी एक्सल माइनिंग इंड्रस्ट्रीज, मुंबई को भी पक्ष (पार्टी) बनाया गया है।
अपनी दलीलें देगी हीरा कंपनी
हीरा खदान के लिए हरा-भरा बकस्वाहा लेने वाली कंपनी एक्सल माइनिंग इंड्रस्ट्रीज 30 जून को एनजीटी में अपनी दलीलें पेश करेगी। हालांकि कंपनी के नुमाइंदे 17 जून को भी सुनवाई के दौरान बिना बुलाए एनजीटी पहुंच गए थे। अपना पक्ष दाखिल करने का अनुरोध किया था, लेकिन एनजीटी ने उस दिन इसे अस्वीकार करते हुए 30 जून की तारीख दी है।
28 को मानव श्रंखला से विरोध
बकस्वाहा जंगल मुद्दे पर 28 जून को मंडल मुख्यालय इंदौर (एमपी) में संभाग आयुक्त कार्यालय के सामने मानव श्रंखला बनाकर प्रदर्शन किया जाएगा। राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन दिया जाएगा। पूर्व महाधिवक्ता आनंद मोहन माथुर की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। पर्यावरण के पैरोकारों ने कहा कि बकस्वाहा मुद्दा स्थानीय नहीं राष्ट्रीय है।