बूथवार गिनती से बढ़ सकती है खुन्नस
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इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से मतदान की व्यवस्था लागू होने से पहले जब मतपत्रों के जरिए लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मतदान होता था तब निर्वाचन आयोग ने यह व्यवस्था की थी कि मतपत्रों की गिनती बूथवार न हो। ताकि प्रत्याशियों को यह पता न चल सके कि किस गांव या वार्ड से उन्हें कितने वोट मिले हैं ? वरना वोटों की राजनीति सिर चढ़कर बोलती है।
जहां से वोट नहीं मिले या कम मिले, जीता प्रत्याशी वहां तवज्जो नहीं देता। मतपत्रों को मिलाकर गिनने की व्यवस्था सभी ने पसंद की थी लेकिन अब गांव की गर्वमेंट यानी पंचायत चुनाव में फिर कई दशक पुरानी व्यवस्था दोहराई गई है। मतपत्रों की गिनती बूथवार कराई गई है। इससे हर प्रत्याशी को पता चल रहा है कि किस गांव या वार्ड से उसे कितने वोट मिले हैं ? वोटों की यह पोल खुलना उचित नहीं है। नतीजों के बाद गांवों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। जिन गांवों या बूथों से विजयी प्रत्याशियों को वोटों की बौछार हुई है वहां विकास कार्य आदि के लिए उनका रुझान ज्यादा रहेगा। शायद उन गांवों को सबक भी सिखा सकते हैं जहां से वोट नहीं मिले।