{"_id":"68f14e18ebb187b3010c35db","slug":"bundelkhands-soil-has-potential-just-guidance-is-needed-banda-news-c-212-1-bnd1018-134793-2025-10-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Banda News: बुंदेलखंड की मिट्टी में क्षमता है, बस मार्गदर्शन की जरूरत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Banda News: बुंदेलखंड की मिट्टी में क्षमता है, बस मार्गदर्शन की जरूरत
विज्ञापन
फोटो- 03 विश्वविद्यालय परिसर में आर्ट गैलरी का अवलोकन करती राज्यपाल आनंदीबेन पटेल। संवाद
बांदा। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि बुंदेलखंड क्षेत्र में कृषि की अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें दिशा देने की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय और युवाओं की है। यदि किसान आधुनिक तकनीक और परंपरागत कृषि ज्ञान को मिलाकर कार्य करें तो बुंदेलखंड आत्मनिर्भर कृषि क्षेत्र का एक आदर्श उदाहरण बन सकता है।
राज्यपाल ने कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में आयोजित दीक्षा समारोह में कहा कि यह क्षेत्र प्राकृतिक संपदाओं से समृद्ध है, बस आवश्यकता है वैज्ञानिक सोच और आधुनिक पद्धतियों से खेती को नई दिशा देने की। बुंदेलखंड के किसानों को वर्षा जल संरक्षण, गो आधारित खेती, जैविक कृषि और फसल विविधीकरण की ओर बढ़ना चाहिए। विश्वविद्यालय से अपेक्षा वह किसानों तक नई तकनीक, प्रयोगशालाओं के शोध और उन्नत बीजों की जानकारी पहुंचाएं, ताकि खेती को लाभकारी बनाया जा सके।
यदि किसान जल, मिट्टी और ऊर्जा संसाधनों का संतुलित उपयोग करें तो यह क्षेत्र न केवल आत्मनिर्भर बनेगा बल्कि पूरे देश-प्रदेश के लिए कृषि विकास का मॉडल साबित होगा। उन्होंने छात्रों से भी अपील की, वे डिग्री को केवल प्रमाणपत्र न समझें, बल्कि इसे कृषि क्रांति में अपनी भूमिका निभाने का दायित्व मानें। बुंदेलखंड की मिट्टी में क्षमता है, बस उसे सही मार्गदर्शन और नवाचार की जरूरत है।
विज्ञापन
विज्ञापन
राज्यपाल ने कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में आयोजित दीक्षा समारोह में कहा कि यह क्षेत्र प्राकृतिक संपदाओं से समृद्ध है, बस आवश्यकता है वैज्ञानिक सोच और आधुनिक पद्धतियों से खेती को नई दिशा देने की। बुंदेलखंड के किसानों को वर्षा जल संरक्षण, गो आधारित खेती, जैविक कृषि और फसल विविधीकरण की ओर बढ़ना चाहिए। विश्वविद्यालय से अपेक्षा वह किसानों तक नई तकनीक, प्रयोगशालाओं के शोध और उन्नत बीजों की जानकारी पहुंचाएं, ताकि खेती को लाभकारी बनाया जा सके।
विज्ञापन
यदि किसान जल, मिट्टी और ऊर्जा संसाधनों का संतुलित उपयोग करें तो यह क्षेत्र न केवल आत्मनिर्भर बनेगा बल्कि पूरे देश-प्रदेश के लिए कृषि विकास का मॉडल साबित होगा। उन्होंने छात्रों से भी अपील की, वे डिग्री को केवल प्रमाणपत्र न समझें, बल्कि इसे कृषि क्रांति में अपनी भूमिका निभाने का दायित्व मानें। बुंदेलखंड की मिट्टी में क्षमता है, बस उसे सही मार्गदर्शन और नवाचार की जरूरत है।
विज्ञापन