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Banda News: बुंदेलखंड को मिल सकती है अनुकूल धान की नई किस्म

Mon, 19 Oct 2026 12:36 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा Updated Mon, 19 Oct 2026 12:36 AM IST
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Bundelkhand may get a new, well-suited variety of paddy
फोटो- 29-कृषि विश्वविद्यालय में धान की फसल अनुसंधान कार्यों का जायजा लेता वैज्ञानिकों का दल। स्
बांदा। बुंदेलखंड की जलवायु और कृषि परिस्थितियों के अनुकूल धान की नई किस्में विकसित करने की दिशा में कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में अनुसंधान किया जा रहा है।
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इसी क्रम में अंतरराष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान (आईआरआरआई), फिलीपींस और इसके दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (आईएसएआरसी), वाराणसी के वैज्ञानिकों ने विश्वविद्यालय का भ्रमण किया। उन्होंने धान की जल्द परिपक्व होने वाली किस्मों के विकास और सीधी बोआई प्रणाली (डीएसआर) से जुड़े अनुसंधान कार्यों का जायजा लिया।
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इस दौरान विश्वविद्यालय के अनुसंधान प्रक्षेत्र में 350 से अधिक धान जर्मप्लाज्म और उन्नत प्रजनन लाइनों का मूल्यांकन किया गया। भ्रमण के दौरान आईआरआरआई, फिलीपींस के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शलभ दीक्षित और आईआरआरआई के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र, वाराणसी के वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कबड़े ने अनुसंधान प्रक्षेत्र का निरीक्षण किया।
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वैज्ञानिकों ने विभिन्न धान जर्मप्लाज्म और उन्नत प्रजनन लाइनों की वृद्धि, शीघ्र परिपक्वता, उपज क्षमता तथा सीधी बोआई प्रणाली के तहत उनकी उपयुक्तता का आकलन किया। इन विशेषताओं के आधार पर उन्होंने बुंदेलखंड क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुकूल धान की उपयोगी किस्में विकसित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की।
विश्वविद्यालय की ओर से क्षेत्र की कृषि आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए धान की सीधी बोआई प्रणाली को प्रोत्साहित करने और इसके अनुकूल किस्मों के विकास के लिए अनुसंधान एवं प्रजनन कार्यक्रमों को सुदृढ़ किया जा रहा है। इस तकनीक में धान की पौध तैयार करके खेत में रोपाई करने के बजाय सीधे खेत में बीज बोया जाता है।
उपयुक्त परिस्थितियों और उचित प्रबंधन के तहत यह तकनीक पानी, श्रम और उत्पादन लागत की बचत में सहायक हो सकती है। जल संसाधनों की चुनौतियों से जूझ रहे बुंदेलखंड जैसे क्षेत्र में जल्द परिपक्व होने वाली धान की किस्मों का विकास विशेष महत्व रखता है। इससे क्षेत्र की कृषि परिस्थितियों के अनुरूप फसल उत्पादन की संभावनाओं को बढ़ावा मिल सकता है।
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विद्यार्थियों से भी किया संवाद
भ्रमण के दौरान वैज्ञानिकों ने विद्यार्थियों से संवाद भी किया। उन्होंने उन्नत धान किस्मों के विकास, आधुनिक पादप प्रजनन तकनीकों और किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप फसल सुधार से संबंधित जानकारी साझा की।
इस अवसर पर डॉ. प्रमोद कबड़े ने स्पीड ब्रीडिंग तकनीक के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि नियंत्रित वातावरण और अनुकूलित प्रकाश व्यवस्था के माध्यम से पौधों की पीढ़ियों को अपेक्षाकृत कम समय में आगे बढ़ाया जा सकता है। इससे नई किस्मों के विकास और उनके चयन की प्रक्रिया को गति देने में मदद मिलती है।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के निदेशक अनुसंधान डॉ. जगन्नाथ पाठक, कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. जीएस पवार और आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. मुकुल कुमार उपस्थित रहे। परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. एसके सिंह तथा सह-प्रधान अन्वेषक डॉ. धीरेंद्र कुमार सिंह और डॉ. अमित कुमार यादव ने भी अनुसंधान गतिविधियों में सहभागिता की।
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