फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Banda News ›   Bundeli talents have brought laurels to the national level

बुंदेली प्रतिभाओं ने राष्ट्रीय स्तर पर किया है नाम रोशन

Fri, 28 Aug 2020 11:46 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 28 Aug 2020 11:46 PM IST
विज्ञापन
Bundeli talents have brought laurels to the national level
Bundeli talents have brought laurels to the national level - फोटो : BANDA
बांदा। बुंदेलखंड में खेल सुविधाएं और प्रतिभाओं को परखने की हमेशा कमी रही, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यहां खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है। ग्राम स्तर पर खेले जाने वाले कबड्डी के अलावा खाली खेतों में क्रिकेट खेलते अक्सर ग्रामीण बालक देखे जा सकते हैं।
विज्ञापन

खेतों में खेलकर भी कई खिलाड़ियों ने प्रतिभा दिखाई है। चित्रकूटधाम मंडल मुख्यालय बांदा में मात्र एक स्पोर्ट्स स्टेडियम है। यह वालीबाल के लिए है। हालांकि अन्य खेल कबड्डी, हॉकी, क्रिकेट, बैडमिंटन, तैराकी आदि के भी प्रशिक्षण दिए जाते हैं। पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी और उनके भाई हसनुद्दीन सिद्दीकी वालीबाल में राष्ट्रीय खिलाड़ी रहे हैं।
विज्ञापन

बांदा के ही राघवेंद्र कुमार और आलोक भट्ट हॉकी के अच्छे खिलाड़ी रहे हैं। इसके अलावा इसमें इसी वर्ष आयोजित ‘खेलो इंडिया राष्ट्रीय वॉलीबाल’ में बांदा छात्रावास के दो खिलाड़ी भी हैं। दोनों किसान के बेटे हैं। गुवाहाटी (असम) में जनवरी में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में छात्रावास के हर्ष फोगाट ने अंडर-17 में गोल्ड मेडल जीता था। छात्रावास के ही एक और खिलाड़ी साहिल खां ने अंडर-19 में नेशनल स्तर पर चौथी रैंक पाई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

बांदा। जिला क्रिकेट एसोसिएशन सचिव और वरिष्ठ क्रिकेट खिलाड़ी वासिफ जमां खां का कहना है कि बुंदेलखंड के ग्रामीण बच्चों में खेल की गजब की प्रतिभा है। बशर्ते उसे पहचान और परख कर मौका दिया जाए।
उनका कहना है कि शहर से कहीं ज्यादा ग्रामीण क्षेत्रों के बालक-बालिकाओं में खेलों में दमखम दिखाने का जज्बा है, लेकिन आर्थिक कमजोरी से प्रतिभाएं आगे नहीं बढ़ पातीं। उन्हें सरकारी या गैर सरकारी प्रोत्साहन या मार्गदर्शन भी नहीं मिल रहा है। वे कहते हैं कि खेल निदेशालय प्रशिक्षण में ध्यान नहीं दे रहा। ज्यादातर प्रशिक्षण कागजी चल रहे हैं।
बांदा। अपने जमाने में फुटबाल में पूरे बुंदेलखंड में शोहरत का परचम लहराने वाले पूर्व चैंपियन श्रीकृष्ण चौरसिया उर्फ लल्ला भइया का कहना है कि खेल भारत की संस्कृति में रचा-बसा है। अब तो खेल से कॅरियर भी बनता है। कई खिलाड़ियों को नौकरी भी मिली है।
उन्होंने अफसोस जताया कि नई पीढ़ी में ज्यादातर बालक-बालिकाएं और उनके अभिभावकों का खेलों के प्रति रुझान नहीं है। दूसरी बात यह है कि कुछ खेल काफी महंगे भी हैं। सरकार यदि बुंदेलखंड के प़्रतिभाशाली बालक-बालिकाओं को बेहतर प्लेटफार्म उपलब्ध कराए तो शायद यहां मेडल के ढेर लग जाएं।
कोरोना संक्रमण के चलते मंडल मुख्यालय का जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम बंद है। यहां सभी तरह के खेल और प्रशिक्षण बंद हैं। उप जिला क्रीड़ाधिकारी शैलेंद्र कुशवाहा ने बताया कि क्रिकेट और हॉकी के प्रशिक्षकों की संविदा अप्रैल में समाप्त हो चुकी है।

इसके पहले यहां वॉलीबाल, क्रिकेट, हाकी और बैडमिंटन का प्रशिक्षण दिया जा रहा था। उन्होंने बताया कि स्पोर्ट्स हॉस्टल के वालीबाल छात्रों का एक व्हाट्सअप ग्रुप बनाकर 11 छात्रों को टिप्स दिए जा रहे हैं। स्थानीय खिलाड़ियों को फोन के जरिये उन्हें उनकी घर की छत पर प्रैक्टिस के दौरान टिप्स दिए जाते हैं।

Bundeli talents have brought laurels to the national level

Bundeli talents have brought laurels to the national level- फोटो : BANDA

Bundeli talents have brought laurels to the national level

Bundeli talents have brought laurels to the national level- फोटो : BANDA

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed