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बुंदेलखंड में औसत आय घटी, प्रदेश से 2549 रूपये कम
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बांदा। सरकारी दावों के विपरीत बुंदेलखंडी आर्थिक तंगहाली की ओर बढ़ते दिखाई पड़ रहे हैं। वैसे भी सरकारी मशीनरी बुंदेलखंड के बाशिंदों की आर्थिक दशा सुधारने के लिए तमाम योजनाओं का ढिंढोरा पीट रही है, लेकिन यहां के लोगों की औसत आमदनी लगातार घट ही रही है। पिछले दो वर्ष के सरकारी आंकडे़े इसके गवाह हैं। आंकड़ोें से तो यही दिखाई पड़ रहा है कि प्रदेश के अन्य जिलों के मुकाबले यहां के लोग आर्थिक तंगहाली की तरफ ही बढ़ रहे हैं। बुंदेलखंड के लोगों की औसत आय प्रदेश के औसत से 2,549 रुपये कम है। प्रदेश की औसत आय जहां 47,062 रुपये है, वहीं बुंदेलखंड में मात्र 44,513 रुपये है।
इससे तो यही कहा जा सकता है कि मर्ज बढ़ता गया, ज्यों ज्यों दवा की। बडे़ उद्योगों और कारोबार से कोसों दूर बुंदेलखंड को मुद्दा बनाकर समय-समय पर हरेक प्रमुख सियासी दल ने यहां की लोकसभा, विधानसभा और विधान परिषद सीटों पर अपना परचम लहराया। इनमें कांग्रेस, बसपा, सपा और भाजपा आदि पार्टियां शामिल हैं। मौजूदा समय में पूरे बुंदेलखंड सत्तारूढ़ दल भाजपामय है। यहां की सभी 19 विधानसभा और चारों लोकसभा सीटों पर भाजपा के ही विधायक और सांसद हैं, लेकिन इसके बाद भी बुंदेलखंड की तस्वीर और बुंदेलियों की तकदीर नहीं बदल रही। पिछले दो साल में यहां के लोगों की औसत आमदनी में गिरावट आई है। प्रदेश के अर्थ एवं संख्या विभाग के ताजा आंकडे़ इसके गवाह हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2011-12 में प्रदेश में प्रति व्यक्ति औसत आय 32,002 रुपये थी। वर्ष 2013-14 में बढ़कर 40,306 रुपये, वर्ष 2014-15 में 43,861 रुपये और वर्ष 2016-17 में 46,299 रुपये और बीते वर्ष 2017-18 में बढ़कर 55,456 रुपये हो गई।
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उधर, बुंदेलखंड की बदहाली कुछ तस्वीर अलग ही है। बुंदेलखंड के बाबत अर्थ एवं संख्या विभाग के आंकडे़ बताते हैं कि यहां वर्ष 2014-15 में प्रति व्यक्ति औसत आय 45,391 रुपये थी। यह वर्ष 2015-16 में घटकर 44,513 रुपये हो गई, यानी बुंदेलियों की आय में 874 रुपये की कमी आई। हालांकि, इसके पूर्व वर्ष 2011-12 से लेकर वर्ष 2014-15 तक बुंदेलखंड में प्रति व्यक्ति की औसत आय बढ़ी थी। ये सभी आंकडे़ प्रदेश के अर्थ एवं संख्या प्रभाग, राज्य नियोजन संस्थान द्वारा वर्ष 2018 में जारी हुए हैं।
बांदा में सबसे कम आय, महोबा अव्वल
बुंदेलखंड के सातों जिलों में प्रति व्यक्ति सबसे कम आय बांदा की है, जो कि तीन वर्षों में घटी है। वर्ष 2011-12 में यहां औसत आय 24,073 रुपये थी। वर्ष 2013-14 में बढ़कर 29,241 रुपये हो गई थी। वर्ष 2014-15 में और बढ़कर 32,793 रुपये प्रति व्यक्ति हो गई थी। इसके बाद 2015-16 में यह घटकर 26,394 रुपये हो गई। यह सातों जिलों से सबसे कम है। दूसरी तरफ महोबा में हर साल औसत आय बढ़ रही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2011-12 में यहां औसत आय 40,439 रुपये, वर्ष 2013-14 में 50,390 रुपये, वर्ष 2014-15 में 55,472 रुपये और वर्ष 2015-16 में 59,425 रुपये हो गई।
बुंदेलखंड में चार वर्षों में प्रति व्यक्ति की औसत आय
जनपद 2011-12 2013-14 2014-15 2015-16
बांदा 24,073 29,241 32,793 26,394
चित्रकूट 41,486 42,954 39,445 35,491
हमीरपुर 31,901 39,539 40,073 41,823
महोबा 40,439 50,390 55,472 59,425
जालौन 34,068 34,817 46,607 48,131
झांसी 38,433 45,502 60,007 59,014
ललितपुर 32,555 31,072 43,313 41,318
बुंदेलखंड 34,707 39,073 45,391 44,513
पड़ोसी जिलों की औसत आय---
जनपद 2011-12 2013-14 2014-15 2015-16
कानपुर 42,104 44,940 46,795 44,750
फतेहपुर 25,798 29,513 27,499 31,486
औरैया 26,192 22,350 21,420 24,310
इटावा 30,275 31,767 32,186 36,353
कन्नौज 20,826 22,252 24,368 28,564
उन्नाव 25,692 29,258 27,074 30,782
प्रयागराज 35,788 37,332 40,823 42,359
‘पहले से काफी सुधार हुआ है। चूंकि जनसंख्या बढ़ रही है और प्रदेश के अन्य इलाकों की अपेक्षा बुंदेलखंड में उद्योग और रोजगार कम है। इसके अलावा इन्वेस्टमेंट भी कम है, फिर भी धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।
एसएन त्रिपाठी, उपनिदेशक, अर्थ एवं संख्या विभाग, चित्रकूटधाम मंडल
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इससे तो यही कहा जा सकता है कि मर्ज बढ़ता गया, ज्यों ज्यों दवा की। बडे़ उद्योगों और कारोबार से कोसों दूर बुंदेलखंड को मुद्दा बनाकर समय-समय पर हरेक प्रमुख सियासी दल ने यहां की लोकसभा, विधानसभा और विधान परिषद सीटों पर अपना परचम लहराया। इनमें कांग्रेस, बसपा, सपा और भाजपा आदि पार्टियां शामिल हैं। मौजूदा समय में पूरे बुंदेलखंड सत्तारूढ़ दल भाजपामय है। यहां की सभी 19 विधानसभा और चारों लोकसभा सीटों पर भाजपा के ही विधायक और सांसद हैं, लेकिन इसके बाद भी बुंदेलखंड की तस्वीर और बुंदेलियों की तकदीर नहीं बदल रही। पिछले दो साल में यहां के लोगों की औसत आमदनी में गिरावट आई है। प्रदेश के अर्थ एवं संख्या विभाग के ताजा आंकडे़ इसके गवाह हैं।
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आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2011-12 में प्रदेश में प्रति व्यक्ति औसत आय 32,002 रुपये थी। वर्ष 2013-14 में बढ़कर 40,306 रुपये, वर्ष 2014-15 में 43,861 रुपये और वर्ष 2016-17 में 46,299 रुपये और बीते वर्ष 2017-18 में बढ़कर 55,456 रुपये हो गई।
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उधर, बुंदेलखंड की बदहाली कुछ तस्वीर अलग ही है। बुंदेलखंड के बाबत अर्थ एवं संख्या विभाग के आंकडे़ बताते हैं कि यहां वर्ष 2014-15 में प्रति व्यक्ति औसत आय 45,391 रुपये थी। यह वर्ष 2015-16 में घटकर 44,513 रुपये हो गई, यानी बुंदेलियों की आय में 874 रुपये की कमी आई। हालांकि, इसके पूर्व वर्ष 2011-12 से लेकर वर्ष 2014-15 तक बुंदेलखंड में प्रति व्यक्ति की औसत आय बढ़ी थी। ये सभी आंकडे़ प्रदेश के अर्थ एवं संख्या प्रभाग, राज्य नियोजन संस्थान द्वारा वर्ष 2018 में जारी हुए हैं।
बांदा में सबसे कम आय, महोबा अव्वल
बुंदेलखंड के सातों जिलों में प्रति व्यक्ति सबसे कम आय बांदा की है, जो कि तीन वर्षों में घटी है। वर्ष 2011-12 में यहां औसत आय 24,073 रुपये थी। वर्ष 2013-14 में बढ़कर 29,241 रुपये हो गई थी। वर्ष 2014-15 में और बढ़कर 32,793 रुपये प्रति व्यक्ति हो गई थी। इसके बाद 2015-16 में यह घटकर 26,394 रुपये हो गई। यह सातों जिलों से सबसे कम है। दूसरी तरफ महोबा में हर साल औसत आय बढ़ रही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2011-12 में यहां औसत आय 40,439 रुपये, वर्ष 2013-14 में 50,390 रुपये, वर्ष 2014-15 में 55,472 रुपये और वर्ष 2015-16 में 59,425 रुपये हो गई।
बुंदेलखंड में चार वर्षों में प्रति व्यक्ति की औसत आय
जनपद 2011-12 2013-14 2014-15 2015-16
बांदा 24,073 29,241 32,793 26,394
चित्रकूट 41,486 42,954 39,445 35,491
हमीरपुर 31,901 39,539 40,073 41,823
महोबा 40,439 50,390 55,472 59,425
जालौन 34,068 34,817 46,607 48,131
झांसी 38,433 45,502 60,007 59,014
ललितपुर 32,555 31,072 43,313 41,318
बुंदेलखंड 34,707 39,073 45,391 44,513
पड़ोसी जिलों की औसत आय---
जनपद 2011-12 2013-14 2014-15 2015-16
कानपुर 42,104 44,940 46,795 44,750
फतेहपुर 25,798 29,513 27,499 31,486
औरैया 26,192 22,350 21,420 24,310
इटावा 30,275 31,767 32,186 36,353
कन्नौज 20,826 22,252 24,368 28,564
उन्नाव 25,692 29,258 27,074 30,782
प्रयागराज 35,788 37,332 40,823 42,359
‘पहले से काफी सुधार हुआ है। चूंकि जनसंख्या बढ़ रही है और प्रदेश के अन्य इलाकों की अपेक्षा बुंदेलखंड में उद्योग और रोजगार कम है। इसके अलावा इन्वेस्टमेंट भी कम है, फिर भी धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।
एसएन त्रिपाठी, उपनिदेशक, अर्थ एवं संख्या विभाग, चित्रकूटधाम मंडल