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मंडल में ‘बीमार’ आयुष्मान को इलाज की दरकार
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बांदा। चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों बांदा, महोबा, चित्रकूट और हमीरपुर में गरीबों को पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज की सुविधा दिए जाने के लिए तीन वर्ष पूर्व केंद्र सरकार की शुरू हुई आयुष्मान योजना खुद ‘बीमार’ है। हैरत की बात है कि पात्रों की संख्या के आधार पर चित्रकूटधाम मंडल में 50 फीसदी भी गोल्डन कार्ड अभी तक जारी नहीं हो सके हैं। चारों जनपदों में अब तक सिर्फ 25 फीसदी लोगों के ही गोल्डन कार्ड बनाए गए हैं।
योजना के तहत गोल्डन कार्ड बनाने के मामले में सबसे ज्यादा फिसड्डी जिला बांदा रहा है। वहीं सबसे ज्यादा साढ़े 31 फीसदी गोल्डन कार्ड बनाकर महोबा जनपद पूरे मंडल में अव्वल रहा है। मंडल में 18 लाख 48 हजार 600 पात्रों में 4 लाख 62 हजार 427 लोगों के ही गोल्डन कार्ड बनाए जा सके हैं। पहली अप्रैल 2018 को लागू हुई केंद्र सरकार की आयुष्मान योजना में चित्रकूटधाम मंडल में कुल 3,69,720 पात्र परिवार चयनित हुए थे। इनमें प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में 3,53,218 और मुख्यमंत्री जन आरोग्य में 16,502 परिवार शामिल हैं। हर परिवार में पांच सदस्यों के औसत से कुल पात्र 18,48,600 चिह्नित किए गए।
इन सभी को गोल्डन कार्ड जारी किया जाना है, लेकिन कार्ड जारी करने की सुस्त रफ्तार से यह योजना चित्रकूटधाम मंडल में परवान नहीं चढ़ पा रही। न ही पात्रों को मुफ्त इलाज की सुविधा मिल पा रही है, जबकि केंद्र की मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना में यह शुमार है। गोल्डन कार्ड बनाने को लेकर इस सुस्ती पर कोरोना की आड़ भी अब जिम्मेदार अफसरों ने लेनी शुरू कर दी है। स्वास्थ्य विभाग की दलील है कि दो सालों से कोरोना संक्रमण की वजह से पुरजोर क्षमता से कैंप लगाने के बावजूद गोल्डन कार्ड जारी नहीं हो पा रहे हैं। गांवों में गोल्डन कार्ड जारी करने के लिए गठित टीमें अब कोरोना संक्रमण की रोकथाम में लगी हैं।
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मंडल में पात्र सदस्यों को जारी हुए गोल्डन कार्ड का ब्योरा-
जनपद पात्र सदस्य गोल्डन कार्ड प्रतिशत
बांदा 6,92,905 1,54,295 22.27
चित्रकूट 3,94,615 91,453 23.18
हमीरपुर 4,31,710 1,12,837 26.14
महोबा 3,29,370 1,03,842 31.53
योग 18,48,600 4,62,427 25.01
मंडल के 41 अस्पतालों में 10,830 रोगियों का इलाज
चित्रकूटधाम मंडल में आयुष्मान योजना के तहत इलाज कराने वाले पात्रों की संख्या भी बेहद कम है। योजना के तहत मंडल में चयनित कुल 41 अस्पतालों में 10,830 गोल्डन कार्डधारकों ने अपना इलाज कराया है। इनमें सत्यापन के बाद लगभग 8300 मरीजों के इलाज का भुगतान भी किया जा चुका है। बांदा में चयनित कुल 15 अस्पतालों में 10 राजकीय और पांच प्राइवेट हैं। इसी तरह हमीरपुर में 10 सरकारी और तीन निजी अस्पताल चिह्नित हैं। चित्रकूट और महोबा में सिर्फ सरकारी अस्पतालों में ही योजना के पात्रों के इलाज की व्यवस्था है। इन दोनों जिलों में क्रमश: सात और छह अस्पताल चयनित हैं। इन दोनों जिलों में निजी अस्पतालों की संख्या भी शून्य है।
मंडल में इलाज और भुगतान किए जाने वाले मरीजों का ब्योरा---
जनपद लाभार्थी भुगतान प्रतिशत
बांदा 3557 2644 74.33
चित्रकूट 2638 2225 84.34
हमीरपुर 2194 1606 73.20
महोबा 2441 1825 74.76
योग 10,830 8300 76.64
22 दिनों में 198 बने गोल्डन कार्ड
कोरोना की दूसरी लहर थमने के बाद आयुष्मान योजना के पात्रों के गोल्डन कार्ड बनाने की स्वास्थ्य विभाग ने सुध लेना शुरू कर दिया है। 22 मई से अब तक (22 दिन में) लगभग 198 पात्र लोगों के गोल्डन कार्ड बनाए गए हैं। इनमें बांदा में 42, चित्रकूट में 17, हमीरपुर में 62 और महोबा में 77 गोल्डन कार्ड बने हैं। हालांकि, अधिकांश नगरीय क्षेत्रों के पात्रों ने गोल्डन कार्ड बनवाए हैं, लेकिन सैकड़ों पात्रों का अतापता नहीं है। कई बार सर्वे के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की टीमें लापता पात्रों को नहीं खोज सकी हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लापता पात्रों को भी खोजकर गोल्डन कार्ड जारी किए जाएंगे।
ये है आयुष्मान भारत योजना
केंद्र की मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी इस योजना में समाज के कमजोर वर्ग के लोगों को शामिल किया गया है। इसमें शामिल प्रत्येक पात्र परिवार/सदस्य को सालाना पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज की सुविधा है। योजना के माध्यम से गरीब, उपेक्षित और शहरी गरीब परिवारों को स्वास्थ्य बीमा में प्राथमिकता दी गई है। इसमें उम्र का कोई बंधन नहीं है। योजना में चयनित अस्पतालों में ही आयुष्मान योजना के गोल्डन कार्डधारकों का इलाज होगा। यह योजना सितंबर 2018 में लागू हुई थी।
कोरोना की पहली लहर शांत होने पर तेजी से गोल्डन कार्ड बनाए गए। गांवों में कैंप भी लगाए गए। स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों ने घर-घर जाकर लोगों को गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए प्रेरित किया। अब कोरोना की दूसरी तेज लहर आ जाने से गोल्डन कार्ड बनाने का कार्य बाधित रहा है। महामारी थमने के बाद दोबारा गोल्डन कार्ड बनाने के लिए कैंप लगाए जाएंगे। फिलहाल सरकारी अस्पतालों में कार्ड बन रहे हैं।
- डा. आरबी गौतम, अपर निदेशक (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य), चित्रकूटधाम मंडल, बांदा
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योजना के तहत गोल्डन कार्ड बनाने के मामले में सबसे ज्यादा फिसड्डी जिला बांदा रहा है। वहीं सबसे ज्यादा साढ़े 31 फीसदी गोल्डन कार्ड बनाकर महोबा जनपद पूरे मंडल में अव्वल रहा है। मंडल में 18 लाख 48 हजार 600 पात्रों में 4 लाख 62 हजार 427 लोगों के ही गोल्डन कार्ड बनाए जा सके हैं। पहली अप्रैल 2018 को लागू हुई केंद्र सरकार की आयुष्मान योजना में चित्रकूटधाम मंडल में कुल 3,69,720 पात्र परिवार चयनित हुए थे। इनमें प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में 3,53,218 और मुख्यमंत्री जन आरोग्य में 16,502 परिवार शामिल हैं। हर परिवार में पांच सदस्यों के औसत से कुल पात्र 18,48,600 चिह्नित किए गए।
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इन सभी को गोल्डन कार्ड जारी किया जाना है, लेकिन कार्ड जारी करने की सुस्त रफ्तार से यह योजना चित्रकूटधाम मंडल में परवान नहीं चढ़ पा रही। न ही पात्रों को मुफ्त इलाज की सुविधा मिल पा रही है, जबकि केंद्र की मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना में यह शुमार है। गोल्डन कार्ड बनाने को लेकर इस सुस्ती पर कोरोना की आड़ भी अब जिम्मेदार अफसरों ने लेनी शुरू कर दी है। स्वास्थ्य विभाग की दलील है कि दो सालों से कोरोना संक्रमण की वजह से पुरजोर क्षमता से कैंप लगाने के बावजूद गोल्डन कार्ड जारी नहीं हो पा रहे हैं। गांवों में गोल्डन कार्ड जारी करने के लिए गठित टीमें अब कोरोना संक्रमण की रोकथाम में लगी हैं।
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मंडल में पात्र सदस्यों को जारी हुए गोल्डन कार्ड का ब्योरा-
जनपद पात्र सदस्य गोल्डन कार्ड प्रतिशत
बांदा 6,92,905 1,54,295 22.27
चित्रकूट 3,94,615 91,453 23.18
हमीरपुर 4,31,710 1,12,837 26.14
महोबा 3,29,370 1,03,842 31.53
योग 18,48,600 4,62,427 25.01
मंडल के 41 अस्पतालों में 10,830 रोगियों का इलाज
चित्रकूटधाम मंडल में आयुष्मान योजना के तहत इलाज कराने वाले पात्रों की संख्या भी बेहद कम है। योजना के तहत मंडल में चयनित कुल 41 अस्पतालों में 10,830 गोल्डन कार्डधारकों ने अपना इलाज कराया है। इनमें सत्यापन के बाद लगभग 8300 मरीजों के इलाज का भुगतान भी किया जा चुका है। बांदा में चयनित कुल 15 अस्पतालों में 10 राजकीय और पांच प्राइवेट हैं। इसी तरह हमीरपुर में 10 सरकारी और तीन निजी अस्पताल चिह्नित हैं। चित्रकूट और महोबा में सिर्फ सरकारी अस्पतालों में ही योजना के पात्रों के इलाज की व्यवस्था है। इन दोनों जिलों में क्रमश: सात और छह अस्पताल चयनित हैं। इन दोनों जिलों में निजी अस्पतालों की संख्या भी शून्य है।
मंडल में इलाज और भुगतान किए जाने वाले मरीजों का ब्योरा---
जनपद लाभार्थी भुगतान प्रतिशत
बांदा 3557 2644 74.33
चित्रकूट 2638 2225 84.34
हमीरपुर 2194 1606 73.20
महोबा 2441 1825 74.76
योग 10,830 8300 76.64
22 दिनों में 198 बने गोल्डन कार्ड
कोरोना की दूसरी लहर थमने के बाद आयुष्मान योजना के पात्रों के गोल्डन कार्ड बनाने की स्वास्थ्य विभाग ने सुध लेना शुरू कर दिया है। 22 मई से अब तक (22 दिन में) लगभग 198 पात्र लोगों के गोल्डन कार्ड बनाए गए हैं। इनमें बांदा में 42, चित्रकूट में 17, हमीरपुर में 62 और महोबा में 77 गोल्डन कार्ड बने हैं। हालांकि, अधिकांश नगरीय क्षेत्रों के पात्रों ने गोल्डन कार्ड बनवाए हैं, लेकिन सैकड़ों पात्रों का अतापता नहीं है। कई बार सर्वे के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की टीमें लापता पात्रों को नहीं खोज सकी हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लापता पात्रों को भी खोजकर गोल्डन कार्ड जारी किए जाएंगे।
ये है आयुष्मान भारत योजना
केंद्र की मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी इस योजना में समाज के कमजोर वर्ग के लोगों को शामिल किया गया है। इसमें शामिल प्रत्येक पात्र परिवार/सदस्य को सालाना पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज की सुविधा है। योजना के माध्यम से गरीब, उपेक्षित और शहरी गरीब परिवारों को स्वास्थ्य बीमा में प्राथमिकता दी गई है। इसमें उम्र का कोई बंधन नहीं है। योजना में चयनित अस्पतालों में ही आयुष्मान योजना के गोल्डन कार्डधारकों का इलाज होगा। यह योजना सितंबर 2018 में लागू हुई थी।
कोरोना की पहली लहर शांत होने पर तेजी से गोल्डन कार्ड बनाए गए। गांवों में कैंप भी लगाए गए। स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों ने घर-घर जाकर लोगों को गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए प्रेरित किया। अब कोरोना की दूसरी तेज लहर आ जाने से गोल्डन कार्ड बनाने का कार्य बाधित रहा है। महामारी थमने के बाद दोबारा गोल्डन कार्ड बनाने के लिए कैंप लगाए जाएंगे। फिलहाल सरकारी अस्पतालों में कार्ड बन रहे हैं।
- डा. आरबी गौतम, अपर निदेशक (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य), चित्रकूटधाम मंडल, बांदा