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पर्यावरण संसद में आज बकस्वाहा पर बड़ी बहस

Wed, 08 Sep 2021 10:50 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 08 Sep 2021 10:50 PM IST
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Big debate on bakshwaha in environment parliament today
पर्यावरणविद - फोटो : BANDA
बांदा। बुंदेलखंड का बकस्वाहा जंगल और केन-बेतवा नदी लिंक परियोजना के मुद्दे पर चल रहे देशव्यापी आंदोलन के बीच आज (गुरुवार, 9 सितंबर) को भोपाल में पर्यावरण संसद आयोजित हो रही है, जिसमें देश के कई दिग्गज पर्यावरण पुरोधाओं सहित पैरोकार शामिल होंगे। संघर्ष समन्वय समिति भी गठित होने की संभावना है।
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बकस्वाहा (छतरपुर) जंगल को मध्य प्रदेश सरकार द्वारा हीरा खदान के लिए 50 साल के पट्टे पर दे दिए जाने के बाद यह मुद्दा तूल पकड़ गया है। स्थानीय आदिवासियों से लेकर देश के नामी गिरामी पर्यावरण पैरोकार इस आंदोलन और जंगल बचाओ अभियान में कूद पड़े हैं।
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आए दिन प्रदर्शन, राष्ट्रपति और पीएम व सीएम को खून से पत्र, बकस्वाहा जंगल के पेड़ों में रक्षा सूत्र बंधन, चौपाल इत्यादि आंदोलन चल रहे हैं। इसी बीच अब 9 सितंबर (गुरुवार) को भोपाल के गांधी भवन में पर्यावरण संसद का आयोजन किया जा रहा है।
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पर्यावरण पैरोकार इसकी तैयारियां कई दिनों से कर रहे थे। माना जा रहा है कि बकस्वाहा जंगल और केन-बेतवा नदी गठजोड़ के मुद्दे इस पर्यावरण संसद में अहम निर्णय लिए जा सकते हैं। आंदोलन की नई दिशा तय की जा सकती है।
पद्मश्री वन पुरुष और मेधा पाटेकर आएंगे
बांदा। पर्यावरण संसद में देश के कई पर्यावरण दिग्गज शरीक हो रहे हैं। आयोजकों के मुताबिक फारेस्ट मैन आफ इंडिया (वन पुरुष) के नाम से मशहूर और पद्मश्री जादव मुलाई पायेंग (असम) सहित नर्मदा बचाओ आंदोलन की अगुवा मेधा पाटेकर भी पर्यावरण संसद में भाग लेंगी।
पर्यावरण संसद में ये पर्यावरणविद भी होंगे शामिल
जल पुरुष राजेंद्र सिंह (राजस्थान), विश्लेषक योगेंद्र यादव (नई दिल्ली), गांधीवादी विचारक पीवी राजगोपाल (नई दिल्ली), पद्मश्री बाबूलाल दाहिया (एमपी), पद्मश्री श्याम सुंदर पालीवाल (राजस्थह्यान), एमपी की पूर्व मुख्य सचिव निर्मला बुच, रिटायर्ड आईएएस एससी बेहार, एमपी के रिटायर्ड पुलिस महानिदेशक अरुण गुर्टू, रिटायर्ड आईएएस विल्फ्रेड लकड़ा, रिटायर्ड आईएफएस डॉ. राम प्रसाद, पूर्व डीजीपी केरल उपेंद्र वर्मा, पूर्व कुलपति उदय जैन (रींवा), पुरातत्व विशेषज्ञ प्रो. एसके छारी (छतरपुर), कृषि विशेषज्ञ आकाश चौरसिया (सागर), अर्थशास्त्री सुश्री जया मेहता (दिल्ली), कवि विनीत तिवारी, बंधुवा मुक्ति मोर्चा के निर्मल अग्निवेश (दिल्ली), रिटायर्ड आईएएस सुरेश जैन (छतरपुर), रिटायर्ड आईएफएस वीके बहुगुणा (त्रिपुरा) सहित राकेश दीवान, पर्यावरण पैरोकार आशीष सागर दीक्षित (बांदा), पुष्पेंद्र भाई (बांदा), डॉ. सुभाष पांडे (भोपाल), भगवान जी (मुंबई), अनुज शर्मा व सुमित तिवारी (महोबा) सहित देश के कई विख्यात पर्यावरणविद शामिल हैं। आयोजन समिति के रामकुमार विद्यार्थी, अमित भटनागर, आनंद पटेल, डॉ. रचना डेविड, आफताब आलम हाशमी, बीनू बघेल सहित अन्य सदस्यों ने पर्यावरण संसद की व्यवस्थाएं की हैं।
तीन सत्रों में चलेगी पर्यावरण संसद
बांदा। पर्यावरण संसद में तीन सत्र होंगे। आयोजन समिति से जुड़े शरद सिंह कुमरे, अमित भटनागर व आशीष सागर दीक्षित ने बताया कि पहले सत्र में खुली बहस होगी। दूसरे सत्र में वर्चुअल मीटिंग के जरिये जल पुरुष राजेंद्र सिंह राणा, एकता परिषद के पीवी राजगोपाल और किसान आंदोलन से जुड़े और विश्लेषक योगेंद्र यादव आदि संबोधित करेंगे। प्रतिभाग करेंगे।

बकस्वाहा जंगल के मुख्य मुद्दे
बांदा। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि बकस्वाहा जंगल के 2.15 लाख पेड़ काटकर हीरा खदान संचालित करना पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक है। बड़ी संख्या में आदिवासी बेरोजगार और बेघर हो जाएंगे। लगभग 17 गांव प्रभावित होंगे। सरकार ने बकस्वाहा जंगल को हीरा खनन के लिए बिड़ला ग्रुप की एक्सल माइनिंग कंपनी को 50 साल के पट्टे पर दे दिया है। एमपी सरकार को 2500 करोड़ राजस्व मिलने की बात कही जा रही है।

आशीष सागर व जादव मुलाई।

आशीष सागर व जादव मुलाई।- फोटो : BANDA

शरद कुमले।

शरद कुमले।- फोटो : BANDA

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